माँ दुर्गा भवानी मन्दिर करनाल, हरियाणा भाग : २३९,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल : माँ दुर्गा भवानी मन्दिर करनाल, हरियाणा भाग: २३९

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा श्री राधे श्याम मन्दिर, जगदीश नगर कॉलोनी, हांसी हरियाणा! यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम आपके लिए लाएं हैं।

भारत के धार्मिक स्थल : माँ दुर्गा भवानी मन्दिर करनाल, हरियाणा भाग: २३९

करनाल में करीब ४०० वर्ष पुराना माँ दुर्गा भवानी मन्दिर स्थानीय लोगों की आस्था का प्रतीक बना है! इस मन्दिर में नवगृह, नव दुर्गा स्वरूप और भगवान विष्णु अवतार के कई स्वरूप विराजमान है! इतना ही नहीं करीब ४० साल पूर्व हुए मन्दिर के जीर्णोद्धार के बाद तो मन्दिर अपनी पूर्व की आस्था के साथ साथ पत्थरों पर की हुई गज़ब की मीनाकारी के कारण भी विश्वविख्यात हो रहा है!

मेरी इकलौती बहन का ससुराल दयाल सिँह कॉलोनी करनाल में है! करनाल के तत्कालीन प्रिन्सिपल श्री श्री डॉक्टर रत्न चन्द्र जी शर्मा राम जी व माँ के भक्त थे, अब उनके पुत्र यानी मेरे जीजाजी (जामाता) के छोटे भाई डॉक्टर राम कुमार शर्मा जी (रामा) और छोटे भाई देव कुमार जी शर्मा (काका) यहीँ दयाल सिँह कॉलेज करनाल में वरिष्ठ फैकल्टी हैं!

माँ दुर्गा भवानी मन्दिर की देख रेख हेतू वाला ट्रस्ट के अध्यक्ष राममूर्ति शर्मा और सचिव शिव चरण शर्मा की टीम के सदस्य पिछले दिनों कोविड-१९ महामारी के चलते मन्दिर का कार्य ठीक से कर पा रहे हैं! मन्दिर में भगवान शिव, हनुमान, श्रीराम दरबार व सूर्य भगवान की मूर्ति समेत करीब ६० देवी देवताओं के स्वरूप प्राणप्रतिष्ठित होकर विराजमान है!

स्थानीय लोगों की मान्यतानुसार मन्दिर के प्रति प्राचीन समय से लोगों में अटूट आस्था है! लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है! ४० दिन तक निरंतर माँ भगवती के समक्ष निरंतर जोत जगाने पर मनोकामना पूर्ण होती है! इस मन्दिर का महत्व त्यौहाराें की छटा पर बेहद अधिक बढ़ जाता है!

मन्दिर में माँ गङ्गा का तालाब बना है! दशहरा पर्व पर माँ गङ्गा की पूजा कर पुण्य लाभ कमाया जाता है, ऐसी व्यवस्था पूरे हरियाणा में अन्य किसी मन्दिर में नहीं है! मन्दिर मेें पाँच ब्राह्मण श्रद्धालुओं को विधिनुसार पूजा कराने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। मन्दिर का गूबंद करीब १७१ फुट ऊंचा गगनचुंबी है, जो श्रद्धालुओं की आकर्षण का केंद्र बना हुआ है!

शहर के दो किसान चौक के समीप अवस्थित इस मंदिर का विशाल प्रवेश द्वार और यहां का सुंदरता करनाल ही नहीं, बल्कि दूरदराज़ तक से आने वाले श्रद्धालुओं के मन पर अपनी अमिट छाप अंकित कर देती है! मन्दिर में प्रवेश करने के बाद अलग ही अनुभूति होती है! मन्दिर की देख रेख हेतु वाला ट्रस्ट के पदाधिकारी करते हैं!

