श्री बाघेश्वर धाम मन्दिर कनीना-चरखीदादरी मार्ग,महेंन्द्र गढ़, हरियाणा भाग: २३७,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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श्री बाघेश्वर धाम मन्दिर, कनीना- चरखीदादरी मार्ग, गाँव: बाघौत, महेंन्द्र गढ़, हरियाणा भाग: २३७

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा पुण्डरीक तीर्थ, शिव मन्दिर, पुण्डरी, कैथल, हरियाणा! यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम आपके लिए लाएं हैं ।

भारत के धार्मिक स्थल : श्री बाघेश्वर धाम मन्दिर, कनीना- चरखीदादरी मार्ग, गाँव: बाघौत, महेंन्द्र गढ़, हरियाणा  भाग: २३७

गाँव बाघोत में शिवरात्रि मेला बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है! मन्दिर एवँ शिवलिंग अपने अँदर इतिहास व पौराणिक महत्व समेटे हुए है! इसे ऋषि मुनियों की तप स्थली एवँ शिव के दृष्टांत के रूप में जाना जाता है! लाखों भक्त यहाँ दर्शनार्थ आते हैं और हजारों की सँख्या में श्रद्धालु गोमुख, गङ्गोत्री और हरिद्वार से पैदल चलकर कावड़ लाकर बाघोत स्थित स्वयँभू: शिवलिंग पर गङ्गाजल अर्पित करते हैं! यह मन्दिर कनीना-चरखी दादरी मार्ग पर १५ किलोमीटर की दूरी पर और कनीना से तकरीबन १७ किलोमीटर की दूरी पर स्थित बाघोत गाँव में मुख्य सड़क मार्ग के पास ही स्थित है!

सावन के प्रत्येक सोमवार पर विशेष:

यहाँ के रह्निवासियोंनुसार बाघोत का मन्दिर करीब १६८० वर्ष पुराना है! इस शिवालय के पास खड़े कदम्ब के पेड़, तालाब एवँ स्वयँभू:शिवलिंग ऋषि मुनियों की तपस्थली होने की याद दिलाते हैं! भगवान श्रीराम के पूर्वजों ने भी यहाँ तप किया था! इस मन्दिर में वर्ष में दो बार मेला लगता है! तत्कालीन समय में राजा दलीप को शिव ने बाघ के रूप में दर्शन दिए थे, जिसके चलते गाँव का मन्दिर श्री बाघेश्वर धाम कहलाया! शिवालय का निर्माण कणाणा के राजा कल्याण सिंह रैबारी ने करवाया था!

महाराज कल्याण सिंह द्वारा निर्मित शिवालय पर ऊंटों की कतार १९९० के दशक तक बनी हुई थी, किंतु बाद में इस शिवालय का जीर्णोद्धार हुआ तो उस पर ऊंटों की कतार के चित्र नहीं बनाए गए! ऊंटों की कतार की तस्वीर बनाने के पीछे महाराजा के ऊंटों के सोने-चांदी को लूटने की घटना एवं शिव भोले के दृष्टांत के बाद पुनरू प्राप्ति की याद को ताजा करते हैं! ये तस्वीर शिवालय का पूरा हाल वर्णित करती है! इस शिवालय में स्वयं-भू शिवलिंग स्थित है, जो प्राचीन इतिहास की याद दिलाता है!

बाघोत में शिवरात्रि मेला, हजारों की संख्या में श्रद्धालु करते हैं स्वयँ-भू: शिवलिंग का गङ्गाभिषेक या जलाभिषेक! मेले को लेकर ज़ोर-शोर से चलती है तैयारियाँ बाघोत में मन्दिर को सजाया जाता है वहीं सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए भी किये जाते हैं! मेला कमेटी समस्त देखरेख में अहँ योगदान देती आ रही है! विभिन्न काँवड़ सेवा संघ यहाँ आकर शिव भक्तों की सेवा करते हैं! इस धाम पर ४०० दुकानें लगती हैं जिनमें से आधे से अधिक को जगह अलाट कर दी गई है!

