गणेश मन्दिर, जयपुर, राजस्थान भाग:३१४,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल : गणेश मन्दिर, जयपुर, राजस्थान भाग:३१४

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिक स्थल : डुल्या मारुति हनुमानजी मन्दिर, पुणे, महाराष्ट्र! यदि आपसे उक्त लेख छूट गया या रह गया हो तो आप कृपया करके प्रजा टूडे की वेब साईट पर जाकर www.prajatoday.com धर्मसाहित्य पृष्ठ पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजाटूडे समाचारपत्र के अति-विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं:

    भारत के धार्मिक स्थल : गणेश मन्दिर, जयपुर, राजस्थान भाग:३१४

पाठकों को शारदीय नवरात्रि पर्व पर चन्द्रघण्टा माँ के दिन की हार्दिक बधाइयाँ, देवी माँ आपके मनोरथ पूरे करे! भगवान श्री गणेश का प्रसिद्ध मन्दिर जहां भगवान को चढ़ता है सिंदूर का चोला, होती है हर मनोकामना पूरी। भगवान श्री गणेश का प्रसिद्ध मन्दिर जहां भगवान को चढ़ता है सिंदूर का चोला, होती है हर मनोकामना पूरी।

राजस्थान के जयपुर में कई प्रसिद्ध गणेश मन्दिर हैं। प्राचीन व प्रमुख गणेश मन्दिरों में से एक है मोती डूंगरी गणेश मन्दिर, जो की लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। भगवान गणेश को समर्पित इस गणेश मन्दिर में लोग दूर दूर से दर्शन करने आते हैं और स्थापित गणेश जी से अपनी मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं। यहां दाहिनी सूंड़ वाले गणेशजी की विशाल प्रतिमा है, जिस पर सिंदूर का चोला चढ़ाकर भव्य श्रंगार किया जाता है। मोती डूंगरी गणेश मन्दिर के बाद भी अनेक मन्दिर स्थित हैं। ‘गणेश चतुर्थी’ के अवसर पर यहाँ आने वाले भक्तों की संख्या लाख का आंकड़ा पार कर जाती है। इस जगह के प्रति लोगों की खास आस्था और विश्वास जुड़ा है। मन्दिर में बुधवार के दिन भक्तों की बहुत ज्यादा भीड़ रहती है।

गणेश मन्दिर की मान्यता :

मोती डूंगरी गणेश मन्दिर को लेकर लोगों की कई मान्यताएं प्रचलित हैं। उन्हीं मान्यताओं में से एक मान्यता यहां की मूर्ति से जुड़ी है और दूसरी मान्यता बुधवार को लेकर प्रचलित है।

जयपुर में मोती डूंगरी स्थित गणेश मंदिर जयपुरवासियों के लिए प्रथम अराध्य माने जाते है। मंदिर को लेकर लोगों की मान्यता है की यदि कोई भी व्यक्ति नया वाहन खरीदाता है, तो उसे सबसे पहले मोती डूंगरी गणेश मंदिर में लाने की परंपरा है। नवरात्रा, रामनवमी, दशहरा, धनतेरस और दीपावली जैसे खास मुहूर्त पर वाहनों की पूजा के लिए यहां लंबी कतारें लग जाती हैं। लोगों का ऐसा मानना है की नए वाहन की यहां लाकर पूजा करने से वाहन का एक्सीडेंट नहीं होता। इसके अलावा यहां शादी के समय पहला निमंत्रण-पत्र मंदिर में चढ़ाने की परंपरा है। मान्यता है कि निमंत्रण पर गणेश उनके घर आते हैं और शादी-विवाह के सभी कार्यों को शुभता से पूर्ण करवाते हैं। मंदिर की प्रसिद्धि और विश्वास को देखते हुए अब जयपुर के आसपास से भी लोग दूर-दूर से शादी का निमंत्रण देने पहुंचते हैं। यह स्थान पर्यटन स्थल के रुप में भी विख्यात है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में सैलानी दर्शन के लिए आते हैं।

गणेश मन्दिर का इतिहास :

मोतीडूंगरी की तलहटी में स्थित भगवान गणेश का यह मन्दिर जयपुर वासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इतिहासकार बताते हैं कि यहां स्थापित गणेश प्रतिमा जयपुर नरेश माधोसिंह प्रथम की पटरानी के पीहर मावली से १७६१ ईस्वी में लाई गई थी। मावली में यह प्रतिमा गुजरात से लाई गई थी। उस समय यह पांच सौ वर्ष पुरानी थी। जयपुर के नगर सेठ पल्लीवाल यह मूर्ति लेकर आए थे और उन्हीं की देख-रेख में मोती डूंगरी की तलहटी में इस मन्दिर को बनवाया गया था।

गणेश जी के शाबर मन्त्र से मनोरथ पूरे :

