ऊर्जा क्षेत्र की पीएसयू ने राष्ट्रीय खेल विकास कोष के साथ ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

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@ नई दिल्ली

विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले दो प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों एनटीपीसी और आरईसी लिमिटेड ने एक ऐतिहासिक मौके पर राष्ट्रीय खेल विकास कोष और युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर केंद्रीय विद्युत और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर. के. सिंह और केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल एवं सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर की उपस्थिति में किए गए। इस अवसर पर गुरदीप सिंह, सीएमडी एनटीपीसी, विवेक कुमार देवांगन, सीएमडी आरईसी, महानिदेशक भारतीय खेल प्राधिकरण, कई प्रतिष्ठित एथलीट और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

विद्युत मंत्री ने आगे कहा कि कई अन्य पावर पीएसयू भी दूसरे अन्य खेलों को आर्थिक रूप से समर्थन देने के लिए आगे आएंगे। उन्होंने पावर पीएसयू से न केवल सफल खिलाड़ियों को बल्कि ऐसे अन्य खिलाड़ियों को जिन्हें मदद की आवश्यकता है, रोजगार प्रदान करने के लिए आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने आगामी ओलंपिक के लिए सभी एथलीटों की बड़ी जीत और देश को गौरवान्वित करने की कामना करते हुए अपनी बात को समाप्त किया।

इस अवसर पर बोलते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि विद्युत मंत्रालय के दो सार्वजनिक उपक्रमों ने खेलों के विकास के लिए कुल 215 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, जिससे यह अवसर ऐतिहासिक बन गया है। विद्युत मंत्रालय के इस योगदान से खेल क्षेत्र में ऊर्जा का संचार होगा, उन्होंने कहा कारोबारी जगत से लेकर व्यक्तियों तक और विभिन्न संस्थानों से लेकर राज्यों तक सभी को एक टीम के रूप में मिलकर काम करना चाहिए। यह समझौता ज्ञापन हमारे एथलीटों को एक बड़ी प्रेरणा देगा ठाकुर ने साथ ही कहा इससे पहले मैंने एनएसडीएफ में एक एथलीट, एक खेल और एक अकादमी को अपनाने के लिए ऑनलाइन तरीके से मदद का आग्रह किया था। अब एनटीपीसी और आरईसी ने खेल और खिलाड़ियों दोनों को अपनाया है। यह सब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सोच के कारण हुआ है। देश में कई सार्वजनिक उपक्रम हैं, लेकिन वे जो एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करते हैं वो भारत को एक सॉफ्ट पावर बनने में मदद करते हैं।

अपनी सीएसआर पहल के तहत, एनटीपीसी ने तीरंदाजी के विकास के लिए 5 साल में 115 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है। कुल 115 करोड़ रुपये में से 15 करोड़ रुपये फील्ड टार्गेट, प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना और धनुष-बाण जैसे उपकरणों पर एकमुश्त व्यय के रूप में खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा, शेष 100 करोड़ रुपये (प्रति वर्ष 20 करोड़ रुपये) जमीनी स्तर से तीरंदाजी के विकास, पहचानी गई प्रतिभाओं के प्रशिक्षण, विशिष्ट प्रतिभाओं के प्रशिक्षण, उच्च प्रदर्शन वाले प्रशिक्षकों, एफओपी उपकरणों की खरीद, तीरंदाजी के लिए अनुकूल विकास खेल और विज्ञान प्रयोगशाला, उच्च प्रदर्शन करने वालों के लिए छात्रवृत्ति/पुरस्कार राशि, अग्रिम प्रशिक्षण/प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन/विदेशी प्रशिक्षण और पैरा आर्चर सहित रिकर्व और कंपाउंड तीरंदाजों के सब-जूनियर/जूनियर तीरंदाजों के लिए खर्च किए जाएंगे।

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