मन्दिर के प्रति प्राचीन समय से लोगों में अटूट आस्था है! यहां आकर मन्नत मांगने वाले लोगों की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है! ४० दिन तक निरंतर (चलिया) माँ भगवती के समक्ष निरंतर जोत जगाने पर वांछित फल प्राप्त होता है! इस मन्दिर का महत्व नवरात्र, दीपावली व अन्य पर्व त्योहारों के समय और अधिक बढ़ जाता है!

मंदिर परिसर में बना तालाब:

मंदिर परिसर में ही माँ गङ्गा का तालाब भी बना है! दशहरा पर्व पर यहां माँ गङ्गा की पूजा करके श्रद्धालु पुण्य लाभ अर्जित करते हैं! पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था पूरे हरियाणा में अन्य किसी मन्दिर में नहीं है! मन्दिर का सुंदर और अति भव्य गुंबद करीब १७१ फुट ऊंचा है! यह गगनचुंबी गुंबद तमाम लोगों के लिए अर्से से आकर्षण बना है।


दूरदराज से आते श्रद्धालु :

इस मन्दिर से करनाल के पुराने बस स्टैंड की भी अधिक दूरी नहीं है! इसलिए यहां जिले के अलावा अन्य स्थानों से भी श्रद्धालुओं का आवागमन वर्ष भर चलता रहता है! नवरात्र और अन्य पावन अवसरों पर यहां की छटा देखते ही बनती है! मन्दिर ट्रस्ट कमेटी की ओर से भी इस दौरान मन्दिर के आंतरिक और बाहरी क्षेत्र में सुंदर सजावट कराई जाती है!

महर्षि वेदव्यास द्वारा लिखा गया माँ दुर्गा का यह स्तोत्र कल्याणकारी है! इसका पाठ करने से मनुष्य हर सँकट से दूर रहता है माँ भगवती की कृपा हमेशा बनी रहती है!

दुर्गा स्तुति :

जय भगवति देवि नमो वरदे जय पापविनाशिनि बहुफलदे।
जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥१॥

जय चन्द्रदिवाकरनेत्रधरे जय पावकभूषितवक्त्रवरे।
जय भैरवदेहनिलीनपरे जय अन्धकदैत्यविशोषकरे॥२॥

जय महिषविमर्दिनि शूलकरे जय लोकसमस्तकपापहरे।
जय देवि पितामहविष्णुनते जय भास्करशक्रशिरोवनते॥३॥

जय षण्मुखसायुधईशनुते जय सागरगामिनि शम्भुनुते।
जय दु:खदरिद्रविनाशकरे जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे॥४॥

जय देवि समस्तशरीरधरे जय नाकविदर्शिनि दु:खहरे।
जय व्याधिविनाशिनि मोक्ष करे जय वाञ्छितदायिनि सिद्धिवरे॥५॥

एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं य: पठेन्नियत: शुचि:।
गृहे वा शुद्धभावेन प्रीता भगवती सदा॥६॥

!!इति श्री दुर्गा स्तोत्र पठित्वा!! 

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें:

फ्लाइट से आपको दिल्ली के हवाईअड्डे उतरकर दिल्ली पालम के इन्दिरगाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से कैब द्वारा ११७.७ किलोमीटर्स की यात्रा कर पहुँच जाओगे करनाल के माँ दुर्गा भवानी मन्दिर!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें:

रेलवे के लोहपथगामिनी मार्ग से दिल्ली से करनाल पहुँच जाओगे! पहुँचने के लिए कैब, रिक्शा ऑटो रिक्शा से आसानी से करनाल के माँ दुर्गा भवानी मन्दिर पहुँच जाओगे !

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें:

आप कार अथवा बस से दिल्ली से रवाना होते हो तो मन्दिर पहुँचने के लिए आप २ घण्टे ३३ मिनट्स का रास्ता तय करते हुए ११७.७ किलोमीटर यात्रा करके राष्ट्रीय राजमार्ग NH: ४४ द्वारा आप माँ दुर्गा भवानी मन्दिर पहुँच जाओगे!

माँ दुर्गा भवानी की जय हो! जयघोष हो!!

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