आजादी का अमृत महोत्सव में नवोन्वेषी कृषि पर राष्ट्रीय कार्यशाला

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@ नई दिल्ली

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशव्यापी अभियान प्रारंभ किया है और इस दिशा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग भी मिशन मोड में कार्य करने जा रहा है।

कृषि संबंधी पाठ्यक्रमों में भी प्राकृतिक खेती का विषय शामिल करने को लेकर बनाई गई समिति ने भी काम शुरू कर दिया है।तोमर ने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से हमारा प्रकृति के साथ तालमेल बढ़ेगा, जिसके कृषि क्षेत्र में-गांवों में ही रोजगार बढ़ने सहित देश को व्यापक फायदे होंगे।

केंद्रीय मंत्री तोमर ने यह बात आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में नीति आयोग द्वारा नवोन्वेषी कृषि विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में कही। कार्यशाला में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत भी शामिल हुए, वहीं केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन व डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला वर्चुअल जुड़े थे।

तकनीकी सत्रों में उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा प्रमुख कृषि विशेषज्ञों ने उद्बोधन दिया।जिसकी पूर्ति के लिए संज्ञान लिया जाना चाहिए। खेती के सामने कई चुनौतियां हैं, उन पर फोकस करते हुए किसानों को नई मांग के अनुरूप प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

उन्होंने आर्गेनिक रकबा बढ़ाने के लिए लागू किए गए लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन सिस्टम हेतु कृषि मंत्री तोमर को धन्यवाद दिया, जिसके तहत सदैव रसायनमुक्त रही भूमि को आर्गेनिक घोषित किया जाता है। रूपाला ने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से हमें अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिला है। यह पद्धति भारत को विश्व में अग्रणी बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

गुजरात के राज्यपाल देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती में पौधे को पानी नहीं, बल्कि नमी चाहिए होती है। इस पद्धति में पहले साल लगभग 50 प्रतिशत पानी कम लगता है और तीसरे साल तक लगभग सत्तर प्रतिशत पानी की बचत होने लगती है।इस विधा में जीवाणु काफी संख्या में बढ़ते हैं, जो खेती की जान होती है। मृदा में कार्बन की मात्रा भी बढ़ती है, जो मृदा स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है।

राज्यपाल ने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्परिणाम सबके सामने है, जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए भी चौबीस प्रतिशत जिम्मेदार है। इसके कारण भूजल भी औसतन हर साल लगभग चार फीट नीचे जाता जा रहा है। उन्होंने उदाहरण सहित बताया कि प्राकृतिक खेती में तीन फसल लेने का प्रयोग भी सफल हुआ है, वहीं पानी की कमी वाले क्षेत्रों में भी यह पद्धति सफल हो रही है।

इस पद्धति का विस्तार होगा तो केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही भारी खाद सब्सिडी की राशि की भी बचत होगी। देवव्रत ने कहा कि धरती को बंजर होने से बचाने, पानी की बचत करने व पशुधन के उपयोग की दृष्टि से हमें प्राकृतिक खेती को अपनाना ही होगा, जिसके लिए केंद्र सरकार, नीति आयोग तथा अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर देशभर में युद्धस्तर पर अभियान चलाना शुरू किया गया है।

प्रारंभ में, नीति आयोग की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नीलम पटेल ने स्वागत भाषण दिया। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत व सदस्य प्रो. रमेश चंद ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर सफलता की कहानियों के संग्रह और प्राकृतिक खेती का अभ्यास करने वाले किसानों के वीडियो का विमोचन भी किया गया। आयोग के निवृत्तमान उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार भी उपस्थित थे।

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