श्री गणपति मन्दिर सांगली, महाराष्ट्र भाग : २५१,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल : श्री गणपति मन्दिर सांगली, महाराष्ट्र भाग: २५१
 
आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा सिद्धेश्वर हनुमान मन्दिर, सिमरिया, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश! यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम आपके लिए लाएं हैं।
 
भारत के धार्मिक स्थल : श्री गणपति मन्दिर, सांगली, महाराष्ट्र भाग: २५१ ,
 
भारतवर्ष के राज्य महाराष्ट्र के कोल्हापुर ज़िले के सांगली रेलवे स्टेशन से ४ किलोमीटर और कोल्हापुर से ४७ किलो की दूरी पर, सांगली गणपति मन्दिर महाराष्ट्र में सांगली शहर के गणपति पेठ इलाके में स्थित एक पावन पुनीत पवित्र हिंदू मन्दिर है! यह महाराष्ट्र के प्रमुख मन्दिरों में से एक है, और कोल्हापुर के पास घूमने के लिए लोकप्रिय स्थानों में से एक है! भगवान श्री गणेश को समर्पित, सांगली गणपति मन्दिर कृष्णा नदी के पूर्वी तट पर स्थित है! सांगली शहर के संरक्षक देवता को सम्मानित करने के लिए सांगली के पहले प्रमुख, चिंतामणराव पटवर्धन द्वारा १८१४ में मन्दिर भवन का निर्माण शुरू किया गया था! इस मन्दिर के निर्माण में ३० साल का समय लगा और यह १८४५ में बनकर तैयार हुआ! राजा ने भगवान श्री गणेश की मूर्ति को इसी मन्दिर में स्थापित किया था! १९५२ में, श्री गणेश मन्दिर के सामने एक लाल पत्थर का मेहराब बनवाया गया था! बाकी मन्दिर चिंतामणि राव द्वितीय के शासनकाल के दौरान पूरा हुआ!
 
विजय सिंह पटवर्धन ने हाल ही में इस मन्दिर का जीर्णोद्धार और रूपांतरण किया है! पेशवा वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति के रूप में माना जाता है, मुख्य मन्दिर ज्योतिबा पहाड़ियों से लाए गए काले पत्थरों से बना है! मन्दिर के दरवाज़ों को बहुरंगी प्राकृतिक लकड़ी से तराशा गया है! मन्दिर का परिसर दो एकड़ भूमि में फैला हुआ है और इसमें एक बड़ा हॉल, एक मंच और एक ‘नगरखाना’ शामिल है! संगमरमर में रिद्धि-सिद्धि के साथ श्री गणेश की मूर्ति मन्दिर में सुंदर ह! मुख्य मन्दिर के चारों ओर चिंतामनेश्वर, चिंतामनेश्वरी, सूर्यनारायण और लक्ष्मीनारायण के चार मन्दिर हैं! मुख्य मन्दिर सहित इन चारों मन्दिरों को गणपति पंचायत के नाम से जाना जाता है! मन्दिर में पंचायत की पांच मूर्तियों को स्थानीय कारीगर भीमन्ना और मुकुंद पाथरवत ने बनवाया था! इस मन्दिर में हर साल भाद्रपद के महीने में पाँच दिनों तक विशेष गणेशोत्सव मनाया जाता है! इस दौरान संस्थान काल में कीर्तन, प्रवचन, ललित जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहते हैं! इसके अलावा प्रसिद्ध हरदास, गायकों और नर्तकियों के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते रहे थे!
 
इस प्राचीन मन्दिर में प्रवेश शुल्क :
 
प्रवेश शुल्क! यह पावन पुनीत पवित्र प्राचीन श्री गणपति मन्दिर कृष्णा नदी के तट पर स्थित है! मन्दिर का निर्माण ज्योतिबा पहाड़ी से प्राप्त काले पत्थर से किया गया था! शाही सांगली परिवार के बड़े बेतेवश्री चिंतामणराव पटवर्धन ने १८४३ ई. में मूर्ति की स्थापना की! भगवान श्री गणपति गणेश की मूर्ति तांबे से बनी है! मूर्ति को इस तरह रखा गया था कि यह दूर से भी दिखाई देती है! सुबह के समय ६:०० बजे और रात्रि ८ बजे आरती की जाती है!
 
