गुरुवायुर बाल कृष्ण मन्दिर, केरल भाग: ११५,पं० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की कलम से

Share News

 

भारत के धार्मिक स्थल: गुरुवायुर बाल कृष्ण मन्दिर, केरल भाग: ११५

आपने पिछले भाग में पढ़ा : भारत के प्रसिद्ध धार्मिकस्थल: प्रियाकांत जू मन्दिर, वृन्दावन, उत्तर प्रदेश! यदि आपसे यह लेख छूट गया हो और आपमें पढ़ने की जिज्ञासा हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाइट धर्म-सहित्य पृष्ठ पर जा कर पढ़ सकते हैं! आज हम आपको बता रहे हैं:

भारत के धार्मिक स्थल: गुरुवायुर बाल कृष्ण मन्दिर, केरल भाग: ११५

गुरुवायुर मन्दिरव दक्षिण भारत के केरल के गुरुवायुर में स्थित भगवान श्री कृष्ण का प्रसिद्ध पुरातन प्राचीन मन्दिर है! यह कई शताब्दी पुराना है और केरल में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मन्दिर है! मन्दिर के देवता भगवान गुरुवायुरप्पन हैं जो बाल गोपाल (कृष्ण भगवान का बालरूप) के रूप में हैं! वर्षों से इस मन्दिर में हिन्दुओं के अतिरिक्त किसी भी जाति को प्रवेश की अनुमति नहीं है, बावजूद इसके कई धर्मों को मानने वाले भगवान गुरूवायूरप्पन के परम भक्त हैं!

कृष्णनट्टम कली का गुरुयावूर में काफी प्रचलन है! कृष्णनट्टम् कली विख्यात शास्त्रीय प्रदर्शन कला है जो प्रसिद्ध नाट्य-नृत्य कथकली के प्रारँभिक विकास में सहायक थी! मन्दिर प्रशासन (गुरुयावूर देवास्वोम) एक कृष्णट्टम सँस्थान का सँचालन करता है! इसके अतिरिक्त, गुरुयावूर मन्दिर दो प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों के लिए भी विख्यात है! १. मेल्पत्तूर नारायण भट्टतिरि के नारायणीयम् और २.पून्थानम के ज्नानाप्पना!

दोनों स्वर्गीय लेखक गुरुवायुरप्पन के परम भक्त थे! जहां नारायणीयम सँस्कृत में, दशावतारों (महाविष्णु के दस अवतार) पर डाली गयी एक सरसरी दृष्टि है, वहीँ ज्नानाप्पना स्थानीय मलयालम भाषा में, जीवन के नग्न सत्यों का अवलोकन करती है और क्या करना चाहिए व क्या नहीं करना चाहिए, इसके सम्बन्ध में उपदेश देती है! यह मन्दिर ५००० वर्षों से भी ज़्यादा प्राचीन है । यह मंदिर दक्षिण का द्वारका कहलाता है । गुरु वायु और उर शब्दों से मिलकर इस मन्दिर का नाम पढ़ा है गुरुवायुर मन्दिर की स्थापना गुरु ब्रहस्पति और वायुदेव ने की थी ।यहाँ कृष्ण जी के बाल रूप की मूर्ति स्थापित है… कृष्ण जी की बाल लीलाओं का बहुत सुन्दर चित्रण देखने को मिलता है! नयनाभिराम अत्यन्त निर्मल पावन पुनीत छटा है भगवान श्री कृष्ण जी के बाल रूप की! अधिकतर केरल निवासी विवाहोपरान्त पति पत्नी कृष्ण जैसे पुत्र की कामना में जाते हैं!

श्री गोपाल कृष्ण स्तुति:

नमो विश्वस्वरूपाय विश्वस्थित्यन्तहेतवे।
विश्वेश्वराय विश्वाय गोविन्दाय नमो नमः॥१॥

नमो विज्ञानरूपाय परमानन्दरूपिणे।
कृष्णाय गोपीनाथाय गोविन्दाय नमो नमः॥२॥

नमः कमलनेत्राय नमः कमलमालिने।
नमः कमलनाभाय कमलापतये नमः॥३॥

बर्हापीडाभिरामाय रामायाकुण्ठमेधसे।

रमामानसहंसाय गोविन्दाय नमो नमः॥४॥

कंसवशविनाशाय केशिचाणूरघातिने।
कालिन्दीकूललीलाय लोलकुण्डलधारिणे॥५॥

वृषभध्वज-वन्द्याय पार्थसारथये नमः।
वेणुवादनशीलाय गोपालायाहिमर्दिने॥६॥

बल्लवीवदनाम्भोजमालिने नृत्यशालिने।
नमः प्रणतपालाय श्रीकृष्णाय नमो नमः॥७॥

नमः पापप्रणाशाय गोवर्धनधराय च।
पूतनाजीवितान्ताय तृणावर्तासुहारिणे॥८॥

निष्कलाय विमोहाय शुद्धायाशुद्धवैरिणे।
अद्वितीयाय महते श्रीकृष्णाय नमो नमः॥९॥

प्रसीद परमानन्द प्रसीद परमेश्वर।
आधि-व्याधि-भुजंगेन दष्ट मामुद्धर प्रभो॥१०॥

श्रीकृष्ण रुक्मिणीकान्त गोपीजनमनोहर।
संसारसागरे मग्नं मामुद्धर जगद्गुरो॥११॥

केशव क्लेशहरण नारायण जनार्दन।
गोविन्द परमानन्द मां समुद्धर माधव॥१२॥

॥ इत्याथर्वणे गोपालतापिन्युपनिषदन्तर्गता गोपालस्तुति समाप्त ॥

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें:

कोच्चि अन्तर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा गुरुवायुर मन्दिर से निकटतम हवाई अड्डा है! लगभग ८० किलोमीटर की दूरी पर है यह हवाई अड्डा!केलिकट्ट हवाईअड्डा से लगभग १०० किलोमीटर की दूरी पर है!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें:

कोच्चि का थ्रिसुर निकटतम रेलवे स्टेशन है! हैदराबाद से शोरनॉर और वहाँ से गुरुवायुर मन्दिर! चैन्नई से लगभग ६३५किलोमीटर की दूरी पर रेलवे स्टेशन है!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें:

गुरुवायुर मन्दिर दिल्ली से लगभग २,६६२५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है! राष्ट्रीय राजमार्ग NH-४४ द्वारा आप ४५ घण्टे में पहुंच सकते हो!

गुरुवायुर बाल कृष्णजी की जय हो! जयघोष हो!!

Leave a Reply

Your email address will not be published.

LIVE OFFLINE
track image
Loading...