मारुति नंदन वागीश जी महाराज का रविवार स्पोर्ट्स क्लब गोरेगांव मुम्बई में प्रवचन 

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@मुम्बई महाराष्ट्र

भगवान श्री कृष्ण की नित्य रासलीला भूमि श्री धाम वृंदावन के उदीयमान धर्म दर्शन व संस्कृति के उपदेशकों में अल्पायु में ही अपनी विशिष्ट छाप स्थापित करने वालों में यदि किसी का नाम आता है तो आचार्य पीठ पर आसीन आचार्य मारुति नंदन वागीश जी महाराज का।

आचार्य वंश परंपरा में जन्म लेने वाले पूज्य वागीश जी ब्रज की विभूति स्वामी श्री ब्रज रमणाचार्य जी के सुपुत्र एवं भागवत के स्तंभ आचार्य पीठाधीश्वर भागवत भूषण स्वामी किशोरी रमणाचार्य जी महाराज के यशस्वी सुपुत्र है।

सिद्ध संत महापुरुषों के आप कृपा पात्र हैं ,आपको जन्म के समय ही हनुमान जी के अवतार सिद्ध संत नीमकरोरी बाबा जी महाराज ने मारुति नंदन नाम दिया, मात्र 7 वर्ष की आयु में भागवत का श्लोक सुनकर भागवत के टीका कार स्वामीश्री अखंडानंद सरस्वती जी महाराज ने आपको वागीश कहकर पुकारा । ऐसे आचार्य मारुति नंदन वागीश जी महाराज जिन्होंने अपने श्रीमद्भागवत की आध्यात्मिक यात्रा मात्र 17 वर्ष की अवस्था में बेंगलुरु नगर से आरंभ की ।

आपने वेद, दर्शन, शास्त्र ,पुराण के गहन अध्ययन के साथ श्रीवागीशजी महाराज ने इस वैज्ञानिक युग में विज्ञान से भी स्नातक की उपाधि प्राप्त की श्रीमद जगद्गुरु रामानुजाचार्य हरिदेव पीठाधीश्वर स्वामी देव नारायणाचार्य जी महाराज से आपने दीक्षा शरणागति ली, एवं विद्वत शिरोमणि व्याकरणाचार्य श्री राम कृष्ण शास्त्री जी महाराज से शिक्षा प्राप्त की, पूज्य वागीशजी महाराज के प्रवचन की विशिष्टता यह है शास्त्रीय संगीत के स्वर लहरी में आध्यात्मिक प्रसंग एवं गूढ़ रहस्य को बड़ी सरलता से श्रोताओं के मानस एवं हृदय में उतार देते हैं, इसी कारण श्री वागीश जी को 3 वर्ष पूर्व एक विशाल विद्वत संत सम्मेलन के बीच भागवत धर्म प्रचार विद्वत परिषद ने आपको भागवत प्रभाकर की उपाधि से अलंकृत किया।

वर्तमान में आप यमुना के किनारे आचार्य पीठ के अध्यक्ष हैं,एवं इसी केशव धाम के समीप भागवत पीठ के संस्थापक अध्यक्ष हैं । ऐसे परंपरानुगत भागवत मनीषी श्री वैष्णवाचार्य मारुति नंदन वागीश जी महाराज सत्य सनातन सेवार्थ संस्थान के माध्यम से अनेक सेवा प्रकल्प में संलग्न है। तथा इस बार वृंदावन में 25वा श्रावण झूलन भागवत महोत्सव रजत जयंती महोत्सव 30जुलाई से 6अगस्त 2022में आयोजित किया जा रहा है विश्व के कोने कोने से भक्तों का सौभाग्य होगा कि हरियाली तीज पर स्वर्ण हिंडोले पर ठाकुर श्री बांके बिहारी जी का दिव्य दर्शन होगा

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