बाबा बालकनाथ शाहतलाई, दियोटसिद्ध, हिमाचल प्रदेश भाग : ४५,पं० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की कलम से

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भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल: बाबा बालकनाथ शाहतलाई, दियोटसिद्ध, हिमाचल प्रदेश भाग : ४५

आपने पिछले भाग में पढ़ा : भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल: मुरली मनोहर मन्दिर, सुजान पुर, हमीर पुर, हिमाचल प्रदेश!यदि आपसे यह लेख छूट गया हो और आपमें पढ़ने की जिज्ञासा हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाइट पर धर्म-सहित्य पृष्ठ पर जा कर पढ़ सकते हैं! आज प्रस्तुत है: भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल: बाबा बालकनाथ शाहतलाई, दियोटसिद्ध, हिमाचल प्रदेश भाग : ४५

श्री बाबा बालकनाथ शाहतलाई

मन्दिर परिसर दियोटसिद्ध से यह स्थान लगभग छः किलोमीटर की दूरी पर है! यहाँ पर बाबा बालकनाथ जी ने सबसे पहले पदार्पण किया था और एक विशाल वटवृक्ष के नीचे अपनी धूनी रमाई थी! कुछ लोग इस वृक्ष को डकैनण वृक्ष भी कहते हैं! शाहतलाई आने पर बाबा जी की भेंट रतनों माई से हुई थी! यह वही बुढ़िया माँ थी, जिनके पास कैलाश धाम जाते हुए बाबा बालकनाथ जी ने द्वापर युग में विश्राम किया था! उस ऋण की मुक्ति के लिए बाबा ने १२ वर्ष तक इस रत्ना माई की गायें चराई थीं! शाहतलाई में बाबा बालकनाथ जी का एक विशाल मन्दिर परिसर आज भी मौजूद है!

वेद पुराणानुसार धर्म के साथ

हिमाचल के दियोटसिद्ध में स्थित भक्तों के बीच प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मन्दिर में चैत्र मास में मेले का शुभारंभ होता है, जो कि लोहड़ी तक १३ अप्रैल तक चलेगा! स्मरण रहे १४ मार्च मकर संक्रान्ति को झण्डा रस्म के साथ ही बाबा जी का मेला प्रारम्भ किया गया था, ग़ौरतलब है कि प्रथम दिन लगभग २५ हज़ार श्रद्धालुओं ने बाबा जी का आशीर्वाद प्राप्त किया! विभिन्न प्रदेशों से आए श्रद्धालुओं की कतारें सुबह पाँच बजे से ही लगना प्रारम्भ हो गई! यधपि पुलिस प्रशासन को श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए काफ़ी मशक्कत भी करनी पड़ती है! इस बार कोरोना के मद्देनजर विशेष ध्यान रखा गया है! मन्दिर को २४ घंटे खुला रखा जाएगा, सैनिटाइजेशन के लिए मन्दिर दिन में दो बार थोड़ी देर बन्द भी रहेगा! बाबा जी प्राँगण में टन टन का स्वर सुनाई नहीँ देगा, कारण? सभी घण्टों को सील कर दिया जाएगा! ओमीग्राम-कोविड के चलते ही सुरक्षा की दृष्टि से यह किया जाएगा! जिसने दोनों टीकाकरण नहीँ कराया होगा, उसे दर्शनों की अनुमति ही नहीँ होगी!

बाबा बालक नाथ मन्दिर के बारे में अनोखी जानकारी देते हैं:

प्राचीन मान्यतानुसार बाबा बालक नाथ जी को भगवान शिव का अँश-अवतार ही माना जाता है! श्रद्धालुओं में ऐसी धारणा है कि बाबा बालक नाथ जी अल्पायु में ही अपना घर छोड़ कर चार धाम की यात्रा करते-करते शाहतलाई नामक स्थान पर पहुंचे थे, शाहतलाई में ही रहने वाली माई रतनो नामक महिला ने, जिनकी कोई सन्तान नहीं थी इन्हें अपना धर्म पुत्र बना लिया था! बाबा जी ने १२ वर्ष माई रतनो की गाय चराईं। कहा जाता है एक दिन गुस्से में माता रतनो ने रोटी का ताना दे दिया! जिसके बाद इन्होंने १२ वर्ष की लस्सी व रोटियाँ एक पल में योग बल से ढेर लगाकर लौटा दीं! इस घटना की जब आस-पास के क्षेत्र में चर्चा हुई तो ऋषि-मुनि व अन्य लोग बाबा बालकनाथ जी की चमत्कारी शक्ति से बहुत प्रभावित हुए!

