शक्तिपीठ शाकम्भरी देवी माता मन्दिर सहारनपुर, उत्तरप्रदेश भाग :१३८,पँ० ज्ञानेश्वर हँस देव की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल: शक्तिपीठ शाकम्भरी देवी माता मन्दिर सहारनपुर, उत्तरप्रदेश भाग :१३८

आपने पिछले भाग में पढ़ा : भारत के प्रसिद्ध धार्मिकस्थल: श्री कनकदुर्गा मन्दिर,विजयवाड़ा, आंध्रप्रदेश ! यदि आपसे यह लेख छूट गया हो और आपमें पढ़ने की जिज्ञासा हो तो आप प्रजा टुडे की की धर्म-सहित्य पृष्ठ पर जा कर उक्त लेख पढ़ सकते हैं!

भारत के धार्मिक स्थल: शक्तिपीठ शाकम्भरी देवी माता मन्दिर सहारनपुर, उत्तरप्रदेश भाग :१३८

शक्तिपीठ शाकम्भरी देवी माता का सहारनपुर में सजा है दरबार! माँ शाकम्भरी देवी के दर्शनार्थ आस पास के ही नहीँ, देश विदेश से आते हैं माँ के भक्त अपार! माता शाकम्भरी देवी के श्रद्धालुगण! माँ के इस दरबार से मन माँगी मुरादें पा जाते है व भक्तगण बड़ी श्रद्धा और भक्ति से दूर दूराज़ से आते हैं इस शक्तिपीठ में!

मान्यतानुसार माता शाकम्भरी देवी के दर्शन करने से आगन्तुक के सभी कष्ट दूर हो आदिव्याधियाँ से नवरात्र के दिनों में समाप्त प्राय हो जाती हैं, जटिल से जटिल समस्याएँ! चैत्र मास में श्रद्धालुगण लाखों की सँख्या में माँ के दर्शन करने आते हैं! इन दिनों माँ शाकम्भरी के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है! कोविड महामारी के बावजूद, जो माँ शाकम्भरी देवी के दर्शन कर लेते हैं उनकी हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है!

मेरे छोटे भाई सम मित्र एडवोकेट पँ० प्रमोद कौशिक जी की कुल देवी हैं माँ शाकम्भरी देवी! सहारनपुर जनपद मुख्यालय से ४५ किलोमीटर दूर शिवालिक पर्वत की पहाड़ियों की श्रृंखला में स्थित सिद्धपीठ माँ यहां दूर-दूर से लोग मां शाकम्भरी देवी के दर्शन करने आते हैं! देवी मन्दिर की गिनती देश के ५१ पवित्र शक्ति पीठों में की जाती है! इस सिद्धपीठ में मत्था टेकने से प्राणी सर्वसुख संपन्न हो जाता है!इस तीर्थ के निकट क्षेत्र में बाबा भूरादेव, छिन्मस्तिका मन्दिर, रक्तदंतिका मन्दिर आदि हैं! माँ शाकम्भरी देवी आदिशक्ति का ही स्वरूप है! इस सिद्धपीठ में बने माता के पावन भवन में माता शाकम्भरी देवी, भीमा, भ्रामरी, शताक्षी देवी की भव्य एवँ प्राचीन मूर्तियाँ स्थापित है!

मान्यतानुसर पुरातन युग में जब राक्षसों के घोर पाप के कारण सृष्टि पर अकाल पड़ गया था, तो उ समय सभी देवताओं ने मिलकर शिवालिक पर्वत श्रृंखला की प्रथम शिखा पर पूर्ण भक्ति भावना एवँ आस्था से श्रद्धा से ओतप्रोत होकर माँ जगदंबा की आराधना की थी! इससे प्रसन्न होकर मां भगवती प्रकट हुई और उन्होंने अपनी माया का चमत्कार दिखाते हुए अकालग्रस्त पृथ्वी लोक से भूख प्यास के प्रकोप को माँ ने दूर कर दिया था!

इस तरह माता शाकम्भरी देवी ने अपनी शक्ति के बल से सभी प्राणियों की रक्षा की! विभव पटल पर माँ शाकम्भरी देवी के नाम से सभी के लिए पूजनीय बनी! मार्कंडेय पुराण में भी लिखा है कि शिवालिक पर्वत पर पुरातन काल में माँ गौरी नारायणी का शीश गिरा था! भक्तों की यही मान्यता है कि माँ भगवती ने सूक्ष्म रूप में इसी स्थल पर वास किया है!

