साईँ का आँगन मन्दिर गुरुग्राम, हरियाणा भाग: २०८,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल: साईँ का आँगन मन्दिर गुरुग्राम, हरियाणा भाग: २०८

आपने पिछले भाग में पढ़ा भारत के धार्मिक स्थल: शबरी मन्दिर, खरौद नगर, छत्तीसगढ़! यदि आपसे उक्त लेख छूट गया अथवा रह गया हो और आपमें पढ़ने की जिज्ञासा हो तो आप प्रजा टूडे की वेब साईट www. prajatoday.com पर जाकर, धर्म- साहित्य पृष्ठ पर जाकर सकते हैं।

आज हम आपके लिए लाए हैं : भारत के धार्मिक स्थल: साईँ का आँगन मन्दिर गुरुग्राम, हरियाणा भाग: २०८

मेरे साउण्ड रिकॉर्डिस्ट श्री नन्द किशोर “किशोर” जी ने बताया कि पिछले कई वर्षों से यह मन्दिर से जुड़े हुए हैं! जिन्होंने यहाँ साईँ के आँगन में भव्य रिकॉर्डिंग स्टूडियो का निर्माण एवँ इसका प्रबन्धन किया है!

साईँ लाडली टीम की सदस्याएँ रोहिणी के साईँ बाबा मन्दिर से जुड़ी हुई है! इन बहनों में से एक गुरुग्राम में स्थापित हो गईं!

मेरी सगी बड़ी भान्जी मीनू कथूरिया द्वारका निवासी हैं! आजकल साईँ-चरित्र प्रतिदिन पढ़ा जाता है! मंगलवार को मेरी पुत्री का नम्बर था, सब साईँ लाड़ली टीम की सदस्याएँ साईँ को परमेश्वर मान बडे ही मनोयोग से साईँ कीर्तन करती हैं वो भी निःशुल्क!

“साईं का आंगन मन्दिर”परमेश्वर :

साईं बाबा मन्दिर के बारे में मन्दिर ”साईं का आँगन” की स्थापना ६ अक्टूबर २००० को चैरिटी ट्रस्ट के समर्पण और दृढ़ सँकल्प द्वारा की गई थी!साईँ भक्त सदस्यों ने एक भरोसेमंद और चैरिटेबल ट्रस्ट नामक एक ट्रस्ट का गठन किया, भक्तों और आगंतुकों को मन्दिर के भीतर परम शाँति मिलती है!

साईँ के आँगन मन्दिर का इतिहास :

यह मन्दिर ‘साईं बाबा’ या ‘शिरडी वाले साईँ बाबा’ को समर्पित है; तो मन्दिर परिसर के अँदर ‘साईं बाबा’ की एक मनमोहक सुन्दर मूर्ति स्थापित है१ ‘साईं का आँगन’ ‘शिरडी’ (नासिक) की प्रतिकृति है और इसे उत्तर भारत के ‘शिरडी’ के नाम से भी जाना जाता है!

साईँ भक्त एक ट्रस्टी ने स्थापना के समय ही ‘नीम’ का पेड़ लगाया जैसे शिरड़ी में है और पेड़ के आस-पास के क्षेत्र को ‘गुरुस्थान’ कहा जाता है! इस जगह की शाँति इतनी स्वाभाविक है और बाबा के बहुत क़रीब महसूस कराती है साईँ बाबा जी की एक मूर्ति ‘गुरुस्थान’ पर एक उष्णकटि बंधीय रोस्ट्रम पर रखी है, जहाँ भक्तों ने धरती के नाम और धूप की छड़ ली! वे ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं के ‘जाप / मन्त्र’ भी जप करते हैं जो पूरे जटिल (मन्दिर) को दिव्य और शाँत विस्मयकारी दिव्य और साईँ की ओर आकर्षित करता हुआ बनाता है!

पूजा समय :
प्रातः काल / सांय
मन्दिर हर दिन सुबह ४बजे से शाम ९.३० बजे

सुबह ७:00 से ९:३० बजे (गुरुवार को) ८:०० बजे सुबह ककाड़ आरती
शाम 6:00 बजे धूप आरती
रात में 9.15 बजे शेज़ आरती
होती है!

