बन्नँजय श्री शनि क्षेत्र परमेश्वर मन्दिर उडुपी, कर्नाटक भाग : ३१७,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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बन्नँजय श्री शनि क्षेत्र परमेश्वर मन्दिर, उडुपी, कर्नाटक भाग:३१७

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिक स्थल : नवदुर्गाओं की सिद्धपीठ माँ चन्द्रिका देवी धाम मन्दिर, सीतापुर, कठवारा गाँव, लखनऊ, उत्तरप्रदेश! यदि आपसे उक्त लेख छूट गया या रह गया हो तो आप कृपया करके प्रजा टूडे की वेब साईट पर जाकर www.prajatoday.com धर्मसाहित्य पृष्ठ पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजाटूडे समाचारपत्र के अति-विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं:

भारत के धार्मिक स्थल : बन्नँजय श्री शनि क्षेत्र परमेश्वर मन्दिर, उडुपी, कर्नाटक भाग:३१७

पाठकों को शारदीय नवरात्रि पर माँ स्कन्दमाता के पावन दिवस की हार्दिक बधाइयाँ, देवी माँ आपके सकल मनोरथ पूर्ण करे!

बन्नंजय श्री शनिक्षेत्र परमेश्वर : शनि देव मन्दिर राज्य : कर्नाटक! इस मन्दिर परिसर में शनिदेव की २३ फीट ऊँची प्रतिमा है और यह उडुपी में स्थित है। विश्व प्रसिद्ध उडुपी श्री कृष्ण मठ से केवल दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और उडुपी सिटी बसस्टैंड से केवल एक किलोमीटर दूर है, श्री शनिक्षेत्र बानन्जे मठ के तत्वावधान में परम पावन श्री श्री राघवेंद्र तीर्थ के दिव्य मार्गदर्शन में चलाया जाता है।

बन्नंजय श्री शनिक्षेत्र परमेश्वर का इतिहास

श्री शनि क्षेत्र उडुपी (कर्नाटक राज्य, भारत) में बन्नंजे में स्थित एक हिंदू मंदिर है और २३ फीट ऊँची भगवान शनि की दुनियाँ की सबसे बड़ी अखण्ड मूर्ति की मेज़बानी करता है।

विश्व प्रसिद्ध उडुपी श्री कृष्ण मठ से केवल दो किलोमीटर दूर और उडुपी सिटी बस स्टैंड से केवल एक किलोमीटर दूर स्थित है!

श्री शनि क्षेत्र परम पावन श्री श्री राघवेंद्र तीर्थ के दिव्य मार्गदर्शन में बन्नंजे मठ के तत्वावधान में चलाया जाता है। स्वामीजी श्री श्री राघवेंद्र तीर्थ स्वामीजी ने पालिमारू-भंडाराकेरी मठ के परम पूज्य श्री श्री विद्यामान्य तीर्थारू से अपना पाठ पूरा किया और लगभग ३० साल पहले पेजावर मठ के परमपूज्य श्री श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी से संन्यास प्राप्त किया, वे शनि देव के अनन्य भक्त वत्सल थे।

बन्नंजय श्री शनिक्षेत्र परमेश्वर : शनि देव मन्दिर, पूजा समय :

दिन सुबह शाम

प्रातः ०७:००-१२:०० दोपहर सायँ: ०६:०० बजे – ०७:३० बजे

शनि उपासना के लाभ :

शनिवार का व्रत और पूजा करने से शनि के प्रकोप से सुरक्षा के साथ राहु, केतु की कुदृष्टि से भी सुरक्षा होती है। मनुष्य की सभी मंगलकामनाएँ सफल होती हैं। व्रत करने तथा शनि स्तोत्र के पाठ से मनुष्य के जीवन में धन, संपत्ति, सामाजिक सम्मान, बुद्धि का विकास और परिवार में पुत्र, पौत्र आदि की प्राप्ति होती है।

आपने तपस्या से अपनी देह को दग्ध कर लिया है, आप सदा योगाभ्यास में तत्पर, भूख से आतुर और अतृप्त रहते हैं। आपको सर्वदा सर्वदा नमस्कार है। जिसके नेत्र ही ज्ञान है, काश्यपनन्दन सूर्यपुत्र शनिदेव आपको नमस्कार है। आप सन्तुष्ट होने पर राज्य दे देते हैं और रुष्ट होने पर उसे तत्क्षण क्षीण लेते हैं वैसे शनिदेव को नमस्कार। देवता, असुर, मनुष्य, सिद्ध, विद्याधर और नाग- ये सब आपकी दृष्टि पड़ने पर समूल नष्ट हो जाते ऐसे शनिदेव को प्रणाम। आप मुझ पर प्रसन्न होइए। मैं वर पाने के योग्य हूं और आपकी शरण में आया हूं।

