राज्यपाल ने एन०यू०एस०आर०एल० राँची,में समारोह के अवसर पर संबोधित किया

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@ रांची झारखंड

मुझे नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एण्ड रिसर्च इन लॉ, राँची द्वारा आयोजित इस तृतीय दीक्षांत सामारोह में आप सभी के बीच आकर अपार खुशी हो रही है।सर्वप्रथम मैं सभी उपाधि ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देता हूँ।साथ ही इस अवसर पर मैं उनके शिक्षकों,अभिभावकों एवं उन सभी सदस्यों को बधाई देता हूँ जिनके कारण उन्होंने ये उपलब्धि हासिल की है।

आज पवित्र दिन है।आज से नवरात्र शुरू हो रहा है जो शक्ति का प्रतीक है। पहले लोगों की सोच थी कि लड़कियों को पढ़ाने से क्या होगा पढ़-लिखकर ससुराल चली जायेगी। आज लड़कियों को लड़कों के मुकाबले ज्यादा गोल्ड मेडल मिले हैं। लड़कियाँ लड़कों से कम नहीं है।

दीक्षांत समारोह एक ऐसा विशेष अवसर होता है, जिसमें विद्यार्थियों द्वारा अपने अध्ययन काल में की गई कड़ी मेहनत को लक्ष्यों की प्राप्ति व सफलता हासिल करने से जुड़ते हुए देखते हैं। इस यात्रा में हमारे विद्यार्थी कई असाधारण क्षणों का अनुभव करते हैं। यह समारोह अन्य अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का भी कार्य करता है।    

मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि वर्ष 2010 में स्थापित इस विधि विश्वविद्यालय में देश भर से छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए आते हैं और यह जानकर हर्ष की अनुभूति हो रही है कि यहाँ के विद्यार्थियों ने विधि के क्षेत्र में इस विश्वविद्यालय एवं झारखंड राज्य को गौरवान्वित किया है।मुझे उम्मीद है कि आनेवाले दिनों में यहाँ के विद्यार्थी समाज व देश में व्याप्त कानूनी समस्याओं के समाधान में अपना अमूल्य योगदान देने का कार्य करेंगे।

विधि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे अधिवक्ताओं को तैयार करना होता है जो व्यावसायिक रूप से कुशल हों एवं गहन ज्ञान रखते हों। वे न केवल अधिवक्ता और न्यायाधीश बनें बल्कि जन-अपेक्षाओं को पूरा करने तथा भारत के संविधान की रक्षा करने के लिए तैयार हों।आज विधिक पेशे में उसी प्रकार प्रतिभावान लोग आकर्षित हो रहे हैं जिस प्रकार पहले चिकित्सा और इंजीनियरिंग के पेशे में होते थे।विधि व्यवसाय को हर उस समाज में नेक पेशा माना जाता है जहां कानून का शासन चलता।

हमारे देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और बहुत से स्वतंत्रता सेनानी अधिवक्ता थे। वास्तव में, यह तर्क दिया जा सकता है कि हमारे नेताओं द्वारा अधिवक्ता के रूप में प्रशिक्षण ने हमारे राष्ट्रीय आंदोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।हमारे स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश हुकूमत से तर्क, दलील तथा नैतिक साहस, जो एक अच्छे अधिवक्ता के महत्त्वपूर्ण हथियार हैं, का प्रयोग करते हुए, शांतिपूर्ण एवं अहिंसक तरीके से स्वतंत्रता, मौलिक अधिकार तथा लोकतंत्र की प्राप्ति का प्रयास किया गया था।

अधिवक्ताओं को इस देश में विशेष दर्जा हासिल है। अधिवक्ताओं का कर्तव्य अन्याय से लड़ना है, चाहे वह कहीं भी हो। अधिवक्ताओं को आपराधिक, निर्धनता, घरेलू हिंसा, जाति-भेद और शोषण के विभिन्न स्वरूपों के विरुद्ध बदलाव का नेतृत्व करना चाहिए।यदि आपको हिंसा, भ्रष्टाचार अथवा अत्याचार का समर्थन करने के लिए कहा जाए तो ना कहने की हिम्मत दिखाएं।

अधिवक्ता के रूप में आपको लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए तथा एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का गंभीरता से निर्वहन करें।जब आप आपके मुवक्किलों के वैयक्तिक मामलों में उनका प्रतिनिधित्व कर रहे हों तब भी आपको सदैव विधि के शासन को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। हमारे नागरिकों के मौलिक अधिकारों के अभिरक्षक बनें।

विद्यार्थियों और अधिवक्ताओं द्वारा विधिक शिक्षा को आजीविका के साधन से कहीं अधिक माना जाना चाहिए। उन्हें निरंतर यह चिंतन करने की जरूरत है कि उनके कार्य जनसाधारण को कैसे प्रभावित करें ,प्यारे विद्यार्थियो, मैं आप सभी को आपकी सफलता हेतु बधाई देता हूँ। आप शीघ्र ही विधिक पेशे के कॉरपोरेट विधि, न्यायिक सेवा आदि जैसी विभिन्न शाखाओं को अपनाएंगे।

आप चाहे कोई भी विधिक शाखा चुनें आपकी सफलता की आधारशिला सभी के मौलिक अधिकारों की रक्षा, नागरिक स्वतंत्रता तथा गरीबों/निर्धनों के अधिकारों की प्राप्ति पर स्थापित होनी चाहिए। नि:स्वार्थ जन-सेवा के उच्च आदर्शों के प्रति स्वयं को समर्पित करें। अन्याय के खिलाफ संघर्ष करें।एक बार पुनः आप सभी के उज्ज्वल भविष्य हेतु हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ।

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