शक्तिपीठ चामुण्डेश्वरी माता मैसूर, कर्नाटक  भाग : १४२,पँ० ज्ञानेश्वर हँस देव की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल: शक्तिपीठ चामुण्डेश्वरी माता मैसूर, कर्नाटक  भाग :१४२

आपने पिछले भाग में पढ़ा भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल : शक्तिपीठ अम्बाजी मन्दिर, बनासकांठा, गुजरात! यदि यह लेख आपसे छूट गया या रह गया हो तो आप प्रजाटूडे की वेबसाईट पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर, पढ़ सकते हैं!

भारत के धार्मिक स्थल: शक्तिपीठ चामुण्डेश्वरी माता मैसूर, कर्नाटक  भाग :१४२

देवी भगवती के इस शक्तिपीठ में सदैव विराजमान रहते हैं काल भैरव, वो स्वयँ ही रक्षा करते हैं उक्त मन्दिर की! देवी का यह मन्दिर कर्नाटक राज्य में मैसूर शहर से १३ किलोमीटर दूर चामुण्डी पहाड़ियों पर स्थित है! यह मन्दिर माँ दुर्गा के ही एक स्वरुप ‘माँ चामुण्डेश्वरी’ को समर्पित है! यह स्थान हिन्दुओं का प्रमुख धार्मिक स्थान है और चामुण्डेश्वरी देवी को दुर्गा जी का ही रूप माना जाता है! चामुण्डी पहाड़ी पर स्थित यह मन्दिर दुर्गा जी द्वारा राक्षस महिषासुर के वध का प्रतीक माना जाता है! कहा जाता है की देवी ने महिषासुर का इसी जगह वध किया था वहीँ आज यह चामुण्डेश्वरी मन्दिर स्थित है! चामुण्डी पहाड़ी पर महिषासुर की एक ऊँची मूर्ति है और उसके बाद मन्दिर है!

चामुण्डेश्वरी मन्दिर को ५१ महा शक्तिपीठों में से एक माना जाता है! क्योंकि मान्यताओं के अनुसार यहाँ देवी सती के बाल गिरे थे! पौराणिक काल में यह क्षेत्र ‘क्रौंच पुरी’ कहलाता था, इसी कारण दक्षिण भारत में इस मन्दिर को ‘क्रौंचा पीठम’ के नाम से भी जाना जाता है! मान्यतानुसार शक्तिपीठ की रक्षा के लिए कालभैरव भी यहाँ सदैव विराजमान रहते हैं!

चामुंडेश्वरी मंदिर से जुड़ी कथा :

पौराणिक कथानुसार महिषासुर को ब्रह्माजी का वरदान प्राप्त था की वह केवल एक स्त्री द्वारा ही मारा जाएगा! इसके अलावा अन्य कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता था! वर प्राप्त करने के बाद महिषासुर ने देवताओं और ऋषियों पर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिय! इससे दुखी देवताओं ने महिषासुर से छुटकारा पाने के लिए महाशक्ति भगवती की आराधना की तो देवी भगवती ने देवताओं की प्रार्थना से प्रसन्न होकर उन्हें महिषासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया! इसके बाद देवी भगवती और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ! देवी ने सभी असुरी सेना का वध कर अन्त में महिषासुर का मस्तक काट दिया!

चामुण्डेश्वरी मन्दिर का महत्त्व :

द्रविड़ वास्तुकला का एक अच्छा नमूना है यह मंदिर! मुख्य गर्भगृह में स्थापित देवी की प्रतिमा शुद्ध सोने की बनी हुई है! मन्दिर की इमारत सात मन्ज़िला है जिसकी कुल ऊंचाई ४० मीटर है! मुख्य मन्दिर के पीछे महाबलेश्वर को समर्पित एक छोटा सा शिवशँकर देवाधिदेव का मन्दिर भी है जो १००० वर्षोँ से भी अधिक पुराना है! पहाड़ की चोटी से मैसूर का मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता है! यहाँ के लोगों का मानना है कि मैसूर शहर के लोगों पर माँ चामुण्डा की खास कृपा है! उनके आशीर्वाद से ही मैसूर शहर हर सदी में तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है! मैसूर के दशहरे के मौके पर निकाली जाने वाली झाँकी में माँ चामुण्डा की प्रतिकृति को ही राजा की जगह पालकी पर आसीन किया जाता है!

दक्षिण के अन्य मन्दिरों की तरह ही चामुण्डेश्वरी मन्दिर में समान्य दर्शन के अलावा विशेष दर्शन का भी कूपन मिलता है! चामुंडा देवी के दर्शन के लिए प्रतिदिन देश भर से हजारों श्रद्धालु आते हैं। वैसे आजकल नवरात्र के समय मन्दिर में ज्यादा भीड़ होती है! चामुण्डा पहाड़ी पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धर्मशाला में आवास की सुविधा उपलब्ध है! हाँ अन्न क्षेत्र का भी सँचालन होता है जहाँ आप भोजन ग्रहण कर सकते है!

