भ्रामराम्बा देवी अम्मावारी शक्ति पीठ मन्दिर, श्री सैलम, आँध्र प्रदेश भाग:३२३,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भ्रामराम्बा देवी अम्मावारी शक्ति पीठ मन्दिर, श्री सैलम, आँध्र प्रदेश भाग:३२३

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिक स्थल :अँजारले क़द्यावर्चा गणपतिजी मन्दिर, अँजले, महाराष्ट्र! यदि आपसे उक्त लेख छूट गया या रह गया हो तो आप कृपया करके प्रजा टूडे की वेब साईट पर जाकर www.prajatoday.com धर्मसाहित्य पृष्ठ पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजाटूडे समाचारपत्र के अति-विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं:

भ्रामराम्बा देवी अम्मावारी शक्ति पीठ मन्दिर, श्री सैलम, आँध्र प्रदेश भाग:३२३

भ्रामराम्बा शब्द का अर्थ है “मधुमक्खी की माँ”। किंवदंती के अनुसार, देवी भ्रामराम्बा ने राक्षस अरुणासुर को मारने के लिए छह पैरों वाली कई हज़ार मधुमक्खियों को छोड़ा था।

भ्रामराम्बा देवी का इतिहास:

भ्रामराम्बा देवी मन्दिर से जुड़ी कई किंवदंतियां हैं। सबसे लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार, अरुणासुर, एक राक्षस, भगवान ब्रह्मा का एक उत्साही भक्त था। उनके अटूट समर्पण से प्रसन्न होकर, भगवान ब्रह्मा ने उन्हें ऐसी शक्तियों का आशीर्वाद दिया कि उन्हें कोई भी दो या चार पैर वाला जीव नहीं मार सकता। वरदान प्राप्त करने के बाद, अरुणासुर ने देवों और सन्तों को परेशान करना शुरू कर दिया। उसकी अपार शक्तियों के कारण देवता उसे पराजित नहीं कर सके। इसके कारण, वे देवी दुर्गा के पास गए और उनकी रक्षा के लिए उन्हें प्रसन्न किया। उनके अनुरोध के उत्तर के रूप में, देवी दुर्गा ने भ्रामरी या भ्रामराम्बिका का रूप धारण किया और हजारों छह पैरों वाली मधुमक्खियों का निर्माण किया जिन्होंने राक्षस को मार डाला। बाद में देवी श्रीशैलम् में भ्रामराम्बिका के रूप में वापस रहीं।

देवी स्तुति :

जय चन्द्रदिवाकरनेत्रधरे,जय पावकभूषितवक्त्रवरे।
जय भैरवदेहनिलीनपरे,जय अन्धकदैत्यविशोषकरे॥

जय महिषविमर्दिनि शूलकरे,जय लोकसमस्तकपापहरे।
जय देवि पितामहविष्णुनते,जय भास्करशक्रशिरोवनते॥

जय षण्मुखसायुधईशनुते,जय सागरगामिनि शम्भुनुते।
जय दु:खदरिद्रविनाशकरे,जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे॥

जय देवि समस्तशरीरधरे,जय नाकविदर्शिनि दु:खहरे।
जय व्याधिविनाशिनि मोक्ष करे जय वाञ्छितदायिनि सिद्धिवरे॥

एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं य: पठेन्नियत: शुचि:।
गृहे वा शुद्धभावेन प्रीता भगवती सदा॥

दुर्गासप्तशती सिद्धसम्पुट मन्त्र:-
सामूहिक कल्याण के लिये मन्त्र: –

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या
निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्‍‌र्या ।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां
भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ॥

 विश्‍व अशुभ, भय विनाश मन्त्र: –

यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो
ब्रह्मा हरश्‍च न हि वक्तुमलं बलं च ।
सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय
नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु ॥

विश्‍व की रक्षा के लिये मन्त्र: –

या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः
पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः ।
श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा
तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्‍वम् ॥

विश्‍व के अभ्युदय के लिये मन्त्र: –

विश्‍वेश्‍वरि त्वं परिपासि विश्‍वं
विश्‍वात्मिका धारयसीति विश्‍वम् ।
विश्‍वेशवन्द्या भवती भवन्ति
विश्‍वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः ॥

विश्‍वव्यापी विपत्तियों के नाश के लिये मन्त्र: –

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य ।
प्रसीद विश्‍वेश्‍वरि पाहि विश्‍वं त्वमीश्‍वरी देवि चराचरस्य ॥

विश्‍व के पाप-ताप-निवारण के लिये मन्त्र: –

देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं
यथासुरवधादधुनैव सद्यः ।
पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु
उत्पातपाकजनितांश्‍च महोपसर्गान् ॥

विपत्ति-नाश के लिये मन्त्र: –

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

विपत्तिनाश और शुभ की प्राप्ति के लिये मन्त्र: –

करोतु सा नः शुभहेतुरीश्‍वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ।

भय-नाश मन्त्र :-

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥

एतत्ते वदनं सौम्यं लोचनत्रयभूषितम् ।पातु नः सर्वभीतिभ्यः कात्यायनि नमोऽस्तु ते ॥
ज्वालाकरालमत्युग्रमशेषासुरसूदनम् ।त्रिशूलं पातु नो भीतेर्भद्रकालि नमोऽस्तु ते ॥

पाप-नाश के लिये मन्त्र:-

हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योऽनः सुतानिव ॥

रोग-नाश मन्त्र:-

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥

महामारी-नाश मन्त्र:-

जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते ॥

आरोग्य और सौभाग्य प्राप्ति मन्त्र:-

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम् ।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जही।।

सुलक्षणा पत्‍‌नी प्राप्ति मन्त्र:-

पत्‍‌नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम् ।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम् ॥

