साईँ मन्दिर दीन दयाल नगर मुरादाबाद, उत्तरप्रदेश भाग : ३०२ ,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल: साईँ मन्दिर, दीन दयाल नगर, मुरादाबाद, उत्तरप्रदेश भाग :३०२

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिक स्थल: भारत के धार्मिक स्थल: बल्लालेश्वर सिद्धिविनायक श्री गणेश मन्दिर, पनवेल महाराष्ट्र यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजा टुडे के अति विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं!

 भारत के धार्मिक स्थल: साईँ मन्दिर, दीन दयाल नगर, मुरादाबाद, उत्तरप्रदेश भाग : ३०२

आज हम आपको लिए चलते हैं श्री साईं मन्दिर मुरादाबाद श्री साईं मन्दिर मुरादाबाद में श्री साईं करुणा के धाम श्री साईँ के आस-पास चरण II क्षेत्र दीन दयाल नगर में स्थित है।

मन्दिर सभी धर्मों के अनुयायियों का स्वागत करता है। मन्दिर का मुख्य देवता श्री साईं बाबा है। लोकगीत के अनुसार, उन्हें अलौकिक शक्तियों और उपचार क्षमता कहा जाता था; कहा जाता है कि शिरडी साईं बाबा ने भगवान की एकता की घोषणा की और साबित कर दिया है या जिसे ‘सबका मलिक एक’ भी कहा जाता है।

यह मन्दिर साईं भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है। मन्दिर का वास्तुकला बहुत अच्छा है। यह बहुत आकर्षक लग रहा है। श्री साईँ मन्दिर का वातावरण बहुत ही अति शाँतिपूर्ण है। यहां आने के बाद कोई भी शक़्स आराम महसूस कर सकता है।

यह साईं बाबा का एक महान मन्दिर है। वहां कोई भी व्यक्ति आराम महसूस कर सकता है। कोई भी प्रतिबंध के बिना इस मंदिर का आनंद ले सकता है। परिवार और दोस्तों सँग जब जब इस मन्दिर का दौरा करोगे तो मैं यहकह सकता हूं कि मुरादाबाद में जाने के लिए यह एक बेहतरीन पूजा स्थल है। भक्तगण प्रति गुरुवार को यहाँ आकर लँगर करते हैं, साईँ कहते हैं भूखे को खाना, प्यासे को पानी पिलाने से साईँ तृप्त होकर तृप्ति का वर देते हैं।

साईं मंदिर मुरादाबाद:

साईं मंदिर मुरादाबाद में श्री साईं करुणा धाम के आस-पास चरण II क्षेत्र डीन दयाल नगर में स्थित है। मंदिर सभी धर्मों के अनुयायियों का स्वागत करता है। मंदिर का मुख्य देवता साईं बाबा है। लोकगीत के अनुसार, उन्हें अलौकिक शक्तियों और उपचार क्षमता कहा जाता था; कहा जाता है कि शिरडी साईं बाबा ने भगवान की एकता की घोषणा की और साबित कर दिया है या जिसे ‘सबका मलिक एक’ भी कहा जाता है।

यह मंदिर साईं भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है। मंदिर का वास्तुकला बहुत अच्छा है। यह बहुत आकर्षक लग रहा है। मंदिर का वातावरण बहुत शांतिपूर्ण है। यहां आने के बाद कोई भी आराम महसूस कर सकता है। यह साईं बाबा का एक महान मंदिर है। वहां कोई भी व्यक्ति आराम महसूस कर सकता है। कोई भी प्रतिबंध के बिना इस मंदिर का आनंद ले सकता है। जिसने एक बार इस मन्दिर का दौरा किया हो मैं कह सकता हूं कि मुरादाबाद में जाने के लिए यह एक बेहतरीन जगह है।

साईँ सच्चरित्र अध्याय:-३ का शेष भाग :

रोहिला की कथा:

यह कथा श्री साई बाबा के समस्त प्राणियों पर समान प्रेम की सूचक है । एक समय रोहिला जाति का एक मनुष्य शिरडी आया । वह ऊँचा-पूरा, सुदृढ़ एवं सुगठित शरीर का था । बाबा के प्रेम से मुग्ध होकर वह शिरडी में ही रहने लगा । वह आठों प्रहर अपनी उच्च और कर्कश ध्वनि में कुरान शरीफ के कलमे पढ़ता और अल्लाहो अकबर के नारे लगाता था ।

शिरडी के अधिकांश लोग खेतों में दिन भर काम करने के पश्चात जब रात्रि में घर लौटते तो रोहिला की कर्कश पुकारें उनका स्वागत करती है । इस कारण उन्हें रात्रि में विश्राम न मिलता था, जिससे वे अधिक कष्ट असहनीय हो गया, तब उन्होंने बाबा के समीप जाकर रोहिला को मना कर इस उत्पात को रोकने की प्रार्थना की । बाबा ने उन लोगों की इस प्रार्थना पर ध्यान न दिया ।