किशोर जी ने बताया कि यहाँ समय समय पर भारतीय फ़िल्म जगत के जानेमाने पार्श्वगायक यहाँ साईँ-भजन प्रतुत कर चुके हैं! किशोर जी ने बताया कि आप “साईँ का आँगन” में प्रवेश करते ही ऐसा महसूस करोगे जैसे कि आप शिरड़ी वाले साईँ बाबा के मन्दिर में ही हो! किशोर जी आगे बताया कि वैष्णों देवी मन्दिर की तरह ही इस मन्दिर का विस्तार किया जा रहा है!

साईँ महिमा :

“श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय”

दोहा:

आदि आधार न पा कर नाथ के, आदि नाथ कहे पाताल, नाथ नाथ जग कहे,
जगन नाथ कहे भूलोक, अनंत ना तेरा जान के, अनंत नाथ कहे स्वर्गलोक,
ऐसी परम शक्ति को, पुराने करे ब्रह्म विष्णु महेश, नाथ नाथों के एक नाथ हैं, ऐसे कहे नवनाथ ऐसे नाथ को जग कहे जय जय साईनाथ!
श्री सचदानन्द सद्गुरु साईं नाथ महाराज की जय!

महिमा:

१. श्री साईं बाबा साईं बाबा, तुमि हो दाता एक विधाता, तुमि इसा इस्सैयों के, नाम पलटकर बन गए साईं, हिंदुओं के तुम हो श्रीराम साईं राम कह सभी पुकारें,
मस्जिद में तुझे को अल्लाह पुकारें, नानक घुंजे हर गुरुद्वारा,ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

२. कोई ना जाने तेरा बचपन, साल पूरे सोलह तक, जग उद्धर के लिए प्राकत हो गए गणव श्रीदी में, दत्ता जैसे किए गुरु अनेक, कबीर गोपाल और जावर, ललन पालन किए थे गोपाल, सत्य ए दीक्षा पूरी दी, दीक्षा शिक्षा पाकर पूरी, साईं बाबा बन गए साईं श्री राम बन गए साईं इसु बन गए, साईं अल्लाह बान गए साईं नानक बन गए, साई जगत में छा गए, ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

३. विरक्ष नीम था तेरा आश्रम, लेंदी जंगल तेरा बगीचा, पोशक तेरी फटी कफ्नी सर को साजे एक साफा, करों में तेरे छडी व क्रमंडल, चारणों में तेरे जिरिन पादुका, रूप तेरा है मनोहर वाणी जैसी मुरली मनोहर, नयन है तेरे प्रेम कहो भरे, दिल है तेरा दया कहो भरा, पत्थर है तेरा सिन्हासन, चित्रा गुनी तेरा आसन, जीर्न गुनी तेरा बिस्तर, ईत ही तेरा सिरहाना, ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

४. चांद बही पाटिल आए बालक साईं बाबा के पास, खोई गौरी दिन कर बाबा चिमटे कहते हैं चिलम जला दिया, मालसापति को ज्ञानी बना कर नाना को दिया गीता उपदेश, बजा बाई ने उड़ान कर ली दिन कर खाना तुझ को निरंतर, दासों के दास है दास गनू, बन गए तेरे कीर्तनकर, अब्दुल्ला ने की बड़ी सेवा तन मन दे कर तुझ को अपना! ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

५. कदम नीम को मीठा कर के, सीधी पहेली कायम की, तेल न पा कर पानी हाय कहो ज्योति उत्तम जलेई, नीम की पति दूनी कहो उधी, सब को हरदम मिलते थे, शक्ति में ऐसी होती, दुख सारा हर लेते थे, भिक्षा ला कर पांच घरो कहते हैं उस सब को देते थे, ऐसे उसे देते रहते थे जो खतम न होते थे, तेरे साथी दीन दुखी जन अंधाय लंगडे शूद्र वा रोगी, तुझे था उन के सच साथी मात पिता वाह गुरु परमात्मा। ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

६. कुष्ठ रोगी बगोजी शिंदे, आई साईं बाबा के पास, जीवन भर निज सेवा में रख कर, उनके रोग को हरान लिया, आमलिपित रोग वाह हैजा, बडे कहो ही पीड़ित था बूटी, धूनी कहो उधी दिनकर बाबा उनको रोग कहो मुक्त किया, आतिसार की बेमारी तुम काका महाजनी को, स्वस्थ किए उनको बाबा मूंगफली खिलाड़ी कर, बड़े ही पीड़ित थे श्यामा, बावसीर रोग कहते हैं, दया के सागर साईं ने, हरण लिया बावसीर को, चौदह वरशोन के उधार रोग कहते हैं थाय बदे पीड़ित दत्तोपंत, हरदा के ऐसे दुखी को देखो उनको रोग कहो मुक्त किया, भीमाजी पाटिल महानुभाव तुम नारायण गांव के शाय रोगी, ऐसे भयंकर रोग को दूर किया जगीश्वर ने! ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

