श्री दादा देव मन्दिर, पालम नई दिल्ली भाग: १२५ ,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की कलम से

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भारत के धार्मिक स्थल: श्री दादा देव मन्दिर, पालम नई दिल्ली भाग: १२५

आपने पिछले भाग में पढ़ा : भारत के प्रसिद्ध धार्मिकस्थल: राम जोहड़ी मन्दिर, द्वारका नई दिल्ली! यदि आपसे यह लेख छूट गया हो और आपमें पढ़ने की जिज्ञासा हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाइट की धर्म-सहित्य पृष्ठ पर जा कर उक्त लेख पढ़ सकते हैं!

आज हम भारत के धार्मिक स्थल: श्री दादा देव मन्दिर, पालम नई दिल्ली भाग: १२५

यह मन्दिर बहुत प्राचीन मन्दिर है! लगभग १२०० वर्षोँ से अधिक से बना हुआ है श्री दादा देव जी महाराज का प्रामाणिक मन्दिर! मान्यतानुसार श्री दादा देव महाराज जी राजस्थान से आए थे! पालम के जोहड़ (तालाब) के निकट दादादेव ने जप तप किया भगवान श्री भोले नाथ ने उन्हेँ शुभाशीष दिया !

यहाँ पालम गाँव के निकटवर्ती गाँव देहात के अनन्य श्रद्धालु भक्तजन कोई भी शुभ कार्य हो बिना श्री दादा देव जी महाराज को गुड़ की भेली भोग लगाए नहीँ मानते! १.पालम, २.नसीरपुर, ३.शाहबाद मोहम्मदपुर, ४.बागडोला, ५.बिंदापुर, ६.डाबड़ी, ७.असालतपुर, ८.ऊंटाला, ९.बापरोला, १०.मटियाला, ११.पूठकलां एवँ १२.नांगलराया जो पँखरोड़ से आगे आज के जेल रोड़ पर दिल्ली छावनी के निकट बसा है! इसके अतिरिक्त हरियाणा राजस्थान के ग्रामीणों में बहुत मान्यता है श्री दादादेव महाराज की!

श्री दादा देव मन्दिर के प्रमुख द्वार के दाहिनी तरफ़ बिड़ला जी का पत्र अपने बेटे के नामित्त पेन्ट किया गया है! आगे आ के दाहिनी ओर छोटी सी यज्ञशाला है जहाँ साधु सन्यासी दादादेव की कृपा से शिवाराधना करते हैं एवँ धूनी रमाते हैं! इसके मध्य में, पीछे ही जोहड़ हुआ करता था! शिवरात्रि को यहाँ भण्डारा लगाया जाता है!

जोहड़ के ठीक पीछे बहुत बड़ा मैदान है, जहाँ पार्किंग की व्यवस्था है तथा इस मैदान में मेलों का आयोजन होता है! मुझे स्मरण आता है वो दिन जब तत्कालीन यहाँ के विधायक धर्मदेव सोलंकी ने मुझे पगड़ी बँधवा कर सम्मानित किया था! शिवरात्रि पर्व पर यहाँ दिल्ली की इनामी कुश्ती का भी आयोजन भी किया जाता है!

श्री दादा देव महाराज का पूरा परिसर आठ एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है! जिसके अन्तर्गत मन्दिर परिसर, पहले जोहड़ हुआ करता था एवं मेला क्षेत्र सम्मिलित है! स्थानीय समुदाय के अनुसार मन्दिर के जोहड़ (तालाब की) मिट्टी त्वचा रोगों को ठीक करने मे सहायक है! नब्बे के दशक की शुरुआत में मन्दिर का पुनः नवीनीकरण हुआ!

श्री दादा देव मन्दिर के पोछे अनेक छोटे छोटे मन्दिर एवँ शिवालय है! जहाँ श्रद्धालुगण ईंट पत्थरों से अपना घर बनाते हैं और सचमुच का घर पाते हैं! शिवरात्रि एवँ शिवतेरस को प्रसिद्ध दादा देव जी के मन्दिर में महामृत्युंजय मन्त्र, सँजीवनी मन्त्र, श्री शिव जी चालीसा व शिव ताण्डव स्तोत्र भी पढ़े जाते हैं!