प्रसन्‍न हुए श्री शनि देव :

राजा दशरथ के इस प्रकार प्रार्थना करने से शनि देव अत्‍यंत प्रसन्‍न हुए और उन्‍होंने कहा की उत्तम व्रत का पालन करने वाले राजा दशरथ, तुम्हारी इस स्तुति से मैं भी अत्यन्त सन्तुष्ट हुआ हूं। इसलिए हे रघुनन्दन तुम इच्छानुसार वर मांगो, मैं अवश्य दूंगा। इस पर राजा दशरथ ने कहा कि हे ‘प्रभु यदि आप प्रसन्‍न हैं तो आज से आप देवता, असुर, मनुष्य, पशु, पक्षी तथा नाग-किसी भी प्राणी को पीड़ा न दें। बस यही मेरा प्रिय वरदान है। राजा की इस विनम्रता से स्‍तब्‍ध और अति प्रसन्‍न शनि देव ने कहा कि वैसे इस प्रकार का वरदान वे किसी को नहीं देते हैं, परन्तु सन्तुष्ट होने के कारण उन्‍हें दे रहे हैं।

श्री शनि देव का वचन और स्‍त्रोत का लाभ :

इसके बाद शनि देव ने वरदान स्‍वरूप राजा दशरथ को वचन दिया कि इस स्तोत्र को जो भी मनुष्य, देव अथवा असुर, सिद्ध तथा विद्वान आदि पढ़ेंगा, उसे शनि के कारण कोई बाधा नहीं होगी। जिनकी महादशा या अन्तर्दशा में, गोचर में अथवा लग्न स्थान, द्वितीय, चतुर्थ, अष्टम या द्वादश स्थान में शनि हो वे व्यक्ति यदि पवित्र होकर दिन में तीन बार प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल के समय इस स्तोत्र को ध्यान देकर पढ़ेंगे, उनको निश्चित रुप से शनि पीड़ित नहीं करेगा।

सँस्कृत के स्तोत्र का हिंदी में करें पाठ, शनिदेव देंगे राहत शनि ग्रह न्याय के कारक हैं और सभी को अपने वर्तमान व पूर्व जन्मों के कर्मों के अनुसार फल देते हैं. अच्छे कर्म करनेवालों को जहां सुख मिलता है वहीं बुरे कर्म करनेवालों को शनि दंडित करते हैं. शनि की साढ़ेसाती, शनि ढैया या शनि की महादशा, अंतरदशा में शनि जनित कष्ट सभी को कमोबेश होते ही हैं।

शनि ग्रह न्याय के कारक हैं और सभी को अपने वर्तमान व पूर्व जन्मों के कर्मों के अनुसार फल देते हैं. अच्छे कर्म करनेवालों को जहां सुख मिलता है वहीं बुरे कर्म करनेवालों को शनि दंडित करते हैं. शनि की साढ़ेसाती, शनि ढैया या शनि की महादशा, अंतरदशा में शनि जनित कष्ट सभी को कमोबेश होते ही हैं।

शनि स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं तथा परेशानियों से मुक्ति देते हैं। यह बात हमेशा याद रखें कि शनिदेव जल्दी प्रसन्न होनेवाले देवता नहीं हैं। कर्मों का अच्छा—बुरा फल तो मिलेगा ही, यदि आप बुरे कर्म छोडकर दशरथकृत शनि स्तोत्र का नियमित पाठ करेंगे तो कष्टों से राहत जरूर मिलेगी, जो सँस्कृत के स्तोत्र को नहीं पढ सकते हैं उनके लिए हिंदी अनुवाद भी दिया जा रहा है, इसका पाठ कर श्री शनिदेव से दुख—दर्द मिटाने की प्रार्थना करें।

राजा दशरथ कृत श्री शनि देव स्तोत्र:

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।
नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च ।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।
नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते।।
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्नरीक्ष्याय वै नम: ।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।
नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च ।।
अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तुते ।।


तपसा दग्ध-देहाय नित्यं योगरताय च ।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम: ।।
ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज-सूनवे ।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ।।
देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशं यान्ति समूलत:।।
प्रसाद कुरु मे सौरे ! वारदो भव भास्करे।
एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबल: ।।

