श्री पितरेश्वर हनुमानजी धाम इन्दौर, मध्यप्रदेश भाग : २६४,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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श्री पितरेश्वर हनुमानजी धाम मन्दिर इन्दौर, देवधरम टेकरी, मध्यप्रदेश भाग :२६४

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिक स्थल: सूर्य मन्दिर, गया, बिहार यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजा टुडे के अति विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं।

भारत के धार्मिक स्थल: श्री पितरेश्वर हनुमानजी धाम मन्दिर, इन्दौर, देवधरम टेकरी, मध्यप्रदेश भाग : २६४

सर्व प्रथम इस धाम का हम आपको विश्व रिकॉर्ड बताते हैं ! १००० क्विंटल आटे और १००० क्विंटल शक्कर से बनी पितरेश्वर हनुमानजी धाम की ‘महाप्रसादी’!जिसे विश्व रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है! इन्दौर में नर्मदा के जल के आने से पहले शहर की जलापूर्ति का एक सबसे बड़ा केंद्र यशवँत सागर ही हुआ करता था! यशवँत सागर से पानी रेशम केंद्र से पम्पिंग करके जम्बूड़ी होते हुए देवधरम टेकरी पर आता है! यहाँ पर पानी फिल्टर होता है और फिर पश्चिमी क्षेत्र के कुछ हिस्सों की जलापूर्ति आज भी यही पानी करता है! इसी देवधरम टेकरी के बचे हुए हिस्से में पितरेश्वर श्री हनुमान धाम मन्दिर विश्वसनीय और प्रसिद्ध मन्दिर बनाया गया है!

हनुमान जी के भक्त सन २००२ में कैलाश विजय वर्गीय इन्दौर के महापौर हुआ करते थे और उन्हें यह सु-विचार आया कि क्यों न देवधरम-टेकरी पर श्री हनुमानजी की अप्रतिम बड़ी मूर्ति लगाई जाए! यहाँ पर उन्होंने शहर के लोगों से आग्रह किया कि वे ‘पितृ पर्वत’ पर अपने स्वर्गीय परिजनों के नाम से कम से कम एक-एक पौधा लगाएं, जिसकी देखभाल इन्दौर नगर निगम के निगमकर्मी करेंगे! ऐसा हुआ भी, इस कृत्य में इन्दौर के रहवासियों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया और अपने पूर्वजों के नाम से पौधे लगाए एवँ इन्दौर नगर निगम के निगमकर्मीयों ने देखरेख कर पौधों को वृक्ष बनने में महत्वपूर्ण योगदान दिया! इसके लिए इन्दौर नगर निगम के निगमकर्मी बधाई के पात्र हैं!

पितृ-पर्वत का नया नामकरण १८ सालों में लोगों ने पितृ पर्वत पर सैकड़ों पौधे रोपे! जिसमें से कई तो विशाल वृक्ष का रूप ले चुके हैं! यहाँ पर हनुमानजी की मूर्ति स्थापित होने के बाद इस स्थान का नया नामकरण ‘पितरेश्वर हनुमान धाम’ हो गया है! यानी पितृ पर्वत अब पितरेश्वर हनुमान धाम से जाना जाएगा!

इन्दौर के पितरेश्वर हनुमान धाम का इतिहास :

देवी अहिल्या बाई होलकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पितरेश्वर हनुमान धाम की दूरी करीब ३ किलोमीटर है! यह स्थान रेलवे स्टेशन से करीब ११ किलोमीटर और गंगवाल बस स्टैंड से करीब ८ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है! पितरेश्वर हनुमान मूर्ति को लगवाने से लेकर प्राण-प्रतिष्ठा तक का श्रेय कैलाश विजयवर्गीय इन्दौर और इन्दौर नगर निगम के निगमकर्मीयों ने देखरेख कर पौधों को वृक्ष बनने में जो महत्वपूर्ण योगदान दिया, उनकी पूरी टीम को जाता है! पितरेश्वर हनुमान जी धाम का इतिहास भी बेहद दिलचस्प है! संकट कटे मिटे सब पीड़ा जो सुमिरे हनुमत बलबीरा

श्री पितरेश्वर हनुमान धाम की विशेषताएं पितरों की स्मृति में यहाँ एक लाख पौधारोपण किया गया है! श्री पितरेश्वर हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठा कर उन्हें जागृत किया गया है! यहाँ प्राचीन शिव मन्दिर है जिसका जीर्णोद्धार होने के बाद ही इस धाम का निर्माण सम्पूर्ण हो पाया है!

