मरघट वाले हनुमान बाबा मन्दिर, निगमबोध घाट के सामने, जमना बाज़ार, दिल्ली भाग :१४६ , ,पँ० ज्ञानेश्वर हँस देव की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल: मरघट वाले हनुमान बाबा मन्दिर, निगमबोध घाट के सामने, जमना बाज़ार, दिल्ली भाग :१४६

आपने पिछले भाग में पढ़ा भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल : नरसिम्हा स्वामी मन्दिर, अहोबिलम, आंध्रप्रदेश! यदि यह लेख आपसे छूट गया या रह गया हो तो आप प्रजाटूडे की वेबसाईट पर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर, पढ़ सकते हैं! अब आप पढ़ें: भारत के धार्मिक स्थल: मरघट वाले हनुमान बाबा मन्दिर, निगमबोध घाट के सामने, जमना बाज़ार, दिल्ली भाग :१४६

पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूरी पर स्थित यह मन्दिर! दिल्ली के सबसे पुराने मन्दिरों में से एक है! दिल्ली के जमुना बाजार में स्थित प्राचीन वृद्ध हनुमान जी का यह मन्दिर! यह शक्तिशाली हनुमान मन्दिर दिल्ली के जमुना बाज़ार में स्थित है जो मरघट वाले हनुमान बाबा के नाम से सुप्रसिद्ध है! दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास निगमबोद्ध घाट श्मशान घाट के दोनोँ सड़क पार, फ्लाई ओवर प्रारम्भ होने से पूर्व स्थित है वृद्ध हनुमान जी का अति प्राचीन मन्दिर!

इनके दर्शन को दिल्ली के, भारत वर्ष के और विदेशों से भी हनुमान बाबा के लोग प्रतिदिन दर्शनार्थ आते हैं और मन मांगीं मन्नतें- मुरादें पा जाते हैं! मन्दिर के बारें में ऐसी मान्यता है कि यहाँ देवाधिदेव शिवशँकर के अँश भगवान हनुमान जी साक्षात रूप से प्रकट हुए थे! मरघट वाले हनुमान बाबा के इस मन्दिर का इतिहास यह है कि जब भगवान हनुमान जी लक्ष्मण यति जी के लिए मृत-सँजीवनी बूटी का पर्बत लेकर श्रीलँका जा रहे थे तो वह दिल्ली के इसी स्थान पर कुछ देर के लिए ठहरे थे!

इस मन्दिर का नाम मरघट वाले बाबा हनुमान मन्दिर इस वजह से विख्यात हुआ, क्योंकि हनुमान जब पहाड़ लेकर जा रहे थे तो उन्होंने नीचे यमुना नदी को बहते हुए देखा और यमुना जी के किनारे हनुमान जी ने जमना-जल पीना चाहा! लेकिन जब हनुमान जी नीचे उतरे तो उन्होंने देखा कि यहाँ तो शमशान घाट है और उनके यहाँ उतरने से बुरी आत्माओं में हाहाकार मच गया था! यहाँ उस समय बाबा हनुमान जी की उपस्थिति ने सभी आत्माओं को मुक्ति प्रदान हो गई थी!

जब भगवान हनुमान जी ने माता यमुना जी के दर्शन किये उन्होंने आचमन किया तो तब यमुना जी ने भी हनुमान जी को कहा कि आपके दर्शन करने मैं प्रतिवर्ष आया करुंगी और यहाँ आपका भव्य एवँ एक शक्तिशाली मन्दिर होगा!प्रति वर्ष यमुना नदी का जल स्तर बढ़कर मन्दिर तक आता है! निर्माण कार्य होने के बाद यमुना जी की धारा मन्दिर तक नहीं आ पाई लेकिन यहां के साधुओं का कहना है कि कुछ वर्षों के अँतराल बाद यहाँ बाढ़ आती ही आती है और जब यमुना जी का हनुमान जी के दर्शन करने का मन होता है तो वह विशाल रूप लेकर मन्दिर में आती हैं! मन्दिर के समक्ष आज भी शमशान घाट है और जो आत्मा यहाँ अंतिमयात्रा में आती है उसे बाबा हनुमान जी अवश्य ही पार लगा देते हैं!

