बेड़ी हनुमान मन्दिर पूरी, उड़ीसा भाग:३२७,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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बेड़ी हनुमान मन्दिर, पूरी, उड़ीसा भाग:३२७

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिकस्थल :श्रीबाबा धोपेश्वरनाथ भगवान शिवशँकर मन्दिर, बरेली कैन्ट, उत्तरप्रदेश! यदि आपसे उक्त लेख छूट गया या रह गया हो तो आप कृपया करके प्रजा टूडे की वेब साईट पर जाकर www.prajatoday.com धर्मसाहित्य पृष्ठ पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजाटूडे समाचारपत्र के अति-विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं:

बेड़ी हनुमान मन्दिर, पूरी, उड़ीसा भाग:३२७

बेड़ी हनुमान जी पुरी, उड़ीसा राज्य के पुरी शहर में भगवान श्री जगन्नाथजी का विशाल मन्दिर हैं जो सनातन धर्म के चार धामों में से एक हैं! इसी मन्दिर की पश्चिम दिशा में समुद्र के तट पर एक हनुमान मन्दिर भी स्थित हैं जिसे बेड़ी हनुमान मन्दिर के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही विख्यात हैं कि यहाँ भगवान हनुमानजी को बेड़ियों में बाँधकर रखा गया हैं, लेकिन ऐसा क्यों? यह मन्दिर है तो छोटा लेकिन इसके पीछे एक रोचक कथा जुड़ी हुई हैं इसलिये श्रद्धालु जगन्नाथ मन्दिर में जाने के साथ-साथ इस मन्दिर में भी होकर आते हैं। आज हम इस मन्दिर की कथा के बारे में विस्तार से जानेंगे।

बेड़ी हनुमान मन्दिर का अर्थ:

बेड़ी का अर्थ होता हैं ज़ंजीरों से बन्धा अर्थात इस मन्दिर में श्री हनुमान जी को जंजीरों में बांधने के कारण इसे बेड़ी हनुमान मन्दिर के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा इस मन्दिर का अन्य नाम दरिया महावीर मन्दिर भी है। दरिया का अर्थ समुद्र होता है जबकि महावीर हनुमान जी का एक नाम है। इस मन्दिर में श्री हनुमान जी को स्वयँ भगवान विष्णु के रूप जगन्नाथ (भगवान श्रीकृष्ण) के द्वारा बाँधा गया था लेकिन क्यों? आइये जानते हैं:

बेड़ी हनुमान मन्दिर की कथा :

भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर पुरी के समुंद्र तट के पास विशाल जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करवाया गया था। तब उस मन्दिर को समुंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए हनुमान जी को मन्दिर की सुरक्षा में तैनात किया गया था लेकिन हनुमान जी के चरित्र तथा प्रभु भक्ति से हम सब भलीभांति परिचित है

हनुमान जी मन्दिर की सुरक्षा में समुंद्र तट पर पहरा देते थे लेकिन कभी-कभी प्रभु दर्शन की इच्छा से वे नगर में प्रवेश कर जाते थे तथा उनके पीछे-पीछे समुंद्र भी आ जाता था। इस कारण समुंद्र से जगन्नाथ मन्दिर को ३ बार क्षति पहुंची। हनुमान जी के बार-बार नगर में आकर प्रभु के दर्शन करने से भगवान श्री जगन्नाथ जी को कोई उपाय नही सूझ रहा था।

अंततः भगवान श्री जगन्नाथजी ने हनुमान जी को वही समुंद्र तट पर बेड़ियों से बांध दिया तथा कहा कि अब से तुम यहीँ रहकर मेरे मन्दिर की सुरक्षा करोगे। तब से भगवान श्री हनुमान जी का मन्दिर उसी समुंद्र तट पर बेड़ियों में वँधा हुआ स्थित है जहाँ प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते है।
बेड़ी हनुमान मन्दिर के दर्शन

यदि आप जगन्नाथ मन्दिर की यात्रा करने का मन बना रहे हैं तो हम मशवरा सलाह है कि आप हनुमान जी के इस दरिया महावीर मन्दिर भी अवश्य होकर आये। यहाँ आपको असीम शाँति का अनुभव होगा तथा समुंद्र तट पर बने इस छोटे से मनोहर मन्दिर को देखकर आपका मन आनंदित और प्रफुल्लित हो उठेगा। आप वहाँ मन्दिर के आसपास समुंद्र तट पर बैठकर शाँति के कुछ पलों का आनंद अवश्य ले सकते है।

भारत वर्ष के राज्य ओड़िशा उड़ीसा में सप्त-पुरियों में से एक है पुरी जहाँ पर जागृत प्रभु जगन्नाथ जी का विश्‍व प्रसिद्ध मन्दिर है। इसे चार धामों में एक माना जाता है। इस मन्दिर को राजा इन्द्रद्युम्न ने श्री हनुमान जी की प्रेरणा से बनवाया था।

इस मन्दिर की रक्षा का दायित्व प्रभु जगन्नाथ जी ने श्री हनुमान जी को ही सौंप रखा है। यहाँ के कणकण में हनुमानजी का निवास है। हनुमानजी ने यहाँ कई तरह के चमत्कार बताए हैं।

इस मन्दिर के चारों द्वार के सामने श्रीरामदूत हनुमानजी की चौकी है अर्थात मन्दिर है। परंतु मुख्‍य द्वार के सामने जो समुद्र है वहाँ पर बेड़ी हनुमानजी का वास है। यह कथा बहुत लम्बी है कि क्यों कि श्री हनुमानजी बेड़ी हनुमानी के रूप में यहाँ स्थापित हुए।