७. आजानु बहू बन कर आए, विश्व को आशीष देने को, तीनो लोक ने आश मिले ऐसे अजानु बहू कहते हैं, पूरे विश्व की रक्षा करने, रात दिन बाबा जगते था अपनी जरूरत वह सब कुछ त्यागकर, बहुत ही सेवा करते थे, शिरडी क्षेत्र में रह कर बाबा विश्व की महान सेवा की उन से बुरा कर महान त्यागी कोई न विश्व में जन्म लिया, द्वारकामाई मस्जिद तुम, गुरुकुल जैसा ज्ञान आश्रम ज्ञानियों का मेला था हरदम सैश्वर के पास, देश विदेश कहते हैं आकार लोग ज्ञान वह भागती पाते थे, पूर्णा ज्ञानी साईश्वर सब को सब कुछ देते थे भागवत गीता को संजय डिप्टी कलेक्टर नाना को, विष्णु सहिस्टनाम को समाज काका साहिब दीक्षित ने, नाथ बघवत को पदते साईश्वर हेमंडपंत, दीक्षित जोग वाह भावदेव ने ज्ञानेश्वरी का ज्ञान लिया, गुरु चरित्र का पाठ किया श्री साथे कहें साईं ने, उपनिषदों का अर्थ बताया निज प्रेमियों को बाबा ने, कुरान शरीफ के तत्व को समाज अब्दुल्ला ने साई कहते हैं, साईं प्रेमी मौलवी फातिहा को पदते थे! ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने१

८. लटक कर घंटा मस्जिद में, मस्जिद मंदिर एक किए, नमाज़ पूजा बन गए एक, मुस्लिम हिंदू हो गए एक, ये है अग्नि पारसी की ये है द्वार गुरुद्वारा, ऐसे साईं बाबा कह कर विभीन जाति को एक किए! ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

९. विश्व रूप का दर्शन दिया, निझ बकतों को साई ने, पूर्ण खंडोबा था साईं, म्हालसापति कहते थे, रामदासियों ने देखा, शिरदिश्वर मैं राम को, पंदारनाथ का दर्शन दिया, दास गनु महाराज को, सृष्टि पालक विष्णु को देखा नियादिश रेगे ने, कैलाश पति शिव को देखा, सैश्वर मैं मेघा ने, दशावतारों ने दर्शन दिए, द्वारकामाई मस्जिद मैं, ऐसे दर्शन नाथ मैं पकार, नाथ को विश्व ने मान लिया। ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

१०. आलप आयु ही मैं बाबा, स्वेचा मारन पेश की, आधी शंकर जैसे बाबा, देह अपना त्याग दिए, धीरज विश्वास प्रेम से, सबने हम की रक्षा की, थिक तीसरे दिन के बाद, जागृत हो गए साई नाथ, जागृत हो कर जागृति कर दी, हर मानव को अपनी और। ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

११. म्हालसा पति तात्या पाटिल, बड़े ही तेरे प्रेमी थे, सोते जगते चलते फिरते, साथ हरदम रहते थे, लक्ष्मीबाई महालक्ष्मी, नित्य सेवा करती थी, देकर उन्को रुपे नौ, साड़ी बख्ती दे दिए, विष से पीरित श्यामा आए, ऐसे साईं बाबा के पास, विष को तूरंत दूर किया, भोले शंकर साई ने, प्राण बचाई मैंदक ने, अपने शत्रु के मुख से, था वह हुकुम बाबा का, ताल ना कोई शक था। ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

१२. एचएस दीक्षित एमबी रेघे, बड़े ही शिक्षित ज्ञानी थे, कुछ ना पकार देश विदेश मैं पास बाबा के आए, ऐसी हस्ती शक्ति देखी, अर्पण अपने को कर दी, महरोगी बन कर आए, काशी नाथ उपासनी, बाबा निरोग कर दिए, उपासनी, महाराज बन गए, प्रेमी बेबित हो उठे, जब हैजा आया श्रदी मैं, दिनदयालु साईं ने दूर किया हमें है को। ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

