श्री दक्षिणमुख नन्दीश्वर मन्दिर बंगलूरू, कर्नाटक भाग: २५६,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल :श्री दक्षिणमुख नन्दीश्वर मन्दिर, बंगलूरू, कर्नाटक भाग: २५६

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा सूर्य मन्दिर, कन्दाहा गाँव, सहरसा औरंगाबाद! यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम आपके लिए लाएँ हैं।

भारत के धार्मिक स्थल :श्री दक्षिणमुख नन्दीश्वर मन्दिर, बंगलूरू, कर्नाटक भाग: २५६

श्री दक्षिणमुख नन्दी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र एक छोटा मन्दिर है जो गंगाम्मा मन्दिर के सामने स्थित है और बैंगलोर शहर, कर्नाटक , भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में मल्लेश्वरम लेआउट के दूसरे मन्दिर स्ट्रीट पर कडु मल्लेश्वर मन्दिर के सामने तिरछे है! श्री दक्षिणमुख नन्दी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र, नन्दी तीर्थ मन्दिर श्री दक्षिणमुख नन्दी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र, ज़िला बैंगलोर स्थान मल्लेश्वरम राज्य कर्नाटक का प्रसिद्ध नन्दी तीर्थ, नन्दीश्वर तीर्थ, बसव तीर्थ या मल्लेश्वरम नन्दी गुड़ी के नाम से भी जाना जाता है!

मन्दिर के मुख्य देवता शिवशँकर हैं, एक शिव लिंग ( लिंगम ) के रूप में! नाम का स्रोत “दक्षिणमुख नन्दी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र”! इस मन्दिर का केंद्रबिन्दु एक अद्वितीय पत्थर नन्दी है जो दक्षिण दिशा की ओर स्थित है – कन्नड़ में दक्षिणा ‘दक्षिणामुका नन्दी’ का अर्थ है ‘दक्षिणमुखी नंदी’!

नन्दी के मुख से पानी की एक सतत धारा बहती रहती है! जिसे पवित्र जल माना जाता है, जिसे कन्नड़ में ‘तीर्थ’ कहा जाता है!

नन्दी के मुँह से पानी शिवलिंग पर गिरता है और मन्दिर के बीच में एक सीढ़ीदार टैंक में बहता है, जिसे ‘कल्याणी’ कहा जाता है! कन्नड़ में इसे मन्दिर का तालाब!
‘क्षेत्र’ का अर्थ कन्नड़ में ‘स्थान’ होता है और अक्सर इसका इस्तेमाल ऐतिहासिक या धार्मिक महत्व के स्थान या क्षेत्र को संदर्भित करने के लिए किया जाता है!

उपरोक्त सभी तत्वों के संयोजन से मंदिर का आधिकारिक नाम जुड़ जाता है! नन्दी तीर्थ मन्दिर का प्रवेश निशुल्क है!

मन्दिर का इतिहास :

एक अन्य मन्दिर जिसे नन्दी-तीर्थ कहा जाता है, जिसे रहवासियों ने ४०० साल पुराना बताया है, १९९७ में कडू मल्लिकार्जुन मन्दिर के दक्षिण-पूर्व में खुदाई के काम के दौरान फिर से खोजा गया था! यद्यपि, बीएन सुन्दर राव अपनी पुस्तक, “बेंगलुरीना- इतिहास” में, ने दस्तावेज किया है कि स्वर्गीय राव बहादुर येले मल्लप्पा शेट्टी ने नन्दी और शिव-लिंग के साथ इस कल्याणी क्षेत्र का निर्माण किया था! कल्याणी का निर्माण लगभग १८८२ ईस्वी में साँकी टैंक के निर्माण के कुछ समय किया गया था! मल्लप्पा शेट्टी द्वारा सैंकी टैंक से नीचे की ओर बहने वाली धारा को उस स्थान की ओर बहते हुए देखा गया था! उन्होंने यहाँ से नन्दी के मुहाने तक एक नाली पाइप का निर्माण किया ताकि साल भर नंदी के मुंह से धीरे-धीरे एक शिव-लिंग की मूर्ति (नंदिकेश्वर) पर पानी बहता रहे, जो ठीक नीचे स्थापित किया गया था! इस पानी को तब एक कल्याणी (सीढ़ी वाली टँकी) में प्रवाहित किया गया था, जो कि निचले स्तर पर है, ताकि अतिरिक्त पानी मन्दिर के दक्षिणी प्रवेश द्वार के सामने बगीचे में पाए गए एक कुएं में बह जाए! यह एक तूफानी पानी की नाली (राजा-कालुवे) से जुड़ा था, जिसने अतिरिक्त को जकारयाना केरे नामक एक अन्य टैंक बाँध में खाली कर दिया! दुर्भाग्य से इस नेटवर्क का अतिक्रमण कर लिया गया है! कल्याणी के चारों ओर एक दो मंज़िला उपनिवेशित सँरचना है! श्री गणेश का एक मन्दिर भी पास के क्षेत्र में मौजूद है! यह, कडू मल्लिकार्जुन और गङ्गम्मा मन्दिरों के साथ, पवित्रता के संबंध को अब एक प्राकृतिक नोड से चिह्नित करता है!