ज़िला प्रशासन एवं पुलिस बल मेले की तैयारियों का जायजा लेता आ रहा है! बाघोत में दवाएं, पेयजल, काँवड़ियों के आवागमन के लिए उचित प्रबंध किए जाते हैं! भक्तजन जो सावन के माह में विशेषकर शिवरात्रि के आस पास बाघेश्वरी धाम आते हैं उन्हें पूर्व दिशा में मन्दिर से करीब २०० गज़ दूरी पर कतार में खड़ा होना होता है! कतार दक्षिण को मुड़कर पश्चिम की ओर जाने पर शिवलिंग के दर्शन होते हैं! श्री बाघेश्वरी धाम जाने वाले भक्तजन अपने साध गङ्गाजल, पेठा, बेलपत्र, नारियल, केला, फल, बेर एवँ फूल ले जाते हैं! श्री बाघेश्वरी धाम पर वर्ष में दो बार मेला लगता है: १. महाशिवरात्रि के दिन फाल्गुन माह की कृष्ण त्रयोदशी के अलावा दूसरी बार २.सावन माह की कृष्ण त्रयोदशी को बड़ा मेला लगता है!

शिवधाम मन्दिर बाघोत बुचौली में महाराज रोशनपुरी की अध्यक्षता में महापंचायत के संबंध में चर्चा हुई! किसी प्रकार रोड़ जाम जैसा कार्य नहीं किया! अखाडे़ के साधु सँतों को महापँचायत को लेकर अवगत करवा दिया गया! महापँचायत में आशा से अधिक सँख्या में लोग पहुंचे! शनिवार को लोगों से शाँति व्यवस्था बनाए रखने के लिए डिप्टी स्पीकर सँतोष यादव, एसडीएम सँदीप सिंह इंजीनियर बाघोत ने मन्दिर में पूजा अर्चना की!

शिव अराधना :

(शिव जी को देवों का देव महादेव कहा जाता है क्योंकि जब सारे देवता हार मान जानते हैं तो भोले बाबा ही हैं जो हर भंवर से नैय्या को पार लगाने में सहायता करते हैं. शिवजी की आराधना का मूल मंत्र तो ऊं नम: शिवाय ही है लेकिन इस मंत्र के अतिरिक्त भी कुछ मन्त्र हैं जो महादेव को अति प्रिय है! मनोवांछित फल पाने के लिए शिवजी के इस मंत्र का जाप करें):

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय| नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥
मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय| मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:॥
शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय| श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:॥
अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्। अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।

स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए शिवजी के मंत्र इस मंत्र का जाप करना चाहिए:
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ।।
कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय। सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे।।

शिव जी की पूजा के दौरान इन मंत्रो का जाप करना चाहिए:
पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा उन्हें स्नान समर्पण करना चाहिए
ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य सकम्भ सर्ज्जनीस्थो| वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमासीद्|| 

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें:

फ्लाइट से दिल्ली के इन्दिरगाँधी अँतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे उतर कर वहाँ से कैब द्वारा पहुँच जाओगे श्री बाघेश्वर धाम शिव मन्दिर, महेन्द्र गढ़, हरियाणा!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें:

बघोट रेल द्वारा १० किलोमीटर से कम में बघोट के पास कोई रेलवे स्टेशन नहीं है! रोहतक जंक्शन रेल मार्ग स्टेशन प्रमुख रेलवे स्टेशन है ६७ किमीटर बघोट मॉडर्न कॉलेज ऑफ एजुकेशन के पास बघोट कॉलेजों के पास पता: बघोट में गोमला रोड भोजवास स्कूल एफपीएस बगोट पता: बगहोट, कनीना, महेंद्रगढ़, हरियाणा! पोस्ट-कनीना, बघोट पता: बघोट, कनीना, महेंद्रगढ़, हरियाणा, डाक-कनीना संस बागोट पता : बघोट, कनीना, महेंद्रगढ़, हरियाणा, पिन- १२३०२७, पोस्ट-कनीना शिव मिडिल स्कूल, बघोट पता: बघोट, कनीना, महेंद्रगढ़, हरियाणा, पोस्ट – कनीना!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें:

आप कार अथवा बस से दिल्ली से रवाना होते हो तो मन्दिर पहुँचने के लिए आप ३ घण्टे १० मिनट्स का रास्ता तय करते हुए १२६.५ किलोमीटर यात्रा करके राष्ट्रीय राजमार्ग NH: कनीना-कोसली मार्ग से पहुँच जाओगे श्री बाघेश्वर धाम मन्दिर!

श्री बाघेश्वर शिव की जय हो! जयघोष हो!!

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