गुरु गोरख नाथ जी को जब से ज्ञात हुआ कि एक बालक बहुत ही चमत्कारी शक्ति वाला है तो उन्होंने बाबा बालक नाथ जी को अपना चेला बनाना चाहा लेकिन बाबा जी के इन्कार करने पर गोरखनाथ बहुत क्रोधित हुए! जब गोरखनाथ ने उन्हें ज़बरदस्ती चेला बनाना चाहा तो बाबा जी शाहतलाई से उडारी मारी और धौलगिरि पर्वत पर जा पहुँचे जहाँ बाबा बालकनाथ जी की पवित्र सुन्दर गुफा स्थापित है! मन्दिर के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही अखण्ड धूणा सब भक्तजनों को आकर्षित करता है! ये धूणा बाबा बालक नाथ जी का तेज स्थल होने के कारण भक्तों की असीम श्रद्धा का केंद्र है! धूणे के पास ही आप देखेंगे बाबा जी का पुरातन चिमटा है! इस गुफा में महिलाओं का जाना वर्जित है! बाबा जी की गुफा के सामने ही एक बहुत सुन्दर गैलरी का निर्माण किया गया है जहाँ से महिलाएँ, बाबर से ही बाबा जी की सुन्दर गुफा में प्रतिष्ठित मूर्ति के दर्शन करती हैं! यहाँ भक्तजन बाबा जी की गुफा पर रोट का प्रसाद चढ़ाते हैं! ऐसा बताया जाता है कि जब बाबा जी गुफा में अलोप हुए तो यहाँ एक दीपक जलता रहता था जिसकी रोशनी रात्रि में दूर-दूर तक जाती थी इसलिए लोग बाबा जी को, ‘दियोट सिद्ध’ के नाम से भी जानते हैं! लोगों की मान्यता है कि भक्त मन में जो भी इच्छा लेकर जाए वो अवश्य पूरी होती है! बाबा जी अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं इसलिए भारतवर्ष देश और विदेश से भी दूर-दूर से श्रद्धालु बाबा जी के मन्दिर में अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करने आते हैं!शाहतलाई बाबा

 

बालकनाथ अराधना:
आपका नाम है जी बाबा बालक
रिद्धि सिद्धि के तुम हो मालिक
अर्ज हमारी सुन लो स्वामी
घट घट के तुम अन्तर्यामी
तेरे दर्शन का हूँ प्यासा
पूर्ण कर दो मेरी आशा
कष्ट निवारो काज संवारो
भव सागर से पार उतारो
आया शरण तुम्हारी
बाबा जय जय पोणाहारी…..
सोहणा वर्ण निराला
आसन सोणा है मृगशाला
सिंगी माला गल मे सोहे
भक्तजनो के जो मन मोहे
मस्तक तेज निराला दमके
सुन्दर पद्म पैर में चमके
अँग भभूत है खूब रमाई
जटा सुनहरी शीश सुहाई
रुप धरा अवतारी
बाबा जय जय पोणाहारी…..
महिमा तेरी मैं तो गाऊँ
मन मन्दिर में तुझे बसाऊँ
पिता नारायण लक्ष्मी माता
यश तुम्हारा है जग गाता
नाम प्रभु का ध्याया तुमने
वर शंकर से पाया तुमने
अमर हुए अमर फल पाया
मोहमाया से प्यार ना किया