मन्दिर की पुनः खोज :

अपने इतिहास के किसी बिंदु पर, नन्दी तीर्थ मन्दिर अनुपयोगी हो गया और धीरे-धीरे कीचड़ और गंदगी के नीचे दब गया! चूंकि यह मन्दिर आसपास के क्षेत्र के सामान्य जमीनी स्तर से नीचे है: और कोई गोपुरम मीनार नहीं है, इस मन्दिर की पूरी सँरचना अँततः दृश्य से गायब हो गई! हालाँकि, इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों की स्मृति में एक मन्दिर या कल्याणी के अस्तित्व का ज्ञान जीवित रहा!

जैसे ही मल्लेश्वरम बैंगलोर के पसँदीदा आवासीय क्षेत्रों में से एक में विकसित हुआ, सँपत्ति की कीमतों में काफी वृद्धि हुई! १९९७ में, इस मन्दिर क्षेत्र को हड़पने और इसे खाली ज़मीन के रूप में बेचने का प्रयास किया गया था! स्थानीय निवासियों के विरोध के बाद, विचाराधीन भूमि को खोदा गया और मन्दिर परिसर धीरे-धीरे कीचड़ और गन्दगी के नीचे से निकला!

इस स्तुति से जल्द प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ :

सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है और इस दिन पूरे विधि-विधान से इनका पूजन करना चाहिए! शिव शंभू भक्तों की प्रार्थना से बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं!

भक्तों पर कृपा करते हैं भगवान शिव शँकर जी! भगवान शिवशँकर भक्तों की प्रार्थना से बहुत जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं. इसी कारण उन्हें ‘आशुतोष’ भी कहा जाता है. वैसे तो धर्मग्रंथों में भोलेनाथ की कई स्तुतियां हैं, पर श्रीरामचरितमानस का ‘रुद्राष्टकम’म अपने-आप में बेजोड़ है!

‘रुद्राष्टकम’ केवल गाने के लिहाज़ से ही नहीं, बल्कि भाव के नज़रिए से भी एकदम मधुर है! यही वजह है शिवशँकर के आराधक इसे याद रखते हैं और पूजा के समय सस्वर पाठ करते हैं! ‘रुद्राष्टकम’ और इसका भावार्थ आगे दिया गया है!

शिव रुद्राष्टकम् स्तुति :

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं । विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ॥

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं । चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥१॥

हे मोक्षरूप, विभु, व्यापक ब्रह्म, वेदस्वरूप ईशानदिशा के ईश्वर और सबके स्वामी शिवजी, मैं आपको नमस्कार करता हूं. निज स्वरूप में स्थित, भेद रहित, इच्छा रहित, चेतन, आकाश रूप शिवजी मैं आपको नमस्कार करता हूं!

निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं । गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।

करालं महाकालकालं कृपालं । गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥२॥

निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय (तीनों गुणों से अतीत) वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलाशपति, विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे परमेशवर को मैं नमस्कार करता हूं!

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं । मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ॥

स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा । लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥३॥

जो हिमाचल के समान गौरवर्ण तथा गंभीर हैं, जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है, जिनके सिर पर सुंदर नदी गंगाजी विराजमान हैं, जिनके ललाट पर द्वितीया का चन्द्रमा और गले में सर्प सुशोभित है!

