आठ अंकों का परिवार पहचान पत्र लोगों के लिए बना कारगर दस्तावेज

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@ चंडीगढ़ हरियाणा 

मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल के विज़न के अनुरूप गठित नए नागरिक संसाधन सूचना विभाग द्वारा बनाया गया आठ अंकों का परिवार पहचान पत्र प्रदेश के लोगों के लिए कारगर दस्तावेज सिद्ध हो रहा है ।  जैसे ही कोई नागरिक 60 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है तत्काल उसका नाम अपने आप वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना के लाभ पात्रों की सूची में शामिल हो जाता है। अब उसे न तो किसी दफतर के चक्कर काटने पड़ते हैं और न ही किसी के आगे फरियाद करने की जरूरत होती है।

मुख्यमंत्री जहां-जहां जाते हैं, वहां पर नये लाभ पात्रों को स्टेज पर बुलाकर स्वयं वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना की सूची में नाम शामिल होने का प्रमाण पत्र देते हैं और लोगों से पूछते हैं कि सरपंच, नंबरदार या किसी और के पास जाने की जरूरत तो नहीं पड़ी, तो उत्तर मिलता है, नहीं जी। 60 वर्ष की आयु होते ही परिवार पहचान पत्र से अपने आप सूची में नाम शामिल हुआ है और आपके हाथों हम आज प्रमाण पत्र ले रहे हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार हर महीने लगभग 5 हजार नई पेंशन बन रही हैं ।

परिवार पहचान पत्र को आधार कार्ड से भी कारगर दस्तावेज मान रहे हैं लोग। ये एक ऐसा दस्तावेज सिद्ध हुआ है जिसके माध्यम से सभी सरकारी योजनाओं/सेवाओं का लाभ पात्र व्यक्ति को मिलने लगा है। इस पोर्टल पर अब तक 70 लाख से अधिक परिवारों का पंजीकरण हो चुका है जिस राज्य की 2.76 करोड़ आबादी कवर हो जाती है इनमें से लगभग 86 प्रतिशत परिवारों का डाटा सत्यापित हो चुका है। युवाओं की शिक्षा, कौशल व बेरोजगारी का डाटा भी इस पोर्टल पर डाला गया है।
 
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांत को सही मायने में हरियाणा ने मूर्तरूप दिया है। इसके लिए एक नई मुख्यमंत्री अंत्योदय उत्थान परिवार योजना लागू की गई। योजना का उ६ेश्य ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आय 1 लाख रूपये से कम है, उनकी आय 1.80 लाख करना है। इसके लिए भी परिवार पहचान पत्र के डाटा का उपयोग किया गया और लगभग 3.50 लाख परिवारों की जिनकी आय 1 लाख रूपये से कम थी उन परिवारों के लिए तीन चरणों में अंत्योदय मेलों का आयोजन किया गया।

जिसमें 1.50 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया और 28 हजार लोगों का बैंकों ने स्व-रोजगार के लिए 80 हजार से  2 लाख रूपये तक का ऋण मंजूर किया जो सही मायने में अंत्योदय के मूलमंत्र को चरित्रार्थ करता है। ऐसे भी लाभपात्रों को भी मुख्यमंत्री स्वयं स्वीकृत ऋण का पत्र अपने हाथों से वितरित करते हैं और पूछते हैं कि इस पैसे का क्या करोगे , तो महिलाओं में से कोई ब्यूटी पार्लर, कोई मनियारी की दुकान तो कोई रेडीमेड कपड़ों की दुकान तो कोई दूध की डेयरी खोलने की बात कहता है। मुख्यमंत्री का मानना है कि अवसर मिले तो स्व-रोजगार से आगे का जीवन सुधर सकता है इतना ही नहीं मुख्यमंत्री स्वयं लोगों से लिया गया ऋण समय पर वापिस अदा करने की अपील भी करते हैं।

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