चैनाकेशव मन्दिर, बेलूर, कर्नाटक भाग :१६९ , पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल: चैनाकेशव मन्दिर, बेलूर, कर्नाटक भाग :१६९

आपने पिछले भाग में पढ़ा भारत के धार्मिक स्थल : मन्जूनाथेश्वर मन्दिर, श्रीक्षेत्र धर्मशाला, कर्नाटक! यदि आपसे उक्त लेख छूट गया अथवा रह गया हो और आपमें पढ़ने की जिज्ञासा हो तो आप प्रजा टूडे की वेब साईट पर जाकर, धर्म- साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम आपके लिए लाए हैं : भारत के धार्मिक स्थल: चैनाकेशव मन्दिर, बेलूर, कर्नाटक भाग :१६९

भारतवर्ष का प्रसिद्ध चेन्नाकेशव मन्दिर बेलूर, कर्नाटक राज्य में स्थित है! होयसल वँशीय नरेश विष्णुवर्धन का १११७ ईस्वी में बनवाया हुआ चेन्नाकेशव का प्रसिद्ध मन्दिर बेलूर की ख्याति का कारण है! इस मन्दिर को, जो स्थापत्य एवँ मूर्तिकला की दृष्टि से भारतवर्ष के सर्वोत्तम मन्दिरों में है, कई बार लूटा उक्त मन्दिर, किन्तु हिन्दू नरेशों ने बार-बार इस मन्दिर का जीर्णोद्वार करवाया!

स्थापत्य विशेषताएँ :

मन्दिर १७८फुट लम्बा और १५६ फुट चौड़ा है! परकोटे में तीन प्रवेशद्वार हैं, जिनमें सुन्दर मूर्तिकारी है! इसमें अनेक प्रकार की मूर्तियाँ जैसे हाथी, पौराणिक जीवजन्तु, मालाएँ, स्त्रियाँ आदि उत्कीर्ण हैं! मन्दिर का पूर्वी प्रवेशद्वार सर्वश्रेष्ठ है! यहाँ पर रामायण तथा महाभारत के अनेक दृश्य अँकित हैं! मन्दिर में चालीस वातायन हैं। जिनमें से कुछ के पर्दे जालीदार हैं और कुछ में रेखागणित की आकृतियाँ बनी हैं!

अनेक खिड़कियों में पुराणों तथा विष्णुवर्धन की राजसभा के दृश्य हैं! मन्दिर की सँरचना दक्षिण भारत के अनेक मन्दिरों की भाँति है! इसके स्तम्भों के शीर्षाधार नारी मूर्तियों के रूप में निर्मित हैं और अपनी सुन्दर रचना, सूक्ष्म तक्षण और अलँकरण में भारत भर में बेजोड़ कहे जाते हैं! ये नारीमूर्तियाँ मदनकई नाम से प्रसिद्ध हैं! गिनती में ये ३८ हैं, ३४ बाहर और शेष ४ अन्दर हैं! ये लगभग २ फुट ऊँची हैं और इन पर उत्कृष्ट प्रकार की श्वेत पालिश है, जिसके कारण ये मोम की बनी हुई जान पड़ती है!

मूर्तियाँ परिधान रहित हैं, केवल उनका सूक्ष्म अलँकरण ही उनका आच्छादान है! यह विन्यास रचना सौष्ठव तथा नारी के भौतिक तथा आँतरिक सौन्दर्य की अभिव्यक्ति के लिए किया गया है! भाव भँगिमाओं के अँकन मूर्तियों की भिन्न-भिन्न भाव-भँगिमाओं के अँकन के लिए उन्हें कई प्रकार की क्रियाओं में सँलग्न दिखाया गया है! एक स्त्री अपनी हथेली पर अवस्थित शुक को बोलना सिखा रही है! दूसरी धनुष सँधान करती हुई प्रदर्शित है! तीसरी बाँसुरी बजा रही है, चौथी केश- प्रसाधन में व्यस्त है, पाँचवी सद्यः स्नाता नायिका अपने बालों को सुखा रही है, छठी अपने पति को तम्बूल प्रदान कर रही है और सातवीं नृत्य की विशिष्ट मुद्रा में है!

चेन्नाकेशव मन्दिर, बेलूर की इन कृतियों के अतिरिक्त बानर से अपने वस्त्रों को बचाती हुई युवती, वाद्ययंत्र बजाती हुई मदविह्वला नवयौवना तथा पट्टी पर प्रणय सन्देश लिखती हुई विरहिणी, ये सभी मूर्तिचित्र बहुत ही स्वाभाविक तथा भावपूर्ण हैं। एक अन्य मनोरंजक दृश्य एक सुन्दरी बाला का है, जो अपने परिधान में छिपे हुए बिच्छू को हटाने के लिए बड़े सँभ्रम में अपने कपड़े झटक रही है! उसकी भयभीत मुद्रा का अँकन मूर्तिकार ने बड़े ही कौशल से किया है!उसकी दाहिनी भौंह बड़े बाँके रूप में ऊपर की ओर उठ गई है और डर से उसके समस्त शरीर में तनाव का बोध होता है! तीव्र श्वांस के कारण उसके उदर में बल पड़ गए हैं, जिसके परिणाम स्वरूप कटि और नितम्बों की विषम रेखाएँ अधिक प्रवृद्ध रूप में प्रदर्शित की गई हैं!