यहाँ प्राचीन सिद्ध भैरव मन्दिर है! मान्यता है कि भैरव की उत्पत्ति शिव के रुधिर से हुई थी! यहाँ हनुमान जी की दो प्रतिमाएँ विराजित हैं १. पूजनीय और २.दर्शनीय! दोनों का अपना विशेष महत्व है! पूजनीय प्रतिमा में माता अंजनी हनुमानजी को गोद में लिए हुए हैं! कहा जाता है रात्रि में हनुमानजी माता की गोद में विश्राम करते हैं! दर्शनीय प्रतिमा अष्टधातु से निर्मित है जो १०८ टन वज़नी है! इसकी चौड़ाई ५४ फ़ुट और ऊँचाई ७१ फ़ुट है! दर्शनीय प्रतिमा में हनुमानजी बैठकर प्रभु श्रीरामजी के सँकीर्तन में लीन हैं! विश्व में हनुमानजी की बैठी हुई यह अति आकर्षक सबसे बड़ी प्रतिमा है!

यह प्रतिमा अष्टधातु से निर्मित दुनियाँ की सबसे ऊँची हनुमान जी की प्रतिमा है! पितरेश्वर हनुमान पीड़ा हरने वाले, सबके मन की मनोकामना पूर्ण करने वाले सँकटमोचक माने जाते हैं!

पितरेश्वर हनुमानजी की इस दर्शनीय प्रतिमा को पूर्ण करने में १२५ कारीगरों को ७ वर्ष का कठिन समय लगा!

प्रतिमा को ग्वालियर से २६४ भागों में लाया गया था जिसे जोड़ने में कारीगरों को ३ वर्ष का समय लगा! प्रतिमा पर ७ चक्र मौजूद हैं जिनसे ब्रह्मांड की ऊर्जा प्रवाहित होती है! श्री पितरेश्वर हनुमान जी से जो भी भक्त सच्चे मन से जो कुछ मांगते हैं, हनुमान जी उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करते हैं!

श्री हनुमानाष्टक :

बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो ॥१॥

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो
चौंकि महामुनि साप दियो तब,
चाहिए कौन बिचार बिचारो
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो ॥२॥

अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो॥३॥

रावण त्रास दई सिय को सब,
राक्षसी सों कही सोक निवारो
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाए महा रजनीचर मरो
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥४॥

बान लाग्यो उर लछिमन के तब
प्राण तजे सूत रावन मारो
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो
आनि सजीवन हाथ दिए तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥५॥

रावन जुध अजान कियो तब,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥६॥

बंधू समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो
जाये सहाए भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत संहार॥७॥

काज किये बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसे नहिं जात है टारो
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कछु संकट होए हमारो ॥८॥

॥ दोहा ॥

लाल देह लाली लसे,
अरु धरि लाल लंगूर
वज्र देह दानव दलन,
जय जय जय कपि सूर॥

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

आप देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराज्यीय हवाई अड्डे पर पहुँच जाते हैं, तो यहाँ से श्री पितरेश्वर हनुमानजीधाम मन्दिर तक पहुँचने के लिए टैक्सी या कैब किराए पर लें! हवाईअड्डे से ३ किलोमीटर की दूरी तय करके आप पाँच मिनट्स में पहुँच जाओगे श्री पितरेश्वर हनुमानजी धाम मन्दिर!

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

रेल से आप रेलवे स्टेशन उतरकर आसानी से ११ किलोमीटर तक पहुँचने के लिए ऑटो या कैब किराए पर लेकर पहुँचें श्री पितरेश्वर हनुमानजी धाम मन्दिर!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

दिल्ली से अपनी कार अथवा बस द्वारा श्री पितरेश्वर हनुमानजी धाम मन्दिर आने के लिए दिल्ली के ISBT अन्तर्देशीय बस स्थानक से राष्ट्रीय राजमार्ग NH: ४४ से ८७५ किलोमीटर यात्रा करके १५ घण्टे २३ मिनट् में पहुँचोगे श्री पितरेश्वर हनुमानजी धाम मन्दिर!

श्री हनुमानजी की जय हो! जयघोष हो!!

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