नई दिल्ली के, बाहरी दिल्ली स्थित बारह गाँवों के लोग जिन्हेँ अपना ईष्ट देव मानते हैं वो पालम गाँव के प्रसिद्ध देवता श्री दादा देव जी महाराज के इस मन्दिर की पूजा अर्चना करते हैं! मान्यतानुसार चौबीस गाँवों तक और दिल्ली के आसपास हरियाणा के दूर दराज़ के रहवासी भी श्री दादा देव जी महाराज को मानते और पूजते हैं!

हमने इस श्री दादा देव मन्दिर का वह प्राचीन दौर भी देखा है जब दादा देव मन्दिर के प्राँगण में एक बहुत बड़ा जोहड़ था जिसमें हमने अनेक बार स्नान भी किया! अब वो जोहड़ बन्द प्राय है! हमने इस जोहड़ में अनेक सर्प भी देखे हैं!

                                                                                   

हमारे पूज्य पिता जी श्री योगिराज रामजीलालजी महाराज कहा करते थे श्री दादा देव जी महाराज यहाँ के स्थान देवता हैं! हमारी माताजी श्रीमती लीलादेवी जी बहुत मानती थीं श्री दादा देव महाराज जी को, मुझे स्मरण है मेरी माँ की इच्छा थी कि मैं विवाह के समय घोड़ी पर बैठकर श्री दादा देव जी महाराज के दर्शनार्थ जाऊँ!

मेरे विवाह से ६ वर्ष पूर्व ही माँ वैकुण्ठ लोक चली गईं, विवाहोपरान्त हम दोनोँ पति पत्नी भेली चढ़ा करा आए और पत्थरोँ से घर बनाया! फ़रवरी २००५ में दादादेव महाराज की कृपा से द्वारका में फ्लैट ले लिया!

हम कई बार हम श्री दादा देव मन्दिर गए! यहाँ की परम्परा है कि आपकी मन्नत पूरी होने के बाद आप गुड़ की भेली का भोग लगाते हो! यहाँ ग्राम चौबीसी में कहीं भी चोरी नहीँ होती थी! कोई चोरी के इरादे से ददा देव की सरहद में आता तो वह अन्धा हो जाता!

दादादेव मन्दिर में पूजा अर्चना के लिए शुक्लपक्ष के किसी भी दिन अथवा शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष के किसी भी रविवार को तथा अमावस्या पूर्णिमा को भक्तोँ की भीड़ देखने को मिलती है!

श्री दादा देव जी महाराज की आरती :

ध्यान लगा कर मम हृदय से
सुमिरो श्री दादा देव महाराज
मन – वाँछित फल देवन हारे
सँवारेतिहारे सगरे बिगड़ेकाज
ध्यान लगा कर मम हृदय से
सुमिरो श्री दादा देव महाराज

जयजय श्री दादादेव विधाता
दीनन के तुम ही हो सुखदाता
टाँक – टोंड़ा से हुआ निकासा
पालम गाँव में किया निवासा
ध्यान लगा कर मम हृदय से
सुमिरो श्री दादा देव महाराज

राजस्थान में श्री राम देव कहें
पालम में श्री दादादेव काहाए
श्वेतअश्व की दादा करें सवारी
महिमा बहुतही अपार तुम्हारी
ध्यान लगा कर मम हृदय से
सुमिरो श्री दादा देव महाराज

ध्यान लगा कर मम हृदय से
सुमिरो श्री दादा देव महाराज
ज्ञानेश्वर श्री दादा देव रिझावें
जोईजोई मांगे सोईफल पावें
ध्यान लगा कर मम हृदय से
सुमिरो श्री दादादेव महाराज

!! अथ श्री दादा देव आरती समाप्त !!

श्री दादा देव मन्दिर में दर्शन का समय:

प्रातः ५:३० – १:०० सायँ ४:०० – ९:००!

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें दादा देव मन्दिर:

इन्दिरा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से मात्र ८ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है दादादेव मन्दिर! कैब से मात्र २० मिन्ट्स में पहुँच जाओगे!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें दादा देव मन्दिर:

निकटतम मेट्रो स्टेशन सेक्टर १० द्वारका है! पालम मेट्रो स्टेशन भी बराबर दूरी पर है!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें दादा देव मन्दिर:

कार बस अथवा बाईक से आप बहुत आसानी से पहुँच सकते हो! बस द्वारा सेक्टर सात द्वारका और सेक्टर आठ द्वारका पहुँच कर साईकिल रिक्शा, ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा अथवा कैब से १० मिन्ट्स में पहुँच जाओगे!

श्री दादादेव महाराज की जय हो! जयघोष हो!!

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