माना जाता है कि ३ बार समुद्र ने श्री जगन्नाथजी के मन्दिर को तोड़ दिया था। कहते हैं कि महाप्रभु श्री जगन्नाथजी ने वीर मारुति हनुमान जी को यहां समुद्र को नियंत्रित करने हेतु नियुक्त किया था, परंतु जब-तब हनुमान भी जगन्नाथ- बलभद्र एवं सुभद्रा के दर्शनों का लोभ सँवरण नहीं कर पाते थे। वे प्रभु के दर्शन के लिए नगर में प्रवेश कर जाते थे, ऐसे में समुद्र भी उनके पीछे नगर में प्रवेश कर जाता था। केसरी-नंदन हनुमान जी की इस आदत से परेशान होकर श्रीजगन्नाथ महाप्रभु जी ने हनुमानजी को यहां स्वर्ण बेड़ी से आबद्ध कर दिया।

यहाँ जगन्नाथपुरी में ही सागर तट पर बेदी हनुमान का प्राचीन एवँ प्रसिद्ध मन्दिर है। भक्त लोग बेड़ी में जकड़े हए श्री हनुमान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। माना जाता है कि जो श्री राम के जाप से इस मन्दिर में आता है उसकी समस्याओं की बेड़ियाँ खुल जाती हैं एवँ धन-धान्य-वैभव प्रसिद्धि से परिपूर्ण हो जीवन यापन कर अंततः वैकुण्ठधाम को प्राप्त होता है!

श्री हनुमान स्तुति:

जय बजरंगी जय हनुमाना,रुद्र रूप जय जय बलवाना ।
पवनसुत जय राम दुलारे,संकट मोचन सिय मातु के प्यारे ॥

जय वज्रकाय जय राम केरू दासा,हृदय करतु सियाराम निवासा ।
न जानहु नाथ तोहे कस गोहराई,राम भक्त तोहे राम दुहाई ॥

विनती सुनहु लाज रखहु हमारी,काज कौन जो तुम पर भारी ।
अष्टसिद्धि नवनिधि केरू भूपा,बखानहु कस विशाल अति रूपा ॥

धर्म रक्षक जय भक्त हितकारी,सुन लीजे अब अरज हमारी ।
भूत प्रेत हरहु नाथ बाधा,सन्तापहि अब लाघहु साधा ॥

मान मोर अब हाथ तुम्हारे,करहु कृपा अंजनी के प्यारे ।
बन्दतु सौरभ दास सुनहु पुकारी,मंगल करहु हे मंगलकारी ॥
।।श्री हनुमान स्तुति सम्पन्न।।

श्री हनुमान जी की आरती :

आरती कीजै हनुमान लला की
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरि-वर कांपे।रोग दोष जाके निकट न झांके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई।सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की।दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की।

लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की।
पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुरदल मारे।दाहिने भुजा संतजन तारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की।सुर नर मुनि आरती उतारें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥आरती कीजै हनुमान लला की।

जो हनुमानजी की आरती गावे। बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट रघुनाथ कला की॥

जय श्रीराम, जय हनुमान। श्रीरामदरबार की जय।।

पता :

श्री बेड़ी हनुमान मन्दिर,लोकनाथ मन्दिर मार्ग, श्री जगगन्नाथ मन्दिर के समक्ष, पूरी, उड़ीसा पिनकोड : 752001

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें :

हालांकि पुरी में हवाई अड्डा नहीं है, लेकिन भुवनेश्वर का बीजू पटनायक हवाई अड्डा, जो पुरी से ५३ किलोमीटर दूर है, शहर को देश के अन्य शहरों से जोड़ने में मदद करता है। हवाई अड्डे से सभी प्रमुख गंतव्यों के लिए उड़ानें चलती हैं और हवाई अड्डे से पुरी जाने के लिए कैब या स्थानीय बस का उपयोग किया जा सकता है। हवाई मार्ग से उड़ीसा के भुवनेश्वर एयरपोर्ट, उतरकर, कैब से पुरी के श्री बेड़ी हनुमान मन्दिर ! घण्टे पाँच मिन्ट्स पहुँच जाओगे!

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

रेल द्वारा पुरी कैसे पहुंचें, पुरी में एक रेलवे जंक्शन है जो इसे देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है और इसके विपरीत। दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, हैदराबाद आदि शहरों के लिए नियमित और सीधी ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं।

निकटतम हवाई अड्डा बीजू पटनायक हवाई अड्डा है जो पुरी से लगभग ५३ किलोमीटर दूर भुवनेश्वर में स्थित है। पुरी तक पहुंचना काफी आसान है क्योंकि वायुमार्ग को सबसे सुविधाजनक और परेशानी मुक्त परिवहन सेवाओं में से एक माना जाता है। हवाई अड्डा घरेलू सेवाएं प्रदान करता है और आप यहां प्रमुख भारतीय एयरलाइंस पा सकते हैं और नई दिल्ली, कोलकाता, विशाखापत्तनम, नागपुर, हैदराबाद, चेन्नई और मुंबई से नियमित उड़ानें संचालित की जाती हैं। पुरी के श्री बेड़ी हनुमान मन्दिर!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें :

दिल्ली के ISBT से आप अपनी कार बाइक या बस से आते हैं तो आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा आप १८५६.८ किलोमीटर की यात्रा करके ३३ घण्टे में पहुँच सकते हैं। पुरी के श्री बेड़ी हनुमान मन्दिर!

स्थानीय परिवहन की बसों से लेकर कैब और टैक्सियों तक, पुरी तक पहुंचने के कई रास्ते हैं। यह अच्छी तरह से निर्मित सड़कों के माध्यम से पड़ोसी शहरों से जुड़ा हुआ है।

बेड़ी हनुमान जी की जय हो। जयघोष हो।।

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