कला की चरमावस्था

मन्दिर के भीतर की शीर्षाधार मूर्तियों में देवी सरस्वती का उत्कृष्ट मूर्तिचित्र देखते ही बनता है! देवी नृत्यमुद्रा में है जो विद्या की अधिष्ठात्री के लिए सर्वथा नई और प्रथम बार देखी बात है! इस मूर्ति की विशिष्ट कला की अभिव्यँजना इसकी गुरुत्वाकर्षण रेखा की अनोखी रचना में है!यदि मूर्ति के सिर पर पानी डाला जाए तो वह नासिका से नीचे होकर वाम पार्श्व से होता हुआ खुली वाम हथेली में आकर गिरता है और वहाँ से दाहिने पाँव मे नृत्य मुद्रा में स्थित तलवे में होता हुआ बाएँ पाँव पर गिर जाता है!

वास्तव में होयसल वास्तु विशारदों ने इन कलाकृतियों के निर्माण में मूर्तिकारी की कला को चरमावस्था पर पहुँचा कर उन्हें सँसार की सर्वश्रेष्ठ शिल्पकृतियों में उच्चस्थान का अधिकारी बना दिया है! १४३३ ईस्वी में ईरान के यात्री अब्दुल रज़्ज़ाक ने इस मन्दिर के बारे में लिखा था कि वह इसके शिल्प के वर्णन करते हुए डरता था कि कहीं उसके प्रशँसात्मक कथन को लोग अतिशयोक्ति न समझ लें! क़माल की शिल्पकला है जो अन्यत्र शायद ही देखने को मिले!

केशव गोपाल स्तुति :

नमो विश्वस्वरूपाय विश्वस्थित्यन्तहेतवे।
विश्वेश्वराय विश्वाय गोविन्दाय नमो₹ नमः॥०१॥

नमो विज्ञानरूपाय परमानन्दरूपिणे।
कृष्णाय गोपीनाथाय गोविन्दाय नमो नमः॥०२॥

नमः कमलनेत्राय नमः कमलमालिने।
नमः कमलनाभाय कमलापतये नमः॥०३॥

बर्हापीडाभिरामाय रामायाकुण्ठमेधसे।
रमामानसहंसाय गोविन्दाय नमो नमः॥०४॥

कंसवशविनाशाय केशिचाणूरघातिने।
कालिन्दीकूललीलाय लोलकुण्डलधारिणे॥०५॥

वृषभध्वज-वन्द्याय पार्थसारथये नमः।
वेणुवादनशीलाय गोपालायाहिमर्दिने॥०६॥

बल्लवीवदनाम्भोजमालिने नृत्यशालिने।
नमः प्रणतपालाय श्रीकृष्णाय नमो नमः॥०७॥

नमः पापप्रणाशाय गोवर्धनधराय च।
पूतनाजीवितान्ताय तृणावर्तासुहारिणे॥०८॥

निष्कलाय विमोहाय शुद्धायाशुद्धवैरिणे।
अद्वितीयाय महते श्रीकृष्णाय नमो नमः॥०९॥

प्रसीद परमानन्द प्रसीद परमेश्वर।
आधि-व्याधि-भुजंगेन दष्ट मामुद्धर प्रभो॥१०॥

श्रीकृष्ण रुक्मिणीकान्त गोपीजनमनोहर।
संसारसागरे मग्नं मामुद्धर जगद्गुरो॥११॥

केशव क्लेशहरण नारायण जनार्दन।
गोविन्द परमानन्द मां समुद्धर माधव॥१२॥

॥ इत्याथर्वणे केशव गोपाल स्तुति समाप्त ॥

 

वायु मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर:

कर्नाटक में स्थित बेलूर में कोई हवाई अड्डा नहीं है लेकिन यह बैंगलोर से सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है! बैंगलोर भारत और दुनिया के अधिकांश हिस्सों से सड़क, रेल और हवाई मार्ग से पहुँचा जा सकता है! बेलूर कर्नाटक के अन्य प्रमुख शहरों जैसे मैंगलोर और मैसूर के साथ भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है! बेलूर पहुंचने का तरीका यहां बताया गया है: हवाई मार्ग से निकटतम हवाई अड्डा लगभग २२२ किलोमीटर दूर बेंगलुरु में है! हवाई अड्डा मुंबई, चेन्नई, दिल्ली और अन्य भारतीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है! बेंगलुरु पहुंचने के लिए टैक्सी किराए पर ली जा सकती है!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

हसन निकटतम रेलवे स्टेशन है! नई दिल्ली, मुंबई और कर्नाटक के अन्य शहरों से ट्रेनें हासन रेलवे स्टेशन पर रुकती हैं! भारत का राष्ट्रीय रेल ऑपरेटर देश भर में लम्बी दूरी और उपनगरीय दोनों मार्गों पर धीमी मल्टी-स्टॉप से ​​तेज़ और अधिक आरामदायक सेवाओं तक यात्री और मालगाड़ी चलाता है! यह देश का पता लगाने का एक व्यावहारिक और किफायती तरीका है! अग्रिम टिकट बुकिंग आमतौर पर भारतीय नागरिकों के लिए यात्रा की तारीख से १२० दिन पहले शुरू होती है; अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए ३६५ दिन! जब आप अपनी यात्रा की श्रेणी बुक करते हैं और चुनते हैं तो आपको एक सीट या बर्थ आवँटित कर दी जाती है!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

बेलूर कर्नाटक के अन्य शहरों जैसे बेंगलुरु, मैंगलोर और मैसूर से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है! बेंगलुरू से बेलुरू के लिए बसें नियमित रूप से चलती हैं! दिल्ली से अपनी कार अथवा बस से आप चेन्नाकेशव मन्दिर तक आने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग NH-४४ से १,४६४.३किलोमीटर की दूरी तय करके घण्टे मिन्टस में पहुँच जाओगे मन्दिर!

चेन्नाकेशव की जय हो! जयघोष हो!!

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