बने बाल ब्रम्हचारी
बाबा जय जय पोणाहारी…..
बाबा जी बालक सिद्ध
कलियुग में हुए प्रसिद्ध
घर रत्नो के अलख जगाते
गऊओं के पाली कहलाते
एक रोज माया बरताई
देख रही थी रत्नो माई
कईं बरस की रोटिया सारी
लस्सी की भर दिनी क्यारी
रचया कोतुक भारी
बाबा जय जय पोणाहारी…..
वचन को पूरा किया
रत्नो का लेखा दिया
महिमा सुन कर गौरख नाथ
आए लेकर चेले साथ
भूख लगी गौरख फरमाए
दुध साथ सब दियो रजाए
जबरन तुमको करने चेले
गौरख मंडली डाले घेरे
उड़ गए मार उडारी
बाबा जय जय पोणाहारी…..
शाहतलाई गाँव गौरख मंडली
देख तमाम धौलगिरी पर्वतअंदर
सुन्दर सुहाना रचया मन्दिर
मन्दिर में है तुम्हरी ज्योति
सुबह शाम है आरती होती
तेरी महिमा लिखी ना जाती
पूजा पाठ होवे दिन राती
है सुन्दर गुफा न्यारी
बाबा जय जय पोणाहारी…..
शरण में जो जन आए
मन इच्छा सोई फल पाए
सात बार जो पड़े प्रेमी
श्रद्धा से होवे नित नेमी
सुबह शाम पाठ जो करे
सकल कष्ट बाबा जी हरे
दूख दरिद्र नेड़े ना आवे
ज्ञान ध्यान सभी सुख पावे
ज्ञानेश्वर के प्रेम पुजारी
बाबा जय जय पोणाहारी…..

वायु मार्ग:

सिद्ध बाबा बालक नाथ मन्दिर, ड्योड़सिद्ध, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश के लिए दिल्ली और चंडीगढ़ से फ्लाइट मिलती हैं, धर्मशाला के पास, गग्गल (काँगड़ा) है! यहाँ से मन्दिर तक जाने के लिए कैब की सुविधा भी उपलब्ध है!लगभग १२८ किलोमीटर की दूरी पर है!

रेल मार्ग:

सिद्ध बाबा बालक नाथ मन्दिर, शाहतलाई, ड्योड़सिद्ध, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश के लिए दिल्ली रेल से आपको बता दें कि : यहाँ सीधे रूप से रेल मार्ग से जुड़ा हुआ नहीं है! निकटतम रेलवेस्टेशन ऊना (ब्राड गेज रेल्वे लाईन है, जो कि ५५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है! रेल मार्ग से आने वाले यात्री जान लें, यहाँ रेलवे स्टेशन से बसें व कैब्स भी उपलब्ध हैं!

सड़क मार्ग:

सिद्ध बाबा बालक नाथ मन्दिर, शाहतलाई, ड्योड़सिद्ध, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश के लिए दिल्ली से या कहीँ से भी यहाँ आने के लिए आप सड़क मार्ग से भी आ सकते हैं! यहाँ आने के लिए दिल्ली के आनन्द विहार ISBT से अंतर्देशीय राज्य बस सेवा की बसें चलती हैं! दिल्ली से सिद्ध बाबा बालक नाथ मन्दिर, ड्योड़सिद्ध, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश के लिए दूरी करीब ४३२.२ किलोमीटर है! हिमाचल प्रदेश राज्य परिवहन कॉरपोरेशन की बस से ४३२.२ किलोमीटर की दूरी पार करके ९ घण्टे ३० मिनट की दूरी पर स्थित है! यहाँ तक आने के लिए बस व कार सेवा सुविधा उपलब्ध है! इसके अलावा यात्री अपने निजी वाहनों व हिमाचल प्रदेश टूरिज्म विभाग की बसों के द्वारा भी यहाँ तक सकते हैं! निजी वाहन से आप राष्ट्रीय राजमार्ग NH-४४ एवँ NH-५ से आसानी से आ सकते हैं!

बाबा बालकनाथ शाहतलाई की जय हो! जयघोष हो!!

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