पीयूष गोयल ने राज्यों से कारोबारी सुगमता में सुधार के लिए आग्रह किया

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@ नई दिल्ली

केंद्रीय उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, वस्त्र तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल ने कारोबारियों को परेशान किए बिना उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन की मांग की है।

यहां ‘लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 पर राष्ट्रीय कार्यशाला’ में अपने उद्घाटन में  गोयल ने कानूनों को अपराध से मुक्त करने के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण का सुझाव दिया और राज्यों से कानूनों को सरल बनाने की आवश्यकता के साथ उपभोक्ताओं के हितों को संतुलित करने की पहल का समर्थन करने का आग्रह किया ताकि व्यवसायों विशेष रूप से छोटे उद्यमों को अनुचित कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े।

पीयूष गोयल ने कहा, यह सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि उपभोक्ताओं के साथ अन्याय न हो और साथ ही व्यापारियों के प्रति जिम्मेदारी को समझें ताकि वे शांति से काम कर सकें।उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से दुर्भावनापूर्ण और वास्तविक मामलों के बीच अंतर पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि बाट और माप के अंकन के स्थानों पर यदि कोई गलत काम किया जाता है, तो सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी इसका उल्लेख है, जिससे इस बात का संकेत मिलता है कि ‘वजन और माप के मुख्य नियंत्रक और राज्यों की ओर से ‘हर चार महीने में एक बार सभी माप उपकरणों का निरीक्षण किया जाना चाहिए और स्टांप शुल्क के भुगतान पर मुहर लगाया जाना चाहिए।आंकड़ों के बारे में  गोयल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पहली बार किए गए अपराधों के 97 प्रतिशत मामले सीमित धाराओं में दर्ज किए गए थे, जबकि समान धाराओं के तहत कोई दूसरा अपराध दर्ज नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा उन राज्य सरकारों को बेनकाब करता है जो गैर-अपराधीकरण का विरोध कर रही हैं।

उन्होंने राज्यों से सवाल किया,पहली बार किए गए अपराध के मामलों की संख्या इतनी अधिक और दूसरी बार किए गए अपराध के मामलों की संख्या शून्य क्यों हैं संबंधित राज्यों में दूसरी बार किए गए अपराध के रूप में कितने मामले हैं सरकार ने ऐसा क्या किया है जहां अपराध के मामले दूसरी बार नहीं हुए हैं उपभोक्ता कार्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा 2018-19 में पहली बार किए गए अपराध के रूप में दर्ज किए गए मामलों की संख्या 1,13,745 थी, जबकि कंपाउंडेड मामले 97,690 थे। इसी अवधि में, दूसरी बार किए गए अपराधों की संख्या जिसमें मामला दर्ज किया गया था, उनमें से केवल 4 मामले अदालत में दायर किए गए थे।

गोयल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, इस प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए, अपराधों की संख्या धीरे-धीरे शून्य हो जानी चाहिए।अपने भाषण में उन्होंने कहा, मेरा मानना ​है कि यह कार्यशाला एलएम अधिनियम को अपराध से मुक्त करने के लिए सिफारिशों को अंतिम रूप देने में मदद करेगी। इससे पहले, इस मुद्दे पर 2 जुलाई, 2021 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सभी राज्य सरकारों के साथ चर्चा की गई थी, जिसमें कुछ राज्य एलएम अधिनियम के प्रावधानों को अपराध से मुक्त करने के पक्ष में नहीं थे।

हरियाणा के उपमुख्यमंत्री  दुष्यंत चौटाला, आंध्र प्रदेश सरकार के उपभोक्ता कार्य, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री  करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव, बिहार सरकार के कृषि मंत्री  अमरेंद्र प्रताप सिंह, दिल्ली सरकार के खाद्य आपूर्ति, पर्यावरण तथा वन एवं निर्वाचन मंत्री  इमरान हुसैन, मणिपुर सरकार के उपभोक्ता कार्य, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री  एल. सुसिंड्रो मैतेई, ओडिशा सरकार के खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण विभाग के मंत्री  रणेंद्र प्रताप स्वैन, उत्तर प्रदेश सरकार के तकनीकी शिक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, बाट और माप मंत्री  आशीष पटेल और सिक्किम सरकार के शहरी एवं आवास विकास, खाद्य तथा नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता कार्य मंत्री  अरुण कुमार उप्रेती कार्यशाला में उपस्थित थे।

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