मुरुदेश्वर मन्दिर मंगलूरु, कर्नाटक! भाग: १०९, पं० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की कलम से

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भारत के धार्मिक स्थल: मुरुदेश्वर मन्दिर मंगलूरु, कर्नाटक! भाग: १०९

आपने पिछले भाग में पढ़ा : भारत के प्रसिद्ध धार्मिकस्थल :केदारनाथ मन्दिर, रुद्रप्रयाग, उत्तराखण्ड! यदि आपसे यह लेख छूट गया हो और आपमें पढ़ने की जिज्ञासा हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाइट पर धर्म-सहित्य पृष्ठ पर जा कर पढ़ सकते हैं! आज हम आपको बता रहे हैं:

भारत के धार्मिक स्थल: मुरुदेश्वर मन्दिर, मंगलूरु, कर्नाटक! भाग: १०९

दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में उत्तर कन्नड ज़िले के भटकल तहसील स्थित एक कस्बा है मुरुदेश्वर! इसी कस्बे के नाम पर मुरुदेश्वर भगवान शिव शँकर का एक नाम है! यहाँ भगवान शिव शँकर की विश्व की दूसरी सबसे ऊँची मूर्ति स्थित है!

मंगलुरु से १६५ किलोमीटर दूर अरब सागर के किनारे बहुत ही सुन्दर एवँ शाँत स्थान पर बना हुआ है! मुरुदेश्वर सागर तट, कर्नाटक के सुन्दर तटों में से एक है! पर्यटकों एवँ शिव;भक्तोँ के लिए यहाँ आना दो-गुना लाभप्रद है, जहाँ एक ओर इस पवन पुनीत स्थल के दर्शन होते हैं और दूसरी ओर प्राकृतिक सुन्दरता का अविस्मरणीय आलौकिक आनन्द प्राप्त होता है!

मुरुदेश्वर मन्दिर परिसर के पीछे एक दुर्ग है जो विजयनगर साम्राज्य के काल का है! कन्दुका पहाड़ी पर, तीन ओर से पानी से घिरा यह मुरुदेश्वर मन्दिर भगवान शिवशँकर को समर्पित है! यहाँ भगवान शिवशँकर का आत्म लिंग स्थापित है, जिस की कथा रामायण काल से ही है! अमरता पाने हेतु रावण जब शिवजी को प्रसन्न करके उनका आत्मलिंग अपने साथ लँका ले जा रहा था, तब रास्ते में इस स्थान पर आत्मलिंग धरती पर रख दिए जाने के कारण स्थापित हो गया था!

गुस्से में रावण ने इसे नष्ट करने का प्रयास किया उस प्रक्रिया में, जिस वस्त्र से आत्मलिंग ढका हुआ था वह म्रिदेश्वर जिसे अब मुरुदेश्वर कहते हैं में जा गिरा! इस की पूरी कथा शिव पुराण में मिलती है! राजा गोपुरा या राज गोपुरम विश्व में सब से ऊँचा गोपुरा माना जाता है! यह २४९ फीट ऊँचा है! इसे एक स्थानीय व्यवसायी ने बनवाया था! द्वार पर दोनों तरफ सजीव हाथी के बराबर ऊँची हाथी की मूर्तियाँ देखी जा सकती हैं!

मुरुदेश्वर मन्दिर के बाहर बनी शिवशँकर भगवान की मूर्ति विश्व की दूसरी सबसे ऊँची शिव मूर्ति है और इसकी ऊँचाई १२३ फ़ुट है! अरब सागर में बहुत दूर से इसे देखा जा सकता है! इसे बनाने में दो साल लगे थे और शिवमोग्गा के काशीनाथ और अन्य मूर्तिकारों ने इसे बनाया था! इसका निर्माण उसी स्थानीय श्री आर एन शेट्टी ने करवाया और लगभग ५ करोड़ रुपयों की लागत आई थी! मूर्ति को इस तरह बनवाया गया है कि सूरज की किरणे पड़ते ही यह चमक उठती है!

शिवशँकर का पुरातन बीज मन्त्र है :
( अ ओ म् )
ॐ नमः शिवाय!

अथ रुद्राष्टकम् :

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं , विभुंव्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपं ।
निजंनिर्गुणंनिर्विकल्पं निरीहं , चिदाकाशमाकाशवासंभजेऽहं ।।१।।

निराकार ॐकारमूलं तुरीयं , गिराज्ञान गौतीतमीशं गिरीशं ।
करालं महाकाल कालं कृपालं , गुणागार संसार पारं नतोऽहं ।।२।।

तुषाराद्रिसंकाश गौरं गभीरं , मनोभूतकोटि प्रभाश्रीशरीरं ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनि चारुगंगा , लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा ।।३।।

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं , प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालं ।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं , प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ।।४।।

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं , अखण्डं अजं भानुकोटि प्रकाशं।
त्रयः शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं , भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं ।।५।।

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी , सदासद्चिदानन्द दाता पुरारि।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारि , प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारि ।।६।।

नवावत् उमानाथपादारविन्दं , भजन्तीह लोके परे वा नराणां ।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं , प्रसीद प्रभो सर्व भूताधिवासं ।।७।।

न जानामि योगं जपं नैव पूजां ,नतोऽहं सदासर्वदा शम्भु तुभ्यं।
जराजन्मदुःखौऽघतातप्यमानं , प्रभो पाहि आपन् नमामीश शम्भो ।।८।।

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये, ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।
!!श्री रुद्राष्टकम् सम्पूर्णम्!!

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें मुरुदेश्वर मन्दिर:

मुरुदेश्वर मन्दिर से सबसे निकटतम हवाईअड्डा है :मंगलोर! यहां से कैब द्वारा आप १६० किलोमीटर दूर तीन घण्टे से पहले ही पहुँच जाओगे!

रेलमार्ग से कैसे पहुँचें मुरुदेश्वर मन्दिर:

मुरुदेश्वर मन्दिर, मंगलुरु-मुम्बई रेलपथ पर स्थित एक रेलवे स्टेशन भी है! मुरुदेश्वर मन्दिर मंगलोर रेल्वे स्टेशन से दो किलोमीटर दूर है!

सड़कमार्ग से कैसे पहुँचें मुरुदेश्वर मन्दिर:

मुरुदेश्वर मन्दिर दिल्ली से २०१०३.१ किलोमीटर दूर है! आप आगरा-मुम्बई राष्ट्रीय हाइवे से आसानी से ३८ घण्टे में दिल्ली से मुरुदेश्वर मन्दिर पहुँच जाओगे!

श्री मुरुदेश्वर शिवशँकर की जय हो! जयघोष हो!!:

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