माँ जोगुलम्बा महा शक्ति पीठ मन्दिर आलमपुर, तेलंगाना भाग : १७६,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल: माँ जोगुलम्बा महा शक्ति पीठ मन्दिर आलमपुर, तेलंगाना भाग :१७६

आपने पिछले भाग में पढ़ा भारत के धार्मिक स्थल : मुक्तसर साहिब गुरुद्वारा, ज़िला मुक्तसर, पँजाब यदि आपसे उक्त लेख छूट गया अथवा रह गया हो और आपमें पढ़ने की जिज्ञासा हो तो आप प्रजा टूडे की वेब साईट पर जाकर, धर्म- साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं!

आज हम आपके लिए लाए हैं : भारत के धार्मिक स्थल: माँ जोगुलम्बा महा शक्ति पीठ मन्दिर आलमपुर, तेलंगाना भाग :१७६

आलमपुर भारतीय राज्य तेलंगाना के जोगुलम्बा गडवाल ज़िले का एक शहर है! यह एक धार्मिक महत्व का शहर है जो पवित्र मानी जाने वाली दो नदियों तुंगभद्रा नदी और कृष्णा नदी के सँगम पर स्थित है और इसे दक्षिण काशी (जिसे नवब्रह्मेश्र्वर तीर्थ भी कहा जाता है) की सँज्ञा दी जाती है तथा इसे प्रसिद्ध शैव तीर्थ श्रीसैलम का पश्चिमी द्वार भी कहा जाता है! आलमपुर में सँगमेश्वर मन्दिर!

स्कंदपुराण में आलमपुर मन्दिर की पवित्रता का उल्लेख किया गया है! आलमपुर में प्रमुख देवताओं में ब्रह्मेश्वर और जोगुलम्बा हैं! यह नलमाला पहाड़ियों से घिरा हुआ है! यह शक्तिवाद में एक लोकप्रिय हिंदू तीर्थ स्थल है जहाँ शिव को समर्पित नौ मन्दिरों का एक समूह है जिसे सातवीं और आठवीं शताब्दी ईस्वी में बनाया गया था! आलमपुर की पवित्रता का उल्लेख स्कंदपुराण में मिलता है! यह नल्लामाला पहाड़ियों से घिरा हुआ है और तुंगभद्रा नदी के बाएं किनारे पर स्थित है!

आलमपुर में कई हिंदू मन्दिर हैं, जिनमें प्रमुख हैं जोगुलम्बा मन्दिर, नवब्रह्म मन्दिर, पापनाशी मन्दिर और संगमेश्वर मन्दिर! जोगुलम्बा मन्दिर अठारह महा शक्ति पीठों में से एक है, जो शक्तिवाद में सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं! नवब्रह्मा मन्दिर नौ मन्दिर हैं जो शिव को समर्पित हैं जिसे बादामी चालुक्यों द्वारा सातवीं और आठवीं शताब्दी में बनाया गया था! नवब्रह्मा मन्दिरों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा तैयार आधिकारिक “स्मारकों की सूची” पर एक पुरातात्विक और स्थापत्य खजाने के रूप में सूचीबद्ध किया गया है! पापनासी मन्दिर आलमपुर के दक्षिण-पश्चिम में

२.५ किलोमीटरकी दूरी पर पापनासी गांव में स्थित ९वीं और ११वीं शताब्दी के बीच के तेईस हिंदू मंदिरों का एक समूह है! पापनासी मन्दिर शैव परंपरा के नवब्रह्म मंदिरों के करीब हैं, लेकिन कुछ सदियों बाद राष्ट्रकूट और पश्चिमी चालुक्यों द्वारा बनाए गए थे!

माँ जोगुलम्बा का इतिहास:

आलमपुर सातवाहन, नागार्जुन कोंडा के इक्ष्वाकु, बादामी चालुक्य, राष्ट्रकूट, कल्याणी चालुक्य, काकतीय, विजयनगर साम्राज्य और गोलकुंडा के कुतुब शाही के शासन में था! आलमपुर को पहले हलमपुरम, हेमलपुरम और आलमपुरम के नाम से जाना जाता था। हातमपुरा नाम के तहत, पश्चिमी चालुक्य राजा विक्रमादित्य ६ के शासनकाल में ११०१ सीई के एक शिलालेख में इसका उल्लेख किया गया था!
आलमपुर जोगुलम्बा मन्दिर

माँ की स्तुति :

महर्षि व्यास द्वारा लिखा गया माँ का यह स्तोत्र कल्याणकारी है. इसका पाठ करने से मनुष्य हर सँकट से दूर रहता है माँ भगवती की कृपा हमेशा बनी रहती है…

जय भगवति देवि नमो वरदे जय पापविनाशिनि बहुफलदे।जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥१॥
जय चन्द्रदिवाकरनेत्रधरे जय पावकभूषितवक्त्रवरे!
जय भैरवदेहनिलीनपरे जय अन्धकदैत्यविशोषकरे॥२॥

जय महिषविमर्दिनि शूलकरे जय लोकसमस्तकपापहरे!
जय देवि पितामहविष्णुनते जय भास्करशक्रशिरोवनते॥३॥

जय षण्मुखसायुधईशनुते जय सागरगामिनि शम्भुनुते!
जय दु:खदरिद्रविनाशकरे जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे॥४॥

जय देवि समस्तशरीरधरे जय नाकविदर्शिनि दु:खहरे!
जय व्याधिविनाशिनि मोक्ष करे जय वाञ्छितदायिनि सिद्धिवरे॥५॥

एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं य: पठेन्नियत: शुचि:!
गृहे वा शुद्धभावेन प्रीता भगवती सदा॥६॥

वायु मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (हैदराबाद हवाई अड्डा) शहर से निकटतम हवाई अड्डा है। यहां से आप माँ जोगुलम्बा मन्दिर पहुंचने के लिए निजी कैब या टैक्सी किराए पर ले सकते हैं!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

आलमपुर रेलवे स्टेशन से लगभग ८ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है! आलमपुर रेलवे स्टेशन हैदराबाद-कुरनूल लाइन पर है और आलमपुर शहर में कार्य करता है। मन्दिर से करीब २७ किलोमीटर दूर कुरनूल रेलवे स्टेशन है! कुरनूल सड़क और रेल मार्ग से शेष भारत से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

दिल्ली से आप बस या कार से ३० घण्टों ८ मिन्ट्स में १८२०८.८ किलोमीटर की दूरी तय करके राष्ट्रीय राजमार्ग NH-४४ द्वारा पहुँच जाओगे!

माँ जोगुलम्बा महाशक्ति की जय हो! जयघोष हो!!

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