कालकाजी मन्दिर कालकाजी, नई दिल्ली भाग : ३०९,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल : कालकाजी मन्दिर, कालकाजी, नई दिल्ली भाग : ३०९

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिक स्थल : साईँ मन्दिर, नामची, सिक्किम! यदि आपसे उक्त लेख छूट गया या रह गया हो तो आप कृपया करके प्रजा टूडे की वेब साईट पर जाकर www.prajatoday.com धर्मसाहित्य पृष्ठ पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजाटूडे समाचारपत्र के अति-विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं:

भारत के धार्मिक स्थल : कालकाजी मन्दिर, कालकाजी, नई दिल्ली भाग : ३०९

कालकाजी मन्दिर, कालका जी नई दिल्ली! कालकाजी मन्दिर भारत की राजधानी शहर दिल्ली का एक अतिलोकप्रिय और अत्यधिक मान्यताओं को पूर्ण करने वाला सम्मानित मन्दिर और प्रसिद्ध कमल मन्दिर, भैरव मन्दिर और इस्कॉन मन्दिर के निकट है यह माँ महाकाली का यह कालका जी मन्दिर। यह मन्दिर कालका देवी, देवी शक्ति माँ दुर्गा के अवतारों में से एक को समर्पित एक हिन्दू मन्दिर है। परन्तु यहाँ ओझा- तान्त्रिक- मौलाना- सभी आते हैं!

यूँ तो हिन्दुओं के सभी त्यौहार यहाँ मनाए जाते हैं, परन्तु आस्था और विश्वास के साथ साथ भक्ति से ओतप्रोत भक्तगणों की यहाँ अच्छी ख़ासी तादाद वर्ष में दो बार माँ के पावन पवित्र नवरात्रि के त्योहारों में मेले के रूप में देखने मिलेगी! कालकाजी मन्दिर को ‘जयंती पीठा’ या ‘मनोकमना सिद्ध पीठा’ भी कहा जाता है जिसका शाब्दिक अर्थ है कि भक्तों की सभी इच्छाएं माँ देवी कलिका ने यहाँ पूरी की हैं, जिन्होंने इस मन्दिर को अपने निवास स्थान के रूप में लिया है। सामान्य धारणा यह है कि यहाँ देवी कालका जी की छवि एक आत्मनिर्भर है, और यह मन्दिर सत्य युग की तारीख बताती है। जब देवी कालिका ने अन्य विशाल राक्षसों के साथ दानव रकतबीज का वध किया था।

यह मन्दिर अरावली माउंटेन रेंज के सूर्यकुट्टा पर्वत (यानी सूर्यकुट्टा पर्वत) पर स्थित है। यही कारण है कि हम मा कालका देवी (देवी कालिका) को ‘सूर्यकुट्टा निवास’ के रूप में बुलाते हैं, जो सूर्यकूट में रहता है।

एक १२-पक्षीय संरचना, कालका जी मन्दिर का निर्माण सँगमरमर और काले पुमिस पत्थरों से पूरी तरह से किया गया है। काला रँग देवी काली को दर्शाने का सँकेत है, इसलिए मन्दिर का निर्माण काला पत्थर से बना है।

कालका जी देवी मन्दिर परिसर ईंट चिनाई का निर्माण प्लास्टर (अब पत्थर के साथ) के साथ समाप्त होता है और एक पिरामिड टावर से घिरा हुआ है। सेंट्रल चैम्बर जो योजना व्यास में १२ पक्षीय है। (२४ ‘आईएम) प्रत्येक पक्ष में एक द्वार के साथ सँगमरमर के साथ पक्का है और एक वर्ंधा ८’९ “चौड़ा है और इसमें ३६कमाना खोलने परिक्रमा में बाहरी द्वार के रूप में दिखाया गया शामिल है। यह वाराणह सभी तरफ से केंद्रीय चैम्बर सँलग्न करता है। पूर्वी द्वार के बगल में आर्केड के बीच में पूर्वी द्वार है उर्दू में शिलालेखों के साथ एक सँगमरमर के पेडस्टल पर बैठे लाल बलुआ पत्थर में बने दो बाघ हैं। दो बाघों के बीच माँ कालिका देवी की एक तस्वीर है जिसका नाम हिंदी में अँकित है और इससे पहले पत्थर खड़े हो गए हैं।

