श्री आद्या कात्यायनी पीठ मन्दिर, छत्तरपुर, नई दिल्ली भाग: १३५,पँ० ज्ञानेश्वर हँस देव की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल: श्री आद्या कात्यायनी पीठ मन्दिर, छत्तरपुर, नई दिल्ली भाग: १३५

आपने पिछले भाग में पढ़ा : भारत के प्रसिद्ध धार्मिकस्थल: श्री शिरड़ी साईँ मन्दिर, रोहिणी, नई दिल्ली! यदि आपसे यह लेख छूट गया हो और आपमें पढ़ने की जिज्ञासा हो तो आप प्रजा टुडे की की धर्म-सहित्य पृष्ठ पर जा कर उक्त लेख पढ़ सकते हैं!

भारत के धार्मिक स्थल: श्री आद्या कात्यायनी पीठ मन्दिर, छत्तरपुर, नई दिल्ली भाग: १३५

कात्यायिनी शक्तिपीठ मन्दिर, छत्तरपुर, नई दिल्ली में स्थित है! छतरपुर के इस मन्दिर को दिल्ली के दक्षिण में स्थित प्रसिद्ध माँ का मन्दिर कहते हैं! इसका वास्तविक नाम श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ मन्दिर है! यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा मन्दिर परिसर है! यह मन्दिर देवी कात्यायनी को समर्पित है!

मुझे स्मरण आता है वो दिन जब सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम में कॉन्ग्रेस का महाँअधिवेशन होना था, हमें वहाँ नाटक करना था! मैं उसमें एक बंगाली पत्रकार का किरदार निभा रहा था! मैं उस समय नाट्यकर्मी था और मैंने स्टिल फ़ोटोग्राफी की ट्रैनिंग मरहूम उस्ताद तरसेम लाल वर्मा जी सीखी! मैं घर से ही धोती कुर्ता पहन कर निकला, बजाए सिरीफोर्ट के मुझे छत्तरपुर आद्या कात्यायनी पीठ मन्दिर गए, कारण?

मेरे अभिन्न मित्र अविनाश ईश्वर निमीश्वमि के पिताजी इस मन्दिर की झालर बना रहे थे, मैं वहाँ पहुँचा, मेरे मित्र अविनाश मुझे बाबा नागपाल जी से मिलाने ले गए! आप विश्वास कीजिएगा, वहाँ कुछ नहीँ था, बाबा मुड़े और मुझे मेरे नमन के बाद फूलों का गुलदस्ता मुझे भेँट किया! वहाँ से हम सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम की तरफ़ बढ़े जैसे ही हम पहुँचे, हमने देखा, राजीव गाँधी स्वयँ जीप चला कर जा रहे हैं, मैंने आनन-फानन में देखा और कहा अरे देखो देखो प्रधानमंत्री इन्दिरगाँधी के बड़े बेटे! मेरे मित्र अविनाश ने ज़ोर से सीटी बजा दी, जीप वैसे ही रुक गई! हम क़रीब गए! अब क्या करें; राजीव जी की मनमोहनी मुस्कान देखने मिली! मैंने बाबा नागपाल द्वारा दिया हुआ बुके उन्हेँ दे दिया! हाथ मिलाया और बताया हम कॉन्ग्रेस के महाँअधिवेशन में नाट्य प्रस्तुति देंगे! मैं और अविनाश दोनोँ जीप को जाते हुए देखते रहे और उस गुलदस्ते को देनेवाले भव्य मन्दिर के निर्माता सन्त शिरोमणि श्री बाबा सन्त नागपाल जी महाराज के बारे सोचते रहे!

इस मन्दिर की स्थापना १९७४ में बाबा सन्त नागपाल जी द्वारा हुई थी! यह मन्दिर गुड़गाँव अब गुरुग्राम-महरौली मार्ग के निकट छतरपुर में स्थित है! यह मन्दिर सफेद सँगमरमर से बना हुआ है और इसकी सजावट बहुत की आकर्षक है! दक्षिण भारतीय शैली में बना यह मन्दिर विशाल क्षेत्र में फैला है! मन्दिर परिसर में बेहद बेहतरीन लॉन व बाग़ीचे हैं!

मूल रूप से यह मन्दिर माँ वैष्णों देवी के दुर्ग रूप को समर्पित है! इसके अतिरिक्त यहाँ भगवान शिव, विष्णु, देवी लक्ष्मी, हनुमान, भगवान श्री गणेश और श्रीरामचँद्र आदि देवी-देवताओं के मन्दिर भी हैं! दुर्गा पूजा और नवरात्रि के अवसर पर पूरे भारत देश से और विदेश से भी यहां भक्त एकत्र होते हैं और पूजा अर्चना में भाग लेते हैं! इस दौरान यहॉँ भक्तों की भारी भीड़ हो जाती है! यहाँ वॉलंटियर्स भीड़ को नियन्त्रित करने में अपने योगदान देते हैं! यहां एक वृक्ष पर श्रद्धालु धागे और रंग-बिरंगी चूड़ियां बांधते हैं! श्रद्धाजुओं का मानना है कि ऐसा करने से मनोकामना पूर्ण होती है!