श्री गणेश मन्दिर में समयानुसार:
 
समय: सुबह ६ बजे – दोपहर १२ बजे और दोपहर २ बजे से रात्रि के ८:३० बजे! यदि आप भी गणपति की कृपा के पात्र बनना चाहते हैं तो नियमित रूप से संकटनाशन गणेश स्तोत्रम् का पाठ करें! ये पाठ भगवान गणेश को अति प्रिय है! इसे करने से सभी दु:खों का अन्त होता है और बिगड़े काम भी बनने लगते हैं! यदि आप रोजाना नहीं कर सकते तो सिर्फ बुधवार के दिन ही इसे ११ बार अवश्य पढ़ें! सँकटनाशन गणेश स्तोत्र के पाठ से प्रभु हो जाते हैं प्रसन्न! बुधवार को गणेश जी की पूजा करते समय करें सँकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ! भगवान श्री गणेश, सभी देवताओं में प्रथम पूज्य हैं! गणपति बप्पा विघ्नहर्ता और विद्यादाता हैं! इनकी पूजा करने से व्यक्ति को धन-संपत्ति लाभान्वित होते हैं! ये गौरीपुत्र हैं! ये व्यक्ति के जीवन की हर परेशानी को हल करते हैं! गणेश जी की उपासना करने से व्यक्ति के सभी संकट संकट मिट जाते हैं! उनका वाहन मूषक है और उसका नाम डिंक है! इनका नाम गणपति इसलिए पड़ा क्योंकि यह गणों के स्वामी हैं! इन्हें केतू का देवता कहा जाता है! हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, श्री गणेश जी का नाम किसी भी शुभ कार्य से पहले लिया जाता है! श्री गणपति बप्पा को प्रथम पूज्य कहा गया है! इनकी पूजा करने वाला प्रथम सम्प्रदाय गाणपत्य कहलाता है! वैसे तो गणेश जी के कई नाम हैं लेकिन उनमें से १२ नाम प्रमुख हैं! इनमें सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन शामिल हैं! गणेश जी की पूजा करते समय उनकी आरती, गणेश चालीसा, द्वादश नामों और मंत्रों का जाप किया जाता है! इसके साथ ही अगर गणपति बप्पा की पूजा करते समय संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ किया जाए तो व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है!
 
सँकटनाशन गणेश स्तोत्रम्:
 
प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् । भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ॥१॥
प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् । तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् ॥२॥
लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च । सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥३॥
नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् । एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् ॥४॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः । न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥५॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥६॥
जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते । संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः ॥७॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते । तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥८॥
*॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं
 
॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥
 
हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :
 
नई दिल्ली से मन्दिर, पहुंचने का सबसे तेज़ तरीका कोल्हापुर के अँतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए उड़ान है! हवाईजहाज से निकटतम हवाई अड्डा कोल्हापुर में है जो ५० किलोमीटर दूर है।फिर मन्दिर जाने के लिए कैब और ५५ मिनट्स का समय लगता है! हवाई अड्डे के साथ मोटर वाहन योग्य सड़कों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है! हवाई अड्डे से मन्दिर के लिए टैक्सी उपलब्ध हैं!
 
रेल मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :
 
रेल द्वारा आप नई दिल्ली से महाराष्ट्र के लिए लोकप्रिय ट्रेन लेकर कोल्हापुर जँक्शन के लिए ट्रेन है! निकटतम रेलवे स्टेशन कोल्हापुर में है जो मन्दिर से ५६ किलोमीटर दूर है! स्टेशन से लगभग एक घंटे पन्द्रह मिनट्स का समय लगता है!
 
सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :
 
अंतर्देशीय बस स्थानक यानी ISBT दिल्ली से आप तक़रीबन ३१ घण्टे में आप राष्ट्रीय राजमार्ग NH:आगरा राजमार्ग से १७०८ किलोमीटर की यात्रा तय करके बस अथवा स्वयँ की कार द्वारा सांगली श्री गणपति मन्दिर पहुँच जाओगे!
 
श्री गणपति जी की जय हो! जयघोष हो!!

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