कालका जी मन्दिर कि कथा :

पिछले ३००० वर्षों से अस्तित्व में, कालकाजी मन्दिर अपने मूल के बारे में कई किंवदंतियों का पता लगाता है। यद्यपि, लोक कथाओं के अनुसार, मन्दिर का सबसे पुराना हिस्सा १७७४ ईस्वी में बनाया गया था। माना जाता है कि १८वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में मराठा शासकों द्वारा मन्दिर माँ कालका जी का निर्माण किया गया था। माना जाता है कि कालका जी मन्दिर महाभारत के समय से ही हैं।

लोककथाओं के अनुसार, पाँडवों और कौरवों ने युधिष्ठिर के शासनकाल के दौरान कालका देवी की पूजा की थी। लॉरा साइक्स के शब्दों में, मराठों ने १७३८ की लड़ाई में टॉकटोरा में मुगलों को हराकर , गोचर और चरवाहों की मदद से माता कालका जी देवी में कब्जा कर लिया । १८१६ ईस्वी में, राजा केदारनाथ (सम्राट अकबर द्वितीय के पेशवा) ने कालकाजी मन्दिर की मूल सँरचना में कुछ बदलाव और परिवर्धन किए, और पिछले ५० वर्षों से हिन्दू बैंकरों और व्यापारियों के आसपास के इलाकों में बड़ी सँख्या में धर्म शालाएं बनाई गई हैं।

यह भी माना जाता है कि देवी माता कालकाजी, भगवान ब्रह्मा की सलाह पर भगवानों द्वारा दी गई प्रार्थनाओं और अनुष्ठानों से प्रसन्न, इस पर्वत पर दिखाई दी, जिसे सूर्यकुट्टा पर्वत के नाम से जाना जाता है, और उन्हें आशीष आशीर्वाद दिया। तब से, देवी ने इस पवित्र स्थान को अपने निवास के रूप में लिया और अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरा करती रही है और प्रलयोपरांत भी मन इच्छित फल देती रहेंगी।

महाकाली माँ काली की स्तुति :

शव पर सवार शमशान वासिनी भयंकरा
विकराल दन्तावली, त्रिनेत्रा हाथ में लिये खडग और कटा सिर दिगम्बरा
अट्टहास करती माँ काली जय माँ काली
मुक्तकेशी लपलपाती जिहवा वाली
दे रही अभय वरदान हमेशा
चार बाहों वाली जय माँ काली
आओ करें हम ध्यान उनका
सृजन करनेवाली सब कुछ देनेवाली
माँ काली जय माँ काली

माँ काली स्तुति के लाभ:

माँ काली जी की स्तुति करने मात्र से ही शत्रुओ का नाश हो जाता है और किसी भी भय से मुक्ति मिलती है! माँ काली जी की स्तुति करने से जादू टोनो का असर खत्म हो जाता है! माँ काली की स्तुति रात के समय करनी चाहिए,माँ काली की पूजा और स्तुति का आरम्भ शुक्रवार सन्ध्या काल से ही शुरू कर देना चाहिए! माँ काली की पूजा आरम्भ करने से पहले गणेश जी का आवाह्न अवश्य करना चाहिए!