इसके विपरीत गाँववालों को आड़े हाथों लेते हुये बोले कि वे अपने कार्य पर ही ध्यान दें और रोहिला की ओर ध्यान न दें । बाबा ने उनसे कहा कि रोहिला की पत्नी बुरे स्वभाव की है और वह रोहिला को तथा मुझे अधिक कष्ट पहुंचाती है, परंतु वह उसके कलमों के समक्ष उपस्थित होने का साहस करने में असमर्थ है और इसी कारण वह शांति और सुख में है । यथार्थ में रोहिला की कोई पत्नी न थी । बाबा के संकेत केवल कुविचारों की ओर था । अन्य विषयों की अपेक्षा बाबा प्रार्थना और ईश-आराधना को महत्तव देते थे । अतः उन्होंने रोहिला के पक्ष का समर्थन कर, ग्रामवासियों को शांतिपूर्वक थोड़े समय तक उत्पात सहन करने का परामर्श दिया ।

साईँ बाबा के मधुर अमृतोपदेश :

एक दिन दोपहर की आरती के पश्चात भक्तगण अपने घरों को लौट रहे थे, तब बाबा ने निम्नलिखित अति सुन्दर उपदेश दिया:

तुम चाहे कही भी रहो, जो इच्छा हो, सो करो, परंतु यह सदैव स्मरण रखो कि जो कुछ तुम करते हो, वह सब मुझे ज्ञात है । मैं ही समस्त प्राणियों का प्रभु और घट-घट में व्याप्त हूँ । मेरे ही उदर में समस्त जड़ व चेतन प्राणी समाये हुए है । मैं ही समस्त ब्राहांड़ का नियंत्रणकर्ता व संचालक हूँ । मैं ही उत्पत्ति, व संहारकर्ता हूँ । मेरी भक्ति करने वालों को कोई हानि नहीं पहुँचा सकता । मेरे ध्यान की उपेक्षा करने वाला, माया के पाश में फँस जाता है । समस्त जन्तु, चींटियाँ तथा दृश्यमान, परिवर्तनमान और स्थायी विश्व मेरे ही स्वरुप है ।

इस सुन्दर तथा अमूल्य उपदेश को श्रवण कर मैंने तुरन्त यह दृढ़ निश्चय कर लिया कि अब भविष्य में अपने गुरु के अतिरिक्त अन्य किसी मानव की सेवा न करुँगा । तुझे नौकरी मिल जायेगी – बाबा के इन वचनों का विचार मेरे मस्तिष्क में बारंबार चक्कर काटने लगा । मुझे विचार आने लगा, क्या सचमुच ऐसा घटित होगा । भविष्य की घटनाओं से स्पष्ट है कि बाबा के वचन सत्य निकले और मुझे अल्पकाल के लिये नौकरी मिल गई । इसके पश्चात् मैं स्वतंत्र होकर एकचित्त से जीवनपर्यन्त बाबा की ही सेवा करता रहा ।

इस अध्याय को समाप्त करने से पूर्व मेरी पाठकों से विनम्र प्राथर्ना है कि वे समस्त बाधाएँ – जैसे आलस्य, निद्रा, मन की चंचलता व इन्द्रिय-आसक्ति दूर कर और एकचित्त हो अपना ध्यान बाबा की लीलाओं की ओर वें और स्वाभाविक प्रेम निर्माण कर भक्ति-रहस्य को जाने तथा अन्य साधनाओं में व्यर्थ श्रमित न हो । उन्हें केवन एक ही सुगम उपाय का पालन करना चाहिये और वह है श्री साईलीलाओं का श्रवण । इससे उनका अज्ञान नष्ट होकर मोक्ष का दृार खुल जायेगा । जिसप्रकार अनेक स्थानों में भ्रमण करता हुआ भी लोभी पुरुष अपने गड़े हुये धन के लिये सतत चिन्तित रहता है, उसी प्रकार श्री साई को अपने हृदय में धारण करो । अगले अध्याय में श्री साई बाबा के शिरडी आगमन का वर्णन होगा ।

।। श्री सद्रगुरु साईनाथार्पणमस्तु । शुभं भवतु ।

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें :

बाय एयर, निकटतम कामकाजी घरेलू हवाई अड्डा पंत नगर शहर है, ८६ किलोमीटर दूर है, दूसरा हवाई अड्डा देहरादून हवाई अड्डा है। मुरादाबाद देहरादून हवाई अड्डे (डीईडी), देहरादून, उत्तराखंड से १७५ किलोमीटर दूर है। आईजीआई दिल्ली १५४ किलोमीटर दूर है। मुंडापंदे में मोरादाबाद हवाई अड्डे घरेलू यातायात के लिए अभी तक खुला नहीं है।

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

ट्रेन द्वारा मुरादाबाद रेलवे स्टेशन से ५ किलोमीटर दूर है। रेलवेस्टेशन से साईँ मन्दिर आने के लिए आप साइकिल रिक्शा, ऑटो से या पैदल भी पहुँच सकते हो साईँ मन्दिर!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें :

आप ISBT से बस द्वारा अथवा अपनी कार से NH: ९ से पँहुँच सकते है साईँ मन्दिर, मुरादाबाद जाना पड़ेगा। इस मन्दिर की ,निकटवर्ती सड़कें यहाँ की सड़कें बेहतर है! मुरादाबाद बस स्थानक से पाँच किलोमीटर दूर है! दिल्ली से उत्तरप्रदेश के साई मन्दिर में ३ घँटों ५१ मिनट्स में पहुंच सकते हैं। दिल्ली से कुल दूरी १९२.४ किलोमीटर दूर है।

साईँ बाबा की जय हो। जयघोष होII

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