विघ्नहर्ता श्रीगणेश जी की शाबर साधना करें। होगी मनचाही मुराद पूरी। मनचाही मुराद पाने के लिए करें श्री गणेश जी के शाबर मन्त्र साधना। जिस प्रकार प्रत्येक पेड़ एक छोटे से अंकुर में छुपा होता है ठीक उसी प्रकार सभी साधनाओं का फल भी उनकों विधि विधान, श्रद्धाभाव एवं विश्वास के साथ करने से ही प्राप्त हो पाता है । अगर किसी के जीवन कोई परेशानी चल रही हो तो आगामी गणेश उत्सव में गणेश चतुर्थी से लेकर अनन्त चतुर्दशी तक इन १० दिनों तक जो श्री गणेश जी के इस गणेश शाबर मन्त्र की साधना करेगा, इस साधना से साधक की हर मनचाही मुराद होगी पूरी। यह अक्षरशः सत्य है।

गणेश शाबर मन्त्र की साधना विधि:

१- गणेश उत्सव के दौरान किसी भी एकान्त स्थान में या गणेश मंदिर में, जहाँ आम लोगों का आना जाना ना हो या तो बिलकुल ही कम हो, ऐसे पवित्र स्थान में कुशा या कंबल के आसन पर बैठकर भगवान् श्री गणेश जी का षोडशोपचार विधि से पूजन करें ।

२- पूजा में गाये के घी के ११ दीपक जलाकर, स्यंम के सामने, एक फुट की ऊँचाई पर रखें, १० दिनों तक रोज़ सिन्दूर और लड्डू के प्रसाद का भोग लगाएं, और प्रतिदिन ५ माला जप मोती या स्फटिक की माला से नीचे दिये मन्त्र का जप करें:-

३- प्रतिदिन भोग लगे प्रसाद को परिवार सहित अन्य गरीब बच्चों में बाँट दें । अंतिम दसवें दिन सवा सेर लड्डू के प्रसाद का भोग लगाए और मन्त्र का जप- यज्ञ समाप्त होने पर तीन बच्चों कों को भोजन कराकर उन्हें कुछ दक्षिणा भेट करें ।

४- पहले दिन ही सिन्दूर की एक डिब्बी गणेश जी के चरणें में सुरक्षित रखे, और १० दिनों तक इस सिन्दूर को न छूए । भविष्य में जब कभी कोई कार्य या समस्या आने लगे तो सिन्दूर को सात बार उक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित कर अपने माथे पर टीका लगाओ सभी कार्य सफल होने लगेगा ।

गणेश शाबर मन्त्र:

ॐ गणपति यहाँ पठाऊँ तहाँ जावो, दस कोस आगे जा, ढाई कोस पीछे जा, दस कोस सज्जे, दस कोस खब्बे, मैया गुफ्फा की आज्ञा मान, रिद्धि सिद्धि देवी आन, अगर सगर जो न आवे तो माता पार्वती की लाज!ॐ क्राम फट स्वाहा !

मन्त्र जप विधि गणेश शाबर मन्त्र :

हर रोज गुरु पूजन और गणेश पूजन करे, गणेश जी की मूर्ती के दोनों तरफ एक एक गोमती चक्र अवश्य रखे । गणेश जी के साथ देवी रिद्धि और सिद्धि का भी पूजन करें । पूजा में प्रयास करें मूर्ती मिटटी से बनी हुई ही हो । अंतिम दिन देवी रिद्धि सिद्धि के लिए श्रृंगार का सामान गणेश मन्दिर में चढ़ाये ।।

गणेश मन्दिर का पता:

स्थान: गणेश मन्दिर, मोती डूँगरी गणेश मन्दिर! मार्ग, तिलक नगर, जयपुर, राजस्थान। पिन कोड: 302004

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें :

गणेश मन्दिर तक पहुंचने के लिए उड़ान द्वारा जयपुर के अंतरराष्ट्रीय निकटतम हवाई अड्डा है। गणेश मन्दिर पहुंचने के लिए निजी कैब लेनी होगी। वहाँ से टैक्सी किराए पर ले सकते हैं।
आप कैब द्वारा १४ मिनट्स में ८.६ किलोमीटर जी दूरी तय करके पहुँच जाओगे मोती डूँगरी गणेश मन्दिर!

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

ट्रेन से गणेश मन्दिर की यात्रा करने के लिए आपको जयपुर जाना पड़ेगा। जयपुर जंकशन से आप उतरकर बस पकड़ कर या कैब द्वारा भी पहुंच सकते हैं। आप ५.६ किलोमीटर की दूरी तय करके १२ मिन्ट्स में पहुँच जाओगे मोती डूँगरी गणेश मन्दिर!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें :

अगर आप अपनी बाइक या कार से गणेश मन्दिर की यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको अपनी बाइक या कार से जयपुर आना होगा! दिल्ली के ISBT से बस द्वारा आप NH : ४८ हाइवे से २७२.६ किलोमीटर की यात्रा करके २७ घण्टे में पहुँच जाएँगे मोती डूँगरी गणेश मन्दिर!

श्री गणेश जी की जय हो! जयघोष हो!!

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