श्री शनैश्चराय भगवान मन्दिर कुचनूर, तमिलनाडू भाग:३२४,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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श्री शनैश्चराय भगवान मन्दिर, तिरुनल्लार, उथामापालयम, थेनी मार्ग, कुचनूर, तमिलनाडू भाग:३२४

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिकस्थल :भ्रामराम्बा देवी अम्मावारी शक्ति पीठ मन्दिर, श्री सैलम, आँध्र प्रदेश! यदि आपसे उक्त लेख छूट गया या रह गया हो तो आप कृपया करके प्रजा टूडे की वेब साईट पर जाकर www.prajatoday.com धर्मसाहित्य पृष्ठ पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजाटूडे समाचारपत्र के अति-विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं:

श्री शनैश्चराय भगवान मन्दिर, तिरुनल्लार, उथामापालयम, थेनी मार्ग, कुचनूर, तमिलनाडू भाग:३२४

श्री शनैश्चराय भगवान मन्दिर, कुचानूर सुयाम्बु श्री शनैश्चर भगवान परमेश्वर : शनि
शनेश्वर भगवान मन्दिर, तमिलनाडु के कुचानूर शनैश्चर भगवान मन्दिर चेन्नई के पास भगवान शनि को समर्पित एकमात्र मन्दिर है। यह मन्दिर खूबसूरत मन्दिरों में से एक है और चेन्नई के नवग्रह मन्दिरों में से एक है। तिरुनल्लार शनिस्वरन मन्दिर दक्षिण भारत में सबसे प्रसिद्ध भगवान शनि देव मन्दिर को गिना जाता है।

मन्दिर के बारे :

मन्दिर के बारे में यह मन्दिर भारत के सबसे सुन्दर शनि मन्दिरों में से एक है और तमिलनाडु में नवग्रह मन्दिरों में अग्रणी गिना जाता है। तीर्थ के मुख्य देवता भगवान शिव, देवी पार्वती देवी और भगवान शनि देव भगवान हैं। यहां भगवान शिव को दरबारनेश्वर और देवी पार्वती को प्रणमाम्बिका या बोगामर्थ पून मूलयाल के नाम से जाना जाता है। तीर्थ के अन्य देवता स्वर्ण विनायक, भगवान सुब्रमणेश्वर स्वामी और त्यागराज हैं। शनिदेव के बुरे प्रभाव का सामना करने वाले भक्तों को मन्दिर के आस पास एक दिन और रात रहना चाहिए। शनैश्चराय मन्दिर श्री दरबानयेश्वर मन्दिर के नीचे है और हजारों श्रद्धालु इस मन्दिर में आते हैं। यह पूरे दक्षिण भारत में सबसे शक्तिशाली मन्दिरों में से एक माना जाता है। स्थानीय लोगों में यह धारणा है कि जो कभी भी यात्रा करता है, उसकी इच्छाएँ पूरी नहीं होती हैं तो वह यदि शनैश्चराय मन्दिर आता है तो उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं ।

पूजा समय :

दिन सुबह शाम सोमवार- रविवार प्रातःकाल ०६:०० से दोपहर ०१:०० और सन्ध्याकाल ०४:०० – ०९:०० बजे रात्रि तक!

घर के मन्दिर में नहीं रखते शनि मूर्ति:

सनातन सँस्कृति में पूजा-पद्धति का बड़ा महत्व है। मन की शाँति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे लोग इसके लिए पूजा- पाठ और ईश्वर का ध्यान करते हैं। सनातनी परँपरा के अनुयायी अपने घरों के मन्दिर में देवी- देवताओं की प्रतिमा रखकर उन्हें पूजते हैं। आपने घर के मन्दिर में कई देवी-देवताओं की मूर्ति देखी होगी, लेकिन क्या आपने कभी शनि देव महाराज की मूर्ति घर के मन्दिर में देखी है, तो जवाब है नहीं। दरअसल, शास्त्रों के अनुसार घर पर शनि की प्रतिमा को नहीं रखा जाता है।

