सँकटमोचन हनुमान मन्दिर वाराणसी, उत्तरप्रदेश भाग: ११८,पं० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की कलम से

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भारत के धार्मिक स्थल: सँकटमोचन हनुमान मन्दिर वाराणसी, उत्तरप्रदेश भाग: ११८

आपने पिछले भाग में पढ़ा : भारत के प्रसिद्ध धार्मिकस्थल: शिवशँकर-थिल्लई नटराज मन्दिर, चिदम्बरम, तमिलनाडु! यदि आपसे यह लेख छूट गया हो और आपमें पढ़ने की जिज्ञासा हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाइट धर्म-सहित्य पृष्ठ पर जा कर पढ़ सकते हैं! आज हम आपको बता रहे हैं:

भारत के धार्मिक स्थल: सँकटमोचन हनुमान मन्दिर वाराणसी, उत्तरप्रदेश भाग: ११८

सँकटमोचन हनुमान मन्दिर! इस मन्दिर की रचना बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के सँस्थापक श्री मदन मोहन मालवीय द्वारा सन १९०० ईस्वी में हुई थी! भगवान श्री हनुमान जी के पवित्र मन्दिरों में से एक हैं! यह बनारस यानि वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत में स्थित है!

यह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय कॆ निकट दुर्गा मन्दिर और नवीन विश्वनाथ मन्दिर के मार्ग में स्थित हैं! सँकटमोचन का अर्थ है दु:खों का हरण करने वाला! यहाँ हनुमान जयँती पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है! श्री हनुमान जी की एक विशेष शोभा यात्रा निकाली जाती है जो दुर्गाकुण्ड से लेकर सँकटमोचन मन्दिर तक चलती है! भगवान श्री हनुमान जी को प्रसाद के रूप में शुद्ध घी के बेसन के लड्डू चढ़ाये जाते हैं!

वही लड्डू भोग लगा कर भक्तजनों श्रद्धालुओं व अमीर गरीब सबमें बराबर बंटता है! भगवान श्री हनुमान जी के गले में मोटे मोटे गेंदे एवँ तुलसी जी की मालाएँ सुशोभित रहती हैं! इस मन्दिर की एक अद्भुत विशेषता यह है कि भगवान हनुमान की मूर्ति की स्थापना इस प्रकार हुई है कि वह भगवान श्री रामचँद्र की ओर ही देख रहे होते हैं!प्रभु श्री रामचन्द्र जी के ठीक सीध में सँकटमोचन जी महराज का विग्रह है, जिनकी वे निःस्वार्थ श्रद्धा से आज भी मानो पूजा किया करते हैं! भगवान श्री हनुमान जी की मूर्ति की विशेषता यह भी है कि मूर्ति मिट्टी की बनी है!

सँकटमोचन महराज जी की मूर्ति के हृदय के ठीक सीध में श्री राम लला की मूर्ति विद्यमान है! ऐसा प्रतीत होता है सँकटमोचन महराज जी के हृदय कमल में श्री रामचँद्र माता सीताजी विराजित है! एक विशेष बात जो मन्दिर के प्रांगण में एक अति प्राचीन कूआँ है, वह सँत तुलसीदास जी के समय का कहा जाता है, श्रद्धालु इस कूप का शीतल जल ग्रहण करते हैं! यहाँ विस्तृत क्षेत्र में तुलसी के पौधों को लगाया गया है! साथ ही आस पास पुराने रास्ते पर अनेक वृक्ष लगाने के साथ स्वक्षता का ध्यान रखा गया है!

मान्यतानुसार इस मन्दिर की स्थापना वहीँ हुईं हैं जहाँ महाकवि तुलसीदास जी को पहली बार श्री हनुमान का स्वप्न आया था! सँकटमोचन मन्दिर की स्थापना कवि तुलसीदास जी ने की थी! वे वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अवधी सँस्करण रामचरितमानस के लेखक थे! सँत तुलसी दास जी के अँतिम दिनों में अपने भुजाओं के असहनिय दर्द की अवस्था में सँकटमोचन महराज जी के समक्ष “हनुमान बाहुक” की रचना की थी!

परम्परानुसार मन्दिर में नियमित रूप से आगंतुकों पर भगवान हनुमान जी की विशेष कृपा होती हैं! प्रत्येक मङ्गलवार और शनिवार, हज़ारों की तादाद में श्रद्धालुजन भगवान श्री हनुमान जी को पूजा अर्चना अर्पित करने के लिए पँक्ति में अपनी बारी की प्रतीक्षा में खड़े रहते हैं! वैदिक ज्योतिष के अनुसार भगवान श्री हनुमान जी मनुष्यों को शनि गृह के क्रोध से भी बचाते हैं, जिन लोगों में शनि का स्थान कुण्डलीनुसार ग़लत है उनपर विशेष रूप से ज्योतिषीय उपचार के लिए इस मन्दिर में आते हैं! पौराणिक कथानुसार भगवान श्री हनुमान सूर्य को फल समझ कर निगल गए थे, तत्पश्चात देवी देवताओं ने उनसे बहुत याचना कर सूर्य को बाहर निकालने का आग्रह किया था, कुछ ज्योतिषो का मानना हैं कि हनुमान जी की पूजा करने से मङ्गल एवँ शनि ग्रह के बुरे प्रभाव बेअसर हो जाते हैं!

सँस्कृत में श्री हनुमान जी अराधना:
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।
ॐ हं हनुमते नमः।।

हिन्दी में भावार्थ:

श्री हनुमान जी को प्रणाम है! अतुलनीय शक्ति का निवास, जिनका शरीर सोने के पहाड़ की तरह चमकता है, जो राक्षसों की वनअग्नि है, जो बुद्धिमानों में प्रमुख है, जो भगवान राम के प्रिय भक्त हैं, मैं (अपना नाम लेकर जैसे ज्ञानेश्वर) भगवान श्री हनुमान की पूजा करता हूं! हे पवन-देवता के पुत्र। आप एक नवीन व्याकरण के विद्वान हैं! आपका शरीर सोने के पहाड़ की तरह चमकता है! आप सभी जन अनीस श्रद्धालुओं की अग्रिम पँक्ति में हैं! आप श्री रामचन्द्र जी के सबसे प्रिय भक्त हैं! ॐ हँ हनुमते नमः

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें:

सँकटमोचन हनुमान मन्दिर वाराणसी का निकटतम हवाईअड्डा बनारस का हवाईअड्डा है! जो लगभग २८ किलोमीटर की दूरी पर है यह हवाई अड्डा!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें:

सँकटमोचन हनुमान मन्दिर वाराणसी से निकटतम रेलवे स्टेशन वाराणसी है! ६.५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है काशी का यह सँकटमोचन हनुमान मन्दिर!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें:

सँकटमोचन हनुमान मन्दिर वाराणसी से दिल्ली तक लगभग ८६५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है! राष्ट्रीय राजमार्ग आगरा एक्सप्रेसवे द्वारा आप १४ घण्टे में पहुँच सकते हो!

सँकटमोचन हनुमान मन्दिर की जय हो! जयघोष हो!!

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