गंगा में खनन को लेकर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब

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@ देहरादून उत्तराखंड 

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार गंगा नदी में खनन के खिलाफ दायर मातृ सदन की जनहित याचिका पर आज सुनवाई की। जिसके बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश संजय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने इस मामले में सरकार से 8 मार्च को अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। ऐसे में अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 मार्च को नियत की गई है।

नैनीताल हाईकोर्ट में मातृ सदन हरिद्वार ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि हरिद्वार गंगा नदी में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से खनन किया जा रहा है। जिससे गंगा नदी के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है। वहीं, गंगा नदी में खनन करने वाले नेशनल मिशन क्लीन गंगा को पलीता लगा रहे हैं। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई है कि गंगा नदी में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाई जाए ताकि गंगा नदी के अस्तित्व को बचाया जा सके।

क्योंकि अब खनन कुम्भ क्षेत्र में भी किया जा रहा है। याचिककार्ता का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार ने गंगा नदी को बचाने के लिए एनएमसी बोर्ड गठित किया है। जिसका मुख्य उद्देश्य गंगा को साफ करना व उसके अस्तित्व को बचाए रखना है। ऐसे में एनएमसी ने भी राज्य सरकार को बार-बार आदेश दिए हैं कि गंगा में खनन कार्य नहीं किया जाय।

उसके बाद में सरकार द्वारा गंगा में खनन कार्य करवाया जा रहा है। यूएन ने भी भारत सरकार को निर्देश दिए थे कि गंगा को बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं, उसके बाद भी सरकार गंगा में खनन करवा रही है। लिहाजा, इस मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार को 8 मार्च को अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

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