भूरा देव की महत्ता :

जनश्रुतिनुसार माता ने धर्म की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले अपने भक्त भूरादेव को यह वचन दिया था कि जो भी उनके दरबार में आएगा वह सबसे पहले भूरादेव के दर्शन करेगा, तो मैं उसकी प्रार्थना सबसे पहले सुन उसके कष्ट क्षण भर में दूर करेगी माता शाकम्भरी देवी का यह शक्तिपीठ! इस क्षेत्र में माता छिन्नमस्ता देवी का भव्य मन्दिर बना हुआ है। इस क्षेत्र में पाँच स्वयँ शिवलिंग भी प्रकट हुए हैं, जिनके दर्शन से चारों धाम की यात्रा का पुण्य मिलता है!

माँ शाकम्भरी देवी की स्तुति :माँss ब्रह्माणी नमो नमः
हे माँ रुद्राणी नमो नमःसकरावासिनी नमो नमः शाकम्भरी माँ नमोस्तुते

माता शताक्षी नमो नमःहे दुर्गमविनाशी नमो नमः
हे सुख – राशि नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

सन्कट हारिणि नमो नमःकष्ट निवारिणी नमो नम:
माँ भवतारिणी नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

हे जग -जननी नमो नमःकामना -पूर्णि नमो नमः
सौम्य -रूपणी नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

हे माँ परमेश्वरी नमो नमःमाँ त्रिपुरसुंदरी नमो नमः
हे माँ विश्वेश्वरि नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

हे दुर्गा -रूपेण नमो नमःहे लक्ष्मी रूपेण नमो नमः
माँ विद्या रूपेण नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

भुवन – नन्दिनी नमो नमःद्वारा निकन्दनी नमो नमः
माँ सिंहवाहिनी नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

शक्ति-स्वरूपा नमो नमःहेमाँ भव-भूपा नमो नमः
अनन्त -अनूपा नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

अतिसुखदायनी नमो नमःकरुणा – नयनी नमो नमः
हे माँ वरदायनी नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

हे मङ्गल करनी नमो नमःअमंगल -हरणी नमो नमः
अभया -वरणी नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

श्रीधामनिवासिनीनमो नमःहे -अविलासिनी नमो नमः
दैत्य -विनाशिनी नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

हे माँ शैल -पुत्री नमो नमःमाँ ब्रह्मचारिणी नमो नमः
हे चन्द्रघण्टा माँ नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

हे माँ कुष्माण्डा नमो नमःमाँ स्कन्द-माता नमो नमः
माँ -कात्यायिनी नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

माता कालरात्रि नमो नमःहे माँ महा-गौरी नमो नमः
माँ सिद्धि-दात्री नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

हे करुणा-मयी नमो नमःहे ममता-मयी नमो नमः
हे भक्तवत्सला नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

हे माता ब्रह्माणी नमो नमःहे माता -रुद्राणी नमो नमः
सकराय वासिनी नमो नमःशाकम्भरी – माँ नमोस्तुते

हवाई मार्ग से श्री शाकम्भरी देवी माता मन्दिर कैसे पहुँचें :

ज़ेवर हवाईअड्डा ग्रेटरनोएडा में बन रहा है! तब तक आप पालम के इन्दिरगाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कैब द्वारा पहुँच जाओगे २२७ किलोमीटर की दूरी से साढ़े तीन घण्टे में पहुँच जाओगे श्री शाकम्भरी माता मन्दिर!

रेल मार्ग से श्री शाकम्भरी देवी माता मन्दिर कैसे पहुँचें :

रेल से आप सहारनपुर रेलवे स्टेशन उतर कर दूरी तय करके एक घण्टे पाँच मिन्ट्स में कैब से ही आसानी से पहुँच जाओगे शक्तिपीठ शाकम्भरी माता मन्दिर रेलवे स्टेशन से ४० किलोमीटर दूरी पर स्थित है!

सड़क मार्ग से श्री शाकम्भरी देवी माता मन्दिर कैसे पहुँचें :

दिल्ली से आप अपनी कार से अथवा बस से चार घण्टे पचास मिन्ट्स की यात्रा करके २१२.६ किलोमीटर की दूरी तय करके राष्ट्रीय राजमार्ग NH-३३४ से पहुँच जाओगे, श्री शाकम्भरी माता मन्दिर!

शाकम्भरी माता की जय हो! जयघोष हो!!

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