मुख्यमंत्री भगवंत मान को उनके दायित्वों की याद दिलाने की कोशिश की

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@ चंडीगढ़ पंजाब 

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने शनिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को उनके दायित्वों की याद दिलाने की कोशिश की कि उनके कानूनी सलाहकार इस विषय पर उन्हें समुचित ढंग से सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। राजभवन एवं आप सरकार के बीच शुक्रवार को तब विवाद बढ़ गया जब राज्यपाल ने मंगलवार को विधानसभा के प्रस्तावित सत्र में किये जाने वाले विधायी कार्यों की सूची मांग ली। इस पर मान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह तो ‘हद’ है।

पहले पुरोहित ने सरकार की विश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 22 सितंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की योजना विफल कर दी थी।शनिवार को उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा आज के अखबारों में आपका बयान पढ़कर मुझे ऐसा लगा कि शायद आप मुझसे काफी हद तक नाराज हैं।मुझे लगता है कि आपके कानूनी सलाहकर आपको समुचित ढंग से जानकारी नहीं दे रहे हैं। शायद मेरे बारे में आपकी राय संविधान के अनुच्छेदों 167 और 168 के प्रावधानों को पढ़ने के बाद बदल जाएगी जिन्हें मैं आपके संदर्भ के लिए उद्धृत कर रहा हूं।

अनुच्छेद 167 राज्यपाल के प्रति मुख्यमंत्री के दायित्वों को परिभाषित करता है जबकि अनुच्छेद 168 में राज्य विधानमंडल की संरचना का विवरण है। शुक्रवार को मान ने यह कहते हुए राज्यपाल की मांग को लेकर अपनी नाखुशी प्रकट की थी कि विधानमंडल के किसी सत्र से पहले उनकी सहमति औपचारिता भर है।

मान ने ट्वीट किया था विधायिका के किसी सत्र से पूर्व राज्यपाल/ राष्ट्रपति की सहमति औपचारिकता है। 75 सालों में किसी भी राष्ट्रपति या राज्यपाल ने सत्र बुलाने से पहले विधायी कार्यों की सूची नहीं मांगी। कार्य मंत्रणा समिति एवं विधानसभा अध्यक्ष ही विधायी कार्य तय करते हैं। अगले राज्यपाल सभी भाषणों को उनके द्वारा अनुमोदित करने की मांग करेंगे। यह तो हद ही है।

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