श्री दरबारण्येश्वर शनि मन्दिर तिरुनल्लर पांडिचेरी, तमिलनाडु भाग :३०४,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल: श्री दरबारण्येश्वर शनि मन्दिर तिरुनल्लर, पांडिचेरी, तमिलनाडु भाग :३०४

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिक स्थल: साईँ मन्दिर, दीन दयाल नगर, मुरादाबाद, उत्तरप्रदेश! यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजा टुडे के अति विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं!

भारत के धार्मिक स्थल: श्री दरबारण्येश्वर शनि मन्दिर, तिरुनल्लर, पांडिचेरी, तमिलनाडु भाग :३०४

श्री दरबारण्येश्वर मन्दिर पांडिचेरी के तिरुनल्लर में स्थित एक प्रसिद्ध शनि मन्दिर है और यह मंदिर तमिलनाडु के बहुत पास है। भगवान की एक झलक पाने के लिए हज़ारों श्रद्धालु हर रोज़ यहाँ आते हैं। शनि ग्रह को समर्पित यह मंदिर तमिलनाडु के नवग्रह मन्दिरों में से एक है। इस मन्दिर में शनिदेव को समर्पित एक मन्दिर है लेकिन यह मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है।

अभय वरद हस्त के साथ यह मन्दिर पूर्वमुखी है। भगवान को पहले से स्थपित देवताओं के बीच प्रतिष्ठित किया गया है। यह मन्दिर कावेरी नदी के दक्षिण किनारे पर स्थित है और भारत में स्थित शनिदेव का सबसे पवित्र मन्दिर है। चोल राजाओं को इस मन्दिर का संस्थापक माना जाता है।

त्यागराज के सात सप्तवाटिका स्थल हैं और तिरुनल्लर उनमें से एक है। ऐसी मान्यता है कि शनिदेव के प्रकोप के कारण किसी व्यक्ति को बदकिस्मती, गरीबी और अन्य बुरे प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। इस मन्दिर में भगवान शिव की पूजा करने से वह व्यक्ति शनि ग्रह के सभी बुरे प्रभावों से मुक्त हो जाता है।

शनि पूजा से दुष्प्रभाव समाप्त :

शनिवार की शाम इस विधि से शनिदेव की पूजा करने से शनि ग्रह के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलने की है मान्यता! शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए उनकी आराधना की जाती हैं।

शनिवार को उपाय:

शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता हैं। कहते हैं कि जिस व्यक्ति के कर्म जैसे होते हैं, शनिदेव उसे वैसा ही फल देते हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह के दुष्प्रभाव से बचने के लिए शनिवार की शाम को उपाय करने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यता है कि शनिवार को सूर्यास्त होने के बाद शनिदेव की आराधना की जाए तो उसका फल अधिक मिलता है। माना जाता है कि शनिवार की शाम सच्चे मन से शनिदेव की पूजा करने से शनि साढ़ेसाती, शनि ढैय्या और शनि ग्रह के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

चमत्कारी शनि स्तुति :

जीवन की समस्त समस्याओं से हमेशा के लिए मुक्ति पाना चाहते हो तो आज से ही शनि देव की इस स्तुति का पाठ सवा महीने तक अवश्य करें। इस स्तुति का पाठ करते समय सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। ऐसा करने से पाठ-कर्ता की सभी कामनाएं श्रीशनिदेव पूरी करते हैं।

शनिवार को जो इस शनि स्तुति का पाठ करता है हर पल रक्षा करते हैं श्री शनि देव:

।। श्री शनि देव स्तुति ।।

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

॥ चौपाई ॥

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवन चमाचम चमके। हिये माल मुक्तन मणि दमकै॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

पिंगल, कृष्णो, छाया, नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन॥

सौरी, मन्द शनी दश नामा।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जापर प्रभु प्रसन्न हवैं जाहीं।
रंकहुं राव करैं क्षण माहीं॥

पर्वतहू तृण होइ निहारत।
तृणहू को पर्वत करि डारत॥

राज मिलत वन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुं की मति हरि लीन्हयो॥

वनहुं में मृग कपट दिखाई।
मातु जानकी गई चुराई॥

लषणहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥

रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका।
बजि बजरंग वीर की डंका॥


नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी।
हाथ पैर डरवायो तोरी॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो।
तेलहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥

तनिक विकलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गतो गौरिसुत सीसा॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।
बची द्रोपदी होति उधारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥

रवि कहं मुख महं धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देव-लखि विनती लाई।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना।
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जम्बुक सिह आदि नख धारी।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा।
सिह सिद्धकर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं स्वान सवारी।
चोरी आदि होय डर भारी॥

तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चांदी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्वसुख मंगल भारी॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

॥ दोहा ॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

॥ इति श्री शनि चालीसा समाप्त ॥

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें :

बाय एयर, निकटतम कामकाजी हवाई मार्ग यानी वायुयान मार्ग से निकटतम घरेलू हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली हवाई अड्डा १६३ किलोमीटर दूर है। इस हवाई अड्डे से घरेलू और कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित होती हैं। निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा चेन्नई ३०० किलोमीटर दूर है। प्री-पेड टैक्सी यहां से कराईकल के लिए उपलब्ध है।

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

ट्रेन द्वारा यानी रेल गाडी द्वारा आप कुंभकोणम, नागूर या मयिलादुथुराई पास के रेलवे स्टेशन हैं। आप ऑटो से या कैब से भी पहुँच सकते हो मन्दिर!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें :

आप ISBT से बस द्वारा अथवा अपनी कार से NH: ४४ से पँहुँच सकते है मन्दिर, तिरुनल्लर जाना पड़ेगा। इस मन्दिर की ,निकटवर्ती सड़कें यहाँ की सड़कें बेहतर है! दिल्ली से इस मन्दिर में ४४ घँटों में पहुंच सकते हैं। दिल्ली से कुल दूरी २५००.१ किलोमीटर दूर है। यह मंदिर कराईकल (5 किमी) के पास कराईकल-मयिलादुथुराई और कुंभकोणम बस मार्ग पर स्थित है। तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम की बसें कराईकल को तमिलनाडु के अधिकांश शहरों से जोड़ती हैं।

श्री शनि देव की जय हो। जयघोष होII

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