माँ दुर्गा का शाबर मन्त्र :

ॐ एँ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे!!

महिषासुर के आतंक को समाप्त करने के लिए देवी माता ने माँ कात्यायनी का रूप धारण किया! विधि-विधान से इनकी पूजा करने से कुण्डली में गुरु की स्थिति मज़बूत होती है! इन्हें लाल रँग के फूल या गुलाब बेहद पसंद है!

माँ कात्यायनी की पूजा विधि :

प्रातः शीघ्र उठ स्नानादि करे, स्वच्छ वस्त्र धारण करें!
माँ की प्रतिमा को गङ्गाजल से शुद्ध करें!
पीले रँग का वस्त्र अर्पित करें!
भिन्न भिन्न के पुष्प अर्पित करें!
माँ को रोली व कुमकुम लगाएं!
पाँच प्रकार के फल और मिष्ठान अर्पित करें!
माँ कात्यायनी को शहद का भोग अवश्य लगाएँ!

माँ कात्यायनी का दिव्य मन्त्र:

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

माँ कात्यायनी की प्रार्थना :

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

माँ कात्यायनी की स्तुति :

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण सँस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

माँ कात्यायनी का ध्यान :

वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा आज्ञाचक्र स्थिताम् षष्ठम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम्॥

माँ कात्यायनी का स्तोत्र :

कञ्चनाभां वरा-भयं पद्म-धरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखी शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोऽस्तुते॥
पटाम्बर परिधानांsss नानालङ्कार भूषिताम्।
सिंहस्थिताम्पद्महस्तांकात्यायनीसुतेनमोऽस्तुते॥
परम आनन्दमयी देवीssss परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति,परमभक्ति,कात्यायनसुतेनमोऽस्तुते॥
विश्व-कर्ती, विश्व-भर्ती, विश्व-हर्ती , विश्वप्रीता।
विश्वाचिन्ताविश्वातीताकात्यायनसुतेनमोऽस्तुते॥
कां बीजा,कां जपआनन्द कांबीज जप तोषिते।
कां – कां बीज जप – दासक्ता कां – कां सन्तुता॥
कां – कार – हर्षिणी, कां – धनदा धन – मासना।
कां बीज – जप -कारिणीकां बीज तप मानसा॥
कां-कारिणी कां-मन्त्र पूजिताकां बीजधारिणी।
कां – कीं – कूं – कै – क: ठ: छ: स्वाहारूपिणी॥

माँ कात्यायनी का कवच :

कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी॥

माँ कात्यायनी जी की आरती :

जयजय अम्बे जयकात्यायनी।
जयजगमाता जगकीमहारानी॥
बैज – नाथ है, स्थान तुम्हारा।
वहावर – दाती, नाम” पुकारा॥
कईs नाम हैं कईs धाम है।
यह स्थान भी सुख – धाम है॥
हर मन्दिर में, ज्योति तुम्हारी।
माँ – योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर – जगह उत्सव होते रहते।
हर – मन्दिर में भक्तहैं कहते॥
कत्यानी – रक्षक “काया की।
ग्रंथि – काटे, मोह माया की॥
झूठे – मोह से, छुडाने वाली।
अपना “नाम – जपाने वाली॥
बृहस्पतिवारको पूजा करिए।
ध्यानकात्यानीमाँ का धरिये॥
हर – सँकट को दूरs करेगी।
भण्डारे भरपूर करेगी॥
जो भी माँ को “भगत पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥

हवाई मार्ग से मन्दिर, कैसे पहुँचें :

आप पालम दिल्ली के इन्दिरगाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे टर्मिनल-१ से १२.७ किलोमीटर की दूरी से मात्र तीस मिन्ट्स में पहुँच जाओगे मन्दिर!

रेल मार्ग से मन्दिर, कैसे पहुँचें :

मेट्रो रेल की येलो-लाईन से आप आसानी से पहुँच जाओगे मन्दिर!

सड़क मार्ग से मन्दिर, कैसे पहुँचें :

आप दिल्ली प्राधिकरण DTC की बस सँख्या: 516, 539, 947-A से तथा कार या बाईक से चित्तरंजन पार्क से चालीस मिन्ट्स में पहुँच सकते हो!

माँ कात्यायनी देवी की जय हो! जयघोष हो!!

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