आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब शीघ्र ओपीडी पंजीकरण संभव

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@ नई दिल्ली

क्यूआर कोड आधारित ओपीडी पंजीकरण सेवा रोगियों को अपने मोबाइल फोन (फोन कैमरा/स्कैनर/आभा एप/आरोग्य सेतु एप/या किसी अन्य एबीडीएम सक्षम एप का उपयोग करके) अस्पताल के यूनिक क्यूआर कोड को स्कैन करने और अस्पताल के साथ अपने प्रोफाइल विवरण साझा करने की अनुमति देती है। एक बार प्रोफाइल साझा करने के बाद अस्पताल एक टोकन नंबर (पंक्ति संख्या) प्रदान करता है।

यह निर्मित किया गया टोकन रोगी के चयनित एप को एक अधिसूचना के रूप में भेजा जाता है और रोगियों की आसानी के लिए ओपीडी पंजीकरण काउंटरों पर प्रदर्शित स्क्रीन पर भी दिखाया जाता है। अपने टोकन संख्या के अनुसार रोगी पंजीकरण काउंटर पर जा सकते हैं और सीधे डॉक्टर से परामर्श के लिए अपनी आउट पेशेंट पर्ची (ओपी स्लिप) प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि उनका विवरण पंजीकरण काउंटर पर पहले से उपलब्ध है।

इस सेवा के लाभों के बारे में एनएचए के सीईओ डॉ. आर.एस. शर्मा ने कहा- एबीडीएम के तहत हम प्रक्रियाओं को सरल बनाने और स्वास्थ्य सेवा को और अधिक कुशल बनाने के लिए तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। क्यूआर कोड आधारित त्वरित ओपीडी पंजीकरण सेवा इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है।

इसने एलएचएमसी और एसएसकेएच में इस प्रायोगिक सेवा के शुरू होने के 15 दिनों के भीतर पंजीकरण काउंटर पर काफी कम प्रतीक्षा समय और न्यूनतम समय के साथ 2200 से अधिक रोगियों को लंबी कतारों की भीड़ से बचने में सहायता की है। इसके अलावा प्रत्यक्ष प्रोफाइल साझाकरण ने रोगी रिकॉर्ड में उच्च स्तर की सटीकता प्राप्त करने में भी सहायता की है। हमारी टीम इस सेवा का विस्तार करने और अधिक रोगियों की सहायता करने के लिए अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं और विभागों के साथ काम कर रही है।”

एबीडीएम की टीम ने अपने ओपीडी ब्लॉक के लिए क्यूआर कोड आधारित त्वरित पंजीकरण सेवा शुरू करने के लिए एलएचएमसी/एसएसकेएच की टीम के साथ मिलकर काम किया है। रोगियों के लिए प्रतीक्षा समय को काफी कम करने के लिए उचित संदेश और कियोस्क लगाए गए। इसके अलावा रोगियों की सहायता के लिए इस सेवा का उपयोग करने के चरणों और लाभों को समझने में सहायता करने को लेकर सहायक कर्मियों को भी तैनात किया गया।

टीम ने रोगियों को अपना आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता या आभा नंबर निर्मित करने में भी सहायता की जो उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने में सहायता करेगा। रोगियों के समय और प्रयास को बचाने में सहायता करने को लेकर इन सेवाओं को अब अस्पतालों क्लीनिकों और नैदानिक ​​प्रयोगशालाओं आदि जैसी अधिक स्वास्थ्य सुविधाओं तक बढ़ाया जाएगा।

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