माँ काली स्तुति करने की विधि:

स्नान करके गुलाबी या लाल रंग के कपड़े पहनेें। घर के मन्दिर को साफ़ करे! अब काली माता के प्रतिमा के सामने बैठ जाये! फिर एक चौकी ले उस पर लाल कपडा बिछाये! पहले गणेश जी का आवाह्न करे गणेदश जी की भी प्रतिमा रखे यदि गणेशजी की प्रतिमा नहीं है तोह जायफल पर लाल डोरी बांड कर गणेश जी का ध्यान करे और उनकी पूजा करे

फिर माँ काली को लाल चुनरी चढ़ाये लाल सिंदूर का तिलक लगाए! काली माता के आगे सरसो के तेल का दीपक जलाये
फिर माँ काली की पूजा आरम्भ करे!

माँ काली का की पूजा किस दिन करनी चाहिए? माँकाली की पूजा शुक्रवार रात्रि से आरम्भ कर देनी चाहिए वैसे तो माँ काली का दिन शनिवार है!

काली माता को खुश करने का क्या उपाय:

काली माता को खुश करने के लिए उनकी पूजा आराधना करनी चाहिए उनके आगे सरसो के तेल का दीपक जलना चाहिए!

काली माता को क्या भोग लगाएँ?

शनिवार के दिन अपने घर में काले चने ,हलवा और पूरी का प्रशाद बनाकर काली माता को भोग लगाना चाहिए माँ अति प्रसन्न होती है! माँ काली के साथ साधक शिवशँकर जी की माला ॐनम:शिवाय भी अवश्य करनी चाहिए! माँ काली तुरत फुरत प्रसन्नचित्त हो मन मांगा फल प्रदान करती हैं!

माँ काली का शाबर मन्त्र :
(इस मन्त्र से कोई भी मनोरथ सिद्ध होता है!)

चार वीर भैरों चौरासी, चार बत्ती पूजूं पान ए मिठाई, अब बोलो माँ काली की दुहाई।

सूचना दर्शन समय :

०४:०० पूर्वाह्न – ११:३० पूर्वाह्न, १२:०० अपराह्न – ०३:०० अपराह्न, ०४:०० अपराह्न – ११:३० अपराह्न
प्रातः ५:३० बजे: गणेश वंदना और कालका माई आरती
शाम ७:३० बजे: संध्या आरती
११:३० अपराह्न: शेज आरती
मंत्रॐ क्रीकं कैैै नमः !

कालकाजी मन्दिर के त्यौहार :

नवरात्रि, शिवरात्रि, जन्माष्टमी, हनुमान जयंती, वसंत पंचमी नवरात्रे!

माँ कालकाजी मन्दिर का पता:

पता: अरावली माउन्टेन रेंज, सूर्यकुट्टा निवास, कालका जी, नई दिल्ली !

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें :

कालकाजी मन्दिर तक पहुंचने के लिए इन्दिरगाँधी हवाईअड्डा पालम दिल्ली है! कालकाजी मन्दिर तक पहुँचने के लिए टैक्सी किराए पर ले सकते हैं। हवाई अड्डे के बाहर से कैब द्वारा यात्रा करके आप २३ मिनट्स में, १५.४ किलोमीटर की यात्रा करके आसानी से पहुँच सकते हैं। स्थानीय बस स्थानक और मेट्रो रेल स्टेशन भी निकट ही है!

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

मेट्रो ट्रेन से: कालकाजी मन्दिर का निकटतम मेट्रो रेलवेस्टेशन कालकाजी है! पैदल मन्दिर तक पहुँचने में पाँच मिनट लगेंगे, जो लगभग ०.४५० किलोमीटर दूर है व ऊँचाई पर है कालकाजी मन्दिर ।

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें :

आप ISBT से बस द्वारा अथवा अपनी कार से NH : ४४ या आउटर रिंगरोड़ से ३६ मिनट्स में पँहुँच सकते है मन्दिर। हवाईअड्डे से इस मन्दिर की दूरी २२.५ किलोमीटर है! निकटवर्ती सड़क लाला लाजपतराय मार्ग है! यहाँ की सड़कें बेहतरीन है! 

माँ कालका जी की जय हो। जयघोष होII

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