माँ चामुण्डेश्वरी स्तुति :

शिव यानास्थिथे देवी, प्रेथा-सनगथे शिवे
भीमाक्षी भीषणे देवी, सर्व-भूत भयंकारी
कराले विकाराले चा महाकाले करालिनी
कालीकराली विक्रांत कालरात्रिनमोस्तुथे
विकारालमुखीदेवी ज्वालामुखीनमोस्तुथे
त सर्वसत्व हिते देवी, सर्व देवी नमोस्तुथे
इति: स्तुत तदः देवी, रुद्रेना पर -मेस्तिना
थुथोशा परमा देवी, वाक्यां चेदामुवावचा
हवरम वृष्णीदेवेशायथावेमानसीवाक्त्रथे
स्तोत्रनेन येदेवी, तवंस्तुवंतीचेम वरकन्यां
वरदाय पुत्रपौत्र पशुमानसमृद्धिमुपगचति
यशकेमश्रुनुयदभक्तित्रिशक्त्यस्तुसमुद्भवँ
सर्वपापविनिमुक्ताःपदमगच्छत्यानामयम

विजय हो चामुंडा देवी, भू:ताप हारिणी,
सर्व व्यापक देवी, कालरात्रि, विश्व मूर्ति
स्वरूप शुभता का, अवतार हे पवित्रता
का सार, विरु पक्षी, त्रिनेत्र, आतंक का
अवतार, आर्क-प्रकार की शुभता, ज्ञान
का स्रोत महान-भ्रम आपमन केसमान
तेज, स्वभाव से विजयी और व्यवहार
से निडर, व्यवहार से अजीब, संगीत व
नृत्य के प्रेमी विकराल महा-काली पाप
नाशक, कालिका, ”पाशा” (रस्सी) के
खिलाड़ी, हाथों से क्रूरता, उग्रता और
दहशत के प्रवर्तक; चेहरे से अत्यधिक
प्रकाशित हैं महाबलवती शवोंके ऊपर
विराजमान, प्रेथा और पिशाचाओं की
छवियां, डरावनी -क्रूर -आँखें, भयंकर,
विकाराल काला – स्वरूप, वीरता और
क्रूरता का आदर्श, धधकते चेहरे वाला,
मेरा अभिवादन,सार्वभौमिक हितैषी हैं
रुद्र ने उपरोक्त स्तुति या स्तुति के साथ
चामुण्डी देवी की सराहना की :उन्होंने
कहा जो कोई भी इसे पढ़ता या सुनता
है, उस पर ‘देवी’ की भी कृपा होती है!

वराह पुराण का सार :

ईमानदारी और मानसिक आवेदन के
साथ में त्रिशक्तियों की प्रार्थना करते हैं
उन्हें उत्कृष्ट स्वास्थ्य सँतान एवँ समृद्धि
का वरदान प्राप्त होगा! अष्टमी, नवमी
व चतुर्दशी को उपवास और पूजा द्वारा
त्रि:शक्ति-व्रत का पालन करने से खोए
हुए राज्यों को पुनः प्राप्त करने, राज्यों
को सुरक्षित करनेमें मदद मिलेगी और
इसी तरह जीवन के महान अवसरों को
पुनः प्राप्त करनेया प्राप्त करने में मदद
मिलेगी!किसी भी घर में त्रिशक्ति स्तोत्र
को सुरक्षित रखने से आग, चोरी, नाग
अथवा ऐसी किसी भी अप्रियघटना का
कोई खतरा नहीं होगा! स्तोत्रों को पढ़ने
से निश्चितरूप से पशु, पुत्र, धन, स्त्री व
आभूषण, घोड़े, हाथी, नौकर व वाहन
सुरक्षित रहेंगे! यह तो तो निश्चित ही है!
पशुं, पुत्रँ, धनम, धान्यम, वरा -स्त्रियाह,
रत्नाश्वागजायानास्वाशुभवन्थुतायस्येदं
थिस्थे गेहे थस्यदं जय-थे ध्रुवम मवेशी,
पुत्र, धन, सुन्दर- स्त्री, आभूषण, घोड़े,
हाथी,नौकर वाहन घरों में – निश्चित है!

कैसे पहुँचे माँ चामुण्डेश्वरी देवी के मन्दिर :

हवाई मार्ग से मन्दिर कैसे पहुँचें :

आप कर्नाटक के मैसूर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कैब द्वारा पहुँच जाओगे १ घण्टे २० मिन्ट्स में पहुँच जाओगे चामुण्डेश्वरी माता के मन्दिर !

रेल मार्ग से मन्दिर कैसे पहुँचें :

निकटतम स्टेशन मैसूर रेलवे स्टेशन है! से आप एक घण्टा चौबीस मिन्ट्स में कैब से ही आसानी से पहुँच जाओगे चामुण्डेश्वरी माता के मन्दिर!!

सड़क मार्ग से माता रानी के मन्दिर कैसे पहुँचें :

दिल्ली से आप अपनी कार से अथवा बस से ४० घण्टे ३० मिन्ट्स की यात्रा करके २,३५०.४ किलोमीटर की दूरी तय करके राष्ट्रीय राजमार्ग NH-४४ से पहुँच जाओगे चामुण्डेश्वरी माता के मन्दिर!

चामुण्डेश्वरी माता की जय हो! जयघोष हो!!

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