राजा दशरथ कृत श्री शनि देव स्तोत्र का हिन्दी में भावार्थ :

जिनके शरीर का वर्ण कृष्ण नील तथा भगवान् शंकर के समान है, उन शनि देव को नमस्कार है। जो जगत् के लिए कालाग्नि एवं कृतान्त रुप हैं, उन शनैश्चर को बार-बार नमस्कार है। जिनका शरीर कंकाल जैसा मांस-हीन तथा जिनकी दाढ़ी-मूंछ और जटा बढ़ी हुई है, उन शनिदेव को नमस्कार है। जिनके बड़े-बड़े नेत्र, पीठ में सटा हुआ पेट और भयानक आकार है, उन शनैश्चर देव को नमस्कार है।।

जिनके शरीर का ढांचा फैला हुआ है, जिनके रोएं बहुत मोटे हैं, जो लम्बे-चौड़े किन्तु सूके शरीर वाले हैं तथा जिनकी दाढ़ें कालरुप हैं, उन शनिदेव को बार-बार प्रणाम है। हे शने ! आपके नेत्र कोटर के समान गहरे हैं, आपकी ओर देखना कठिन है, आप घोर रौद्र, भीषण और विकराल हैं, आपको नमस्कार है. वलीमूख ! आप सब कुछ भक्षण करने वाले हैं, आपको नमस्कार है। सूर्यनन्दन ! भास्कर-पुत्र ! अभय देने वाले देवता ! आपको प्रणाम है। नीचे की ओर दृष्टि रखने वाले शनिदेव ! आपको नमस्कार है। संवर्तक ! आपको प्रणाम है। मन्दगति से चलने वाले शनैश्चर ! आपका प्रतीक तलवार के समान है, आपको पुनः-पुनः प्रणाम है। आपने तपस्या से अपनी देह को दग्ध कर लिया है, आप सदा योगाभ्यास में तत्पर, भूख से आतुर और अतृप्त रहते हैं। आपको सदा सर्वदा नमस्कार है। ज्ञाननेत्र ! आपको प्रणाम है। काश्यपनन्दन सूर्यपुत्र शनिदेव आपको नमस्कार है। आप सन्तुष्ट होने पर राज्य दे देते हैं और रुष्ट होने पर उसे तत्क्षण हर लेते हैं। देवता, असुर, मनुष्य, सिद्ध, विद्याधर और नाग- ये सब आपकी दृष्टि पड़ने पर समूल नष्ट हो जाते हैं। देव मुझ पर प्रसन्न होइए। मैं वर पाने के योग्य हूँ और आपकी शरण में आया हूँ।

 पता: बन्नँजय श्रीशनि क्षेत्र परमेश्वर

बन्नँजय श्रीशनि क्षेत्र परमेश्वर शनि मन्दिर, उडुपी, कर्नाटक। पिनकोड : 576101

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें :

बाए एयर निकटतम कामकाजी घरेलू हवाई अड्डा उडुपी में नहीँ है। नई दिल्ली से उडुपी तक पहुंचने का सबसे तेज़ तरीका निकटतम हवाई अड्डा मैंगलोर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो उडुपी से लगभग ५९.४ किलोमीटर दूर स्थित है और गोवा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए उड़ान है, फिर उडुपी के लिए कैब और ७ घंटे १३ मिन्ट्स लगते हैं। गो एयर, एयरएशिया, विस्तारा आदि से उड़ानें हैं। कैब द्वारा पहुँच सकते हैं श्री शनि देव मन्दिर।

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

उडुपी, एनजेडएम टीवीसी एक्सप्रेस #22634, प्रस्थान: SMTWTFS ११:४० अपराह्न हज़रत निजामुद्दीन से शाम 4 बजे रवाना होती है! उडुपी दिल्ली से चलने वाली ८ ट्रेनें हैं! आप उडुपी रेलवेस्टेशन से कैब या ऑटो लेकर बन्नँजय श्रीशनि क्षेत्र परमेश्वर मन्दिर पहुँच सकते हैं।

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें :

दिल्ली के ISBT से आप अपनी कार बाइक या बस से आते हैं तो NH : मुम्बई-आगरा एक्सप्रेसवे द्वारा आप २,१७७.५ किलोमीटर की यात्रा करके ३९ घण्टे ०५ मिनट्स में पहुँच सकते हैं श्री शनि देव मन्दिर।

श्री शनि देव की जय हो। जयघोष हो।।

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