शनि की प्रतिमा को आइए जानते हैं:

इसलिए घर में नहीं रखनी चाहिए शनिदेव की प्रतिमा! शास्त्र के अनुसार शनिदेव की मूर्ति घर के मन्दिर में नहीं रखनी चाहिए बल्कि इनकी पूजा घर के बाहर किसी मन्दिर में ही करने का विधान बताया गया है। मान्यता है कि शनिदेव को श्राप मिला हुआ है कि वे जिस भी किसी को देखेंगे, उसका अनिष्ट हो जाएगा। शनिदेव की दृष्टि से बचने के लिए घर पर उनकी मूर्ति नहीं लगानी चाहिए। अगर आप मन्दिर में शनिदेव के दर्शन करने जाएं तो उनके पैरों की तरफ देखें ना कि उनकी आंखों में आंख डाल कर उनके दर्शन करें। ऐसे में यदि आप घर में शनि देव की पूजा करना चाहते हैं तो उनका मन में स्मरण करें। साथ ही शनिवार को हनुमान जी की भी पूजा करें और शनिदेव को भी याद करें। इससे भी शनि प्रसन्न होते हैं।

राहु और केतु, शनिदेव के अलावा इनकी मूर्तियाँ भी ना रखें घरों पर शनि देव के अलावा घर में राहु- केतु, भैरव और नटराज की मूर्तियों को भी नहीं रखा जाता है। इनकी भी आराधना घर के बाहर की जाती है। हालांकि आप घर पर रहते हुए अपने मन में इनका ध्यान कर सकते हैं।

दशरथ कृत शनि देव कथा :

एक समय था जब पृथ्वी पर रघुवंशी साम्राज्य फैला हुआ था उस समय महाराज दशरथ राजा हुआ करते थे उस समय एक घटना हुई थी जिसमें शनि देव ने चंद्रमा को दंड देने के लिए ग्रहों का चक्कर लगाना शुरू कर दिया था तो जैसा-जैसे शनि देव धरती और उसपर पड़ने वाले छाया जो ग्रहों से आती है उनके ऊपर आ रहे थे तो ऋषि मुनियों ने राजा दशरथ को संकेत दिये की अगर शनि देव अगर पूरी तरह इन ग्रहों पर आ गए तो धरती पर बहुत ही बड़ा सूखा पड़ेगा जिससे अनगिनत जाने चली जाएंगी।

इस विनाश को रोकने के लिए शनि देव को रोकना बहुत जरूरी था इसलिए एक राजा होते हुए दशरथ जी ने शनि देव को रोकने की ठानी और वो उन्हे रोकने के लिए निकाल दिये जिसके बाद उनके और शनि देव के बीच युद्ध हुआ पर उसमें राजा दशरथ हार गए और शनि देव को नहीं रोक पाये इसलिए शनि देव को रोकने और उन्हे प्रसन्न करने के लिए एक स्तुति गाई। जिससे शनि देव प्रसन्न हो गए और यह बताया की जो भी मनुष्य इस शनि देव की दशरथ स्तुति का पाठ करेगा वह सभी कष्ट, संकटों से मुक्त हो जाएगा।

इसलिए अगर आप भी हर तरह के संकट से चाहे वह कुछ भी क्यूं ना हो इसके लिए शनि देव की दशरथ स्तुति हर शनिवार को उनके आगे गा सकते हैं।

दशरथ कृत शनि चालीसा :

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च।नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।

नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।

नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम:।नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।

नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते।सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च।।

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते।नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते।।

तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च।नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे।तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।

देवासुरमनुष्याश्च सिद्घविद्याधरोरगा:।त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।

प्रसाद कुरु मे देव वाराहोऽहमुपागत।एवं स्तुतस्तद सौरिग्र्रहराजो महाबल:।।

दशरथ स्तुति शनि देव हिन्दी अनुवाद :