१३. नागपुर के बाद ही धनी गोपालराव बूटी थे, कृष्ण मुरलीधर के लिए बूटी वादा बनायी, ये है स्थान सोने का मेरा ऐसा बाबा कहते थे जो भी कहते हैं साईं बाबा हरदम वो ही होता था उनस साव अथारा के दशहरा के दशमी में, मंगलवार के दिन बाबा, जब बसी साल के लगते थे बैग दोपहर आधे बजे, शिरडी की मस्जिद में, बाबा सचमुच सो गए दुनिया के लिए सो गए, पर बाबा सर्वत्र छा गया, हरदम के लिए छा गया, मस्जिद में वे छा गया, शिरडी में वय छा गया, बाबा सब में छा गया, सब के हृदय में छा गया! ऐसी बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

१४. अच्छे हुए जगते साईं, अब भी बाबा जाते हैं, सभी देखें पूरे विश्व में अब भी बाबा जाते हैं, साईं बाबा हैं सत्य आत्मा, पूर्ण आत्मा परमात्मा साईं बाबा कहते भी थे योही, मैं हूं आत्मा परमात्मा, ऐसे नाथ की देह को पाने में हो गए बड़े मतबेड, हिंदू कहे हिंदू थे बाबा मुस्लिम कहा थाय बदे पीर, इस का निर्णय हो नहीं पाया, नाथ की देह को पा गए हिंदू, नाथ परे था आईआईएस जाते बेध कहते हैं जैसे परमाता! ऐसे बाबा जग में आए जिन की महिमा कोई ना जाने!

१५. हिंदू मुस्लिम सिख इसाई ना, अधबुत समादी बनी, एस समाधि में भेद ना कोई जात पात वाह ऊंच नीच का, श्याम सुंदर तेरा घोड़ा बड़ा हाय तेरा प्रेमी था, श्रृद्धा भक्ति वह प्रेम कहो तुझ को प्रणाम करता था, शिरडी वसिओं ने देखा समाधिकाल के बाद भी, आश्रय बहा कर समादि को प्रणाम करता था, सत्य है नाथ का कथा में हूं जागृति समाधि पर, इस की गवाह देते हैं साई अपनी विशाल मूर्ति कहते हैं, ऐसी मूर्ति बनायी तालीम, बंबाई के मूर्तिकार, जिस की स्थापना की थी उनी साओ चोवन में अहमदाबाद के बड़े ही प्रेमी, साईं शरणानंद ने, बाबा है जागृत जाध चेतन में, पाई तो उन को सफल है जीवन, नाथ को पा कर सब कुछ पाने, उन को नावपा कर कुछ भी न पाई, साई सेवक गुरु नारायण कहे> अनंत महिमा की ये छोटी महिमा, जो भी पढे नित्य निरंतर, सब कुछ पाने वाले साई कृपा कहते हैं, साई कृपा कहते हैं साई कृपा कहते हैं, सब कुछ पाने वाले साई कृपा कहते हैं! साई कृपा कहो साई कृपा कहते हैं (५ बार दोहराएं)। सब कुछ पाई साईँ कृपा कहते हैं!!

श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साइँनाथ महाराज की जय!

वायु मार्ग से कैसे पहुँचे

हवाई मार्ग से जो लोग कम समय में यात्रा करना चाहते हैं उनके लिए हवाई यात्रा एक बढ़िया विकल्प है! हवाईजहाज़ से निकटतम हवाई अड्डा: इन्दिरगाँधी हवाईअड्डा दिल्ली है!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचे

ट्रेन से गुरुग्राम पहुंचना देश के अन्य प्रमुख शहरों से लिए कई नियमित ट्रेन हैं! निकटतम रेलवे स्टेशन गुरुग्राम से यह दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचे

दिल्ली से आप मन्दिर आने के लिए बस अथवा अपनी कार से आते हैं तो आप राष्ट्रीय राजमार्ग NH- ४८ से १घण्टे और ६ मिन्ट्स में, ४१.३ किलोमीटर की दूरी तय करके पहुँच जाओगे साईँ का आँगन का मन्दिर!

शिरड़ीवाले साईँराम की जय हो! जयघोष हो!

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