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं । प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ॥

मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं । प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥४॥

जिनके कानों में कुण्डल शोभा पा रहे हैं. सुन्दर भृकुटी और विशाल नेत्र हैं, जो प्रसन्न मुख, नीलकण्ठ और दयालु हैं. सिंह चर्म का वस्त्र धारण किए और मुण्डमाल पहने हैं, उन सबके प्यारे और सबके नाथ श्रीशिव शँकरजी को मैं भजता हूं!

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं । अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ॥

त्रय: शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं । भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥५॥

प्रचंड, श्रेष्ठ तेजस्वी, परमेश्वर, अखण्ड, अजन्मा, करोडों सूर्य के समान प्रकाश वाले, तीनों प्रकार के शूलों को निर्मूल करने वाले, हाथ में त्रिशूल धारण किए, भाव के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी के पति श्री शंकरजी को मैं भजता हूं!

कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी । सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ॥

चिदानन्दसंदोह मोहापहारी । प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥६॥

कलाओं से परे, कल्याण स्वरूप, प्रलय करने वाले, सज्जनों को सदा आनंद देने वाले, त्रिपुरासुर के शत्रु, सच्चिदानन्दघन, मोह को हरने वाले, मन को मथ डालनेवाले हे प्रभो, प्रसन्न होइए, प्रसन्न होइए!

न यावद् उमानाथपादारविन्दं । भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।

न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं । प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं ॥७॥

जब तक मनुष्य श्रीपार्वतीजी के पति के चरणकमलों को नहीं भजते, तब तक उन्हें न तो इहलोक में, न ही परलोक में सुख-शान्ति मिलती है और अनके कष्टों का भी नाश नहीं होता है. अत: हे समस्त जीवों के हृदय में निवास करने वाले प्रभो, प्रसन्न होइए!

न जानामि योगं जपं नैव पूजां । नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ॥

जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं । प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो ॥८॥

मैं न तो योग जानता हूं, न जप और न पूजा ही. हे शम्भो, मैं तो सदा-सर्वदा आप को ही नमस्कार करता हूं. हे प्रभो! बुढ़ापा तथा जन्म के दु:ख समूहों से जलते हुए मुझ दुखी की दु:खों से रक्षा कीजिए. हे शम्भो, मैं आपको नमस्कार करता हूं!

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ॥।

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥९॥
अथ रुद्राष्टकम् स्तोत्र पठित्वा:
जो मनुष्य इस रुद्राष्कम स्तोत्र को भक्तिपूर्वक पढ़ते हैं, उन पर शिव शँकर शम्भु विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं!

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

बाय एयर निकटतम हवाई अड्डा बेंगलुरु हवाई अड्डा है! यहाँ से श्री दक्षिणेश्वर नन्दी मन्दिर के लिए राज्य परिवहन की बस अथवा कैब द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है!

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

दिल्ली से बंगलुरू की नियमित रेलगाड़ियाँ उपलब्ध हैं!ट्रेन सँख्या# 06528, प्रस्थान: 8:20 पर,नई दिल्ली से! केएसआर बेंगलुरु ट्रेन सँख्या# 02692
प्रस्थान: 7:50, एच निजामुद्दीन से! केएसआर बेंगलुरु वाईपीआर एस क्रांति विशेष ट्रेन सँख्या#02630 प्रस्थान: 8:30 एच निजामुद्दीन से! वाईपीआर, यशवंतपुर जँक्शन, ट्रेन सँख्या# 06524, प्रस्थान: 8:45 एच निजामुद्दीन से!अन्य दिल्ली से बैंगलोर के लिए ७ ट्रेनें हैं!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

दिल्ली से बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग NH :४४ से २,१७५.५ किलोमीटर यात्रा करके ३६ घण्टे में पहुँचोगे मन्दिर! सड़क के द्वारा देश के अन्य प्रमुख शहरों से श्री दक्षिणेश्वर नन्दी मन्दिर बस स्टैंड तक नियमित बसें हैं!

नन्दिकेश्वर भगवान भोलेनाथ की जय हो! जयघोष हो!!

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