हे श्यामवर्णवाले, हे नील कण्ठ वाले।कालाग्नि रूप वाले, हल्के शरीर वाले॥स्वीकारो नमन मेरे, शनिदेव हम तुम्हारे।सच्चे सुकर्म वाले हैं, मन से हो तुम हमारे॥
स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे॥हे दाढ़ी-मूछों वाले, लम्बी जटायें पाले।हे दीर्घ नेत्र वाले, शुष्कोदरा निराले॥भय आकृति तुम्हारी, सब पापियों को मारे।
स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे॥

हे पुष्ट देहधारी, स्थूल-रोम वाले।कोटर सुनेत्र वाले, हे बज्र देह वाले॥तुम ही सुयश दिलाते, सौभाग्य के सितारे।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे॥

हे घोर रौद्र रूपा, भीषण कपालि भूपा।हे नमन सर्वभक्षी बलिमुख शनी अनूपा ॥हे भक्तों के सहारे, शनि! सब हवाले तेरे।हैं पूज्य चरण तेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

हे सूर्य-सुत तपस्वी, भास्कर के भय मनस्वी।हे अधो दृष्टि वाले, हे विश्वमय यशस्वी॥विश्वास श्रद्धा अर्पित सब कुछ तू ही निभाले।स्वीकारो नमन मेरे। हे पूज्य देव मेरे॥

अतितेज खड्गधारी, हे मन्दगति सुप्यारी।तप-दग्ध-देहधारी, नित योगरत अपारी॥संकट विकट हटा दे, हे महातेज वाले।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

नितप्रियसुधा में रत हो, अतृप्ति में निरत हो।हो पूज्यतम जगत में, अत्यंत करुणा नत हो॥हे ज्ञान नेत्र वाले, पावन प्रकाश वाले।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

जिस पर प्रसन्न दृष्टि, वैभव सुयश की वृष्टि।वह जग का राज्य पाये, सम्राट तक कहाये॥उत्तम स्वभाव वाले, तुमसे तिमिर उजाले।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

हो वक्र दृष्टि जिसपै, तत्क्षण विनष्ट होता।मिट जाती राज्यसत्ता, हो के भिखारी रोता॥डूबे न भक्त-नैय्या पतवार दे बचा ले।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

हो मूलनाश उनका, दुर्बुद्धि होती जिन पर।हो देव असुर मानव, हो सिद्ध या विद्याधर॥देकर प्रसन्नता प्रभु अपने चरण लगा ले।स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे॥

होकर प्रसन्न हे प्रभु! वरदान यही दीजै।बजरंग भक्त गण को दुनिया में अभय कीजै॥सारे ग्रहों के स्वामी अपना विरद बचाले।स्वीकारो नमन मेरे। हैं पूज्य चरण तेरे॥

इति राजा दशरथ कृतं शनीचलीसा समाप्त :

पता :

श्री शनैश्चर भगवान मन्दिर, उथामापालयम, थेनी मार्ग, कुचनूर, थेनी, तमिलनाडू पिनकोड : 625515

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें :

कुचानूर के शनेश्वर मन्दिर हवाईजहाज से मदुरै अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है जो १३५ किलोमीटर दूर है। यहाँ से कैब द्वारा आप सवा दो घण्टों में पहुँच सकते हैं मन्दिर।

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

ट्रेन से थेनी रेलवे स्टेशन है जो २१.३ किलोमीटर दूर है, स्थानीय बस ऑटो कैब आसानी से मिलती हैं।

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें :

दिल्ली के ISBT से आप अपनी कार बाइक या बस से आते हैं तो NH : ४४ द्वारा आप २६३९.७ किलोमीटर की यात्रा करके ४६ घण्टे में पहुँच सकते हैं शनि देव मन्दिर। सड़क द्वारा कुचानूर बस स्टैंड जो मन्दिर से ६७ मीटर की दूरी पर है, कई निजी वाहन भी सीधे मन्दिर के लिए किराए पर आसानी से उपलब्ध हैं।

शनि देव की जय हो। जयघोष हो।।

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