प्रत्येक मङ्गलवार और प्रत्येक शनिवार को मरघट वाले बाबा हनुमान मन्दिर में लम्बी लम्बी क़तारों की सँख्या में श्रद्धालु जन हज़ारों की सँख्या में दर्शनार्थ आते हैं और अपनी मन-माँगी समस्त मुरादें पा जाते हैं! जो भक्त जय सीताराम जय हनुमान जपते हैं प्रार्थना करते हैं तो मरघटवाले बाबा हनुमान जी मन की बातेँ जान सिद्धि प्रदान करते हैं!माम्यतानुसार मरघटवाले श्री हनुमानजी के मन्दिर को महाभारत काल में पाँडवों द्वारा बनाए गए पाँच मन्दिरों में से एक है!

इस मन्दिर में भगवान हनुमान की मूर्ति जमीन से करीब ८ फ़ुट नीचे है! पहले यह मंदिर यमुना नदी के तट पर स्थित था। समय बीतने के साथ, यमुना नदी का जल स्तर घट गया और मंदिर किनारे से दूर चला गया! यह भी माना जाता है कि इस मन्दिर में भगवान हनुमान जी स्वयँभू: है जिसका अर्थ है कि हनुमान जी स्वतः यहाँ प्रकट हुए थे! यह भी कहा जाता है कि जब भी यमुना नदी का जल स्तर बढ़ता है तो इस मन्दिर में पानी आ जाता है और हनुमानजी की मूर्ति कँधे तक पानी में डूब जाती है।

इस मन्दिर के समीप ही श्री पीपलेश्वर शनिदेव का प्रसिद्ध मन्दिर भी है! इस मन्दिर में विशेष रूप से मङ्गलवार और शनिवार को बड़ी सँख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिसके दौरान भक्तों को घण्टों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है! हनुमान जयँती यहाँ भव्य स्तर पर मनाई जाती है जिसमें कुछ साँस्कृतिक कार्यक्रम और झाँकियाँ भी होती हैं! हनुमान जयँती के समय यह मन्दिर पूरे दिन खुला रहता है! अधिकाँश दिल्लीवाले यही चाहते हैं कि मरणोपरांत मर्घटवाले बाबा का शुभाशीष मिले और अन्तिम क्रियाकर्म निगमबोद्ध घाट मरघट में ही हो!

मरघटवाले हनुमान मन्दिर के खुलने एवँ बन्द होने का समय:

*सुबह: सुबह ६.00 बजे से ११.00 बजे तक
शाम: ४.00 बजे से रात्रि ११.00 बजे तक
हनुमान जयँती अवसर पर:
सुबह ४:३० से १२:00 बजे तक!

फोटोग्राफी:

प्रार्थना कक्ष में अनुमति नहीं है!

सिद्ध हनुमानजी मन्त्र :

यूँ तो हनुमानजी के बहुत सारे मन्त्र हैं, जैसे ‘ॐ हनुमंते नम:’ या ‘ॐ हं हनुमते नम:’ मन्त्र सन्त लोग जपते हैं! उक्त मन्त्र जप के लिए हैं, लेकिन हम यहॉँ बता रहे हैं आपको ऐसा मन्त्र जिसे ‘ध्यान मन्त्र’ कहते हैं!हनुमान स्तोत्र, हनुमान अष्टक, हनुमान बाहुक, बजरंग बाण, हनुमान कवच, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, वडनाल स्तोत्र पढ़ें! पढ़ने से पूर्व इस हनुमान ध्यान मन्त्र का उच्चारण कीजिए!

अथ ध्यानँ :

ॐ मनोजवं मारुत-तुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्
वातात्मजं वानर – यूथमुख्यं
श्रीप्रभुरामदूतम् शरणंप्रपद्ये

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

दिल्ली पालम के इन्दिरगाँधी अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के से आप कैब द्वारा ४१ किलोमीटर की दूरी तय करके ४५ मिन्ट्स में पहुँच जाओगे!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

पुरानी दिल्ली से कैब, ई-रिक्शा, ऑटो-रिक्शा, साईकिल-रिक्शा से पन्द्रह से बीस मिन्ट्स में पहुँच सकते हो! कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन से आप शीघ्र ही पाँच मिन्ट्स में पहुँच सकते हो!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

आई एस बी टी से मात्र २ किलोमीटर की दूरी पर है, मर्घटवाले बाबा हनुमानजी का उक्त पावन पुनीत पुण्य प्राचीन मन्दिर!

 

मरघटवाले बाबा हनुमानजी की जयहो! जयघोष हो!!

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