बाधा-शान्ति मन्त्र: –

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्‍वरि ।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम् ॥

सर्वविध अभ्युदय मन्त्र:-

ते सम्मता जनपदेषु धनानि तेषां
तेषां यशांसि न च सीदति धर्मवर्गः ।
धन्यास्त एव निभृतात्मजभृत्यदारा
येषां सदाभ्युदयदा भवती प्रसन्ना ॥

दारिद्र्यदुःखादिनाश मन्त्र: –

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता ॥

रक्षा पाने के लिये मन्त्र;-

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके ।
घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च ॥

विद्याओं और स्त्रियों में मातृभाव प्राप्ति मन्त्र:-

विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः
स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु ।
त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्का
ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः ॥

सर्व प्रकार कल्याण मन्त्र:-

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

शक्ति-प्राप्ति मन्त्र:-

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

प्रसन्नता प्राप्ति मन्त्र: –

प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्‍वार्तिहारिणि ।
त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव ॥

विविध उपद्रव बचाव मन्त्र: –

रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्‍च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र ।
दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्‍वम् ॥

बाधामुक्ति धन-पुत्राधि प्राप्ति मन्त्र :-

सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः ।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॥

भुक्ति-मुक्ति प्राप्ति मन्त्र :-

विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम् ।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥

पापनाश तथा भक्ति प्राप्ति मन्त्र: –

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्‍‌या चण्डिके दुरितापहे ।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥

स्वर्ग और मोक्ष प्राप्ति मन्त्र:

सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी ।
त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः ॥

स्वर्ग और मुक्ति के मन्त्र: –

सर्वस्य बुद्धिरुपेण जनस्य हृदि संस्थिते ।
स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

यात्रा सुझाव:

हैदराबाद से श्रीशैलम तक की सड़कें काफी अच्छी हैं और अन्य राज्य राजमार्ग भी हैं जो तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के नजदीकी शहरों से जुड़ते हैं। हैदराबाद से सबसे आसान मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग 765 है जो श्रीशैलम अभयारण्य से होकर गुजरता है और फिर राज्य राजमार्ग 5 से जुड़ता है जो आपको श्रीशैलम तक ले जाता है।

जाने का सबसे अच्छा समय:

नवंबर – फरवरी

ऊँचाई:

समुद्र तल से १,३४२ फुट ऊपर
श्रीशैलम में है भ्रामरम्बा देवी मन्दिर!

पता:

भ्रामरम्बा देवी मन्दिर श्रीशैला देवा स्थानम्, श्रीसैलम, आँध्र प्रदेश! पिनकोड: 518101

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें :

उड़ान से श्रीशैलम का निकटतम हवाई अड्डा हैदराबाद में राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यह हवाई अड्डा मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बैंगलोर जैसे प्रमुख शहरों के साथ-साथ तिरुपति, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम आदि जैसे छोटे शहरों से कई घरेलू उड़ानों के साथ शेष भारत से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। अधिकांश प्रमुख घरेलू वाहक जैसे इंडिगो, स्पाइसजेट, एयर इंडिया, गो एयर, जेट एयरवेज के साथ-साथ छोटे वाहक हैदराबाद की सेवा करते हैं क्योंकि यह भारत के बड़े हब शहरों में से एक है।

हैदराबाद से अमीरात, एतिहाद, थाई, ब्रिटिश एयरवेज द्वारा संचालित कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें हैं। ये यहां से शुरू हो सकते हैं या लंदन, शिकागो, दोहा, दुबई, कुआलालंपुर जैसे अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए और से कनेक्टिंग उड़ानों का हिस्सा हैं। निकटतम हवाई अड्डा: श्रीशैलम का निकटतम हवाई अड्डा हैदराबाद में राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग २३० किलोमीटर दूर है।

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

ट्रेन से श्रीशैलम का अपना कोई रेलवे स्टेशन नहीं है और निकटतम स्टेशन मरकापुर रेलवे स्टेशन है। यह स्टेशन श्रीशैलम से लगभग ९० किलोमीटर दूर है और गरीब रथ, हावड़ा प्रशांति निलयम एक्सप्रेस और अमरावती एक्सप्रेस जैसी कई ट्रेनों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें :

दिल्ली के ISBT से आप अपनी कार बाइक या बस से आते हैं तो NH : ४४ द्वारा आप १८१६.८ किलोमीटर की यात्रा करके ३२ घण्टे १० मिनट्स में पहुँच सकते हैं भ्रामरम्बा देवी मन्दिर। बस से एसी, लक्ज़री और गैर-एसी श्रेणियों में बड़े और छोटे दोनों शहरों से श्रीशैलम के लिए कई बसें हैं। सिकंदराबाद के जुबली बस स्टेशन के साथ-साथ इमलीबुन, गौलीगुडा में महात्मा गांधी बस स्टेशन दोनों से सबसे अधिक बसें हैदराबाद से हैं।

हैदराबाद से औसत यात्रा का समय लगभग ६ घंटे है। सुपर लग्जरी बसों का किराया करीब ३०० रुपये, डीलक्स बसों का २५० रुपये और एक्सप्रेस बसों का किराया करीब २० रुपये है। ये बसें या तो TSRTC (तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम) या APSRTC (आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम) द्वारा चलाई जाती हैं। इस क्षेत्र के छोटे शहरों जैसे विजयवाड़ा, चित्रदुर्ग, गुंटूर, अनंतपुर, मंत्रालयम, तिरुपति, महानंदी और अन्य से श्रीशैलम के लिए बसें भी हैं।


भ्रामरम्बा देवी की जय हो। जयघोष हो।।

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