श्री स्वामीनारायण मन्दिर, कालूपुर अहमदाबाद, गुजरात भाग : १८८ ,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल: श्री स्वामीनारायण मन्दिर कालूपुर, अहमदाबाद, गुजरात भाग:१८८

आपने पिछले भाग में पढ़ा भारत के धार्मिक स्थल : स्वामीनारायण अक्षरधाम मन्दिर, गाँधी नगर, गुजरात! यदि आपसे उक्त लेख छूट गया अथवा रह गया हो और आपमें पढ़ने की जिज्ञासा हो तो आप प्रजा टूडे की वेब साईट www. prajatoday.com पर जाकर, धर्म- साहित्य पृष्ठ पर जाकर सकते हैं!

आज हम आपके लिए लाए हैं : भारत के धार्मिक स्थल: श्री स्वामीनारायण मन्दिर कालूपुर, अहमदाबाद, गुजरात भाग:१८८

श्री स्वामी नारायण मन्दिर “स्वामीनारायण” सम्प्रदाय का प्रथम मन्दिर है! यह अहमदाबाद के कालूपुर क्षेत्र में स्थित है, जो गुजरात, भारतवर्ष का सबसे बड़ा शहर है!इस सँप्रदाय के संस्थापक स्वामीनारायण के निर्देश पर बनाये गए थे!

श्री स्वामीनारायण मन्दिर कालूपुर अहमदाबाद, गुजरात के नर- नारायण देवगाडी के मुख्यालय से सम्बन्धित है! नर नारायण देव, राधा कृष्ण देव, धर्मदेव, भक्ति माता और हरिकृष्ण की स्थापना की तिथि विक्रम सम्वत १८७६ है! तदनुसार २४ फरवरी १८२२ श्री स्वामीनारायण की इच्छा के अनुसार, स्वामीनारायण सँप्रदाय का प्रशासन दो सीटों में विभाजित है! नर-नारायण देवगाडी और लक्ष्मी-नारायण देवगाडी! यह मन्दिर नर नारायण देवगाडी का मुख्यालय है!

मन्दिर का इतिहास :

नक्काशीदार लकड़ी का खम्भा १८६६ में स्वामीनारायण संप्रदाय के इस पहले मन्दिर के निर्माण के लिए भूमि ब्रिटिश शाही सरकार द्वारा उपहार में दी गई थी! इस तीर्थ स्थान के निर्माण-कार्य श्री स्वामीनारायण ने व्यक्तिगत रूप से आनंदानंद स्वामीजी को सौंपा था! यह श्री स्वामीनारायण सम्प्रदाय का प्रथम मन्दिर था! जिसका निर्माण शास्त्र के नियमों के अनुसार शुद्ध बर्मा-सागौन में जटिल नक्काशी के साथ किया गया था और मूर्तिकला के साथ देवताओं के, शुभ प्रतीकों और स्वयँसिद्ध धर्म और भारतीय सँस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले धार्मिक प्रतीकों का चित्रण किया गया था! माना जाता है कि यह मन्दिर गुजरात और भारत के सामाजिक-धार्मिक इतिहास में एक मूल्यवान साँस्कृतिक धरोहर है!

ब्रिटिश सरकार के साथ सम्बन्ध :

एक ब्रिटिश अधिकारी, डनलप श्री स्वामीनारायण और उनके अनुयायियों की गतिविधियों से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने सरकार की ओर से इस मन्दिर के निर्माण के लिए अहमदाबाद के कालूपुर में ५,000 एकड़ ज़मीन दी! जब मन्दिर बनकर तैयार हुआ तो वो अंग्रेज़ अधिकारी मन्दिर से इतना प्रभावित हुआ कि उसने मन्दिर को १०१ तोपों की सलामी दिलवाई!

जब ब्रिटिश सरकार कालूपुर में एक रेलवे स्टेशन बनाना चाहती थी, तो मन्दिर ने उस भूमि का हिस्सा लौटा दिया, जहाँ आज कालूपुर रेलवे स्टेशन है! सरकार ने नारायण नगर गांव में १,000 एकड़ भूमि देकर मन्दिर को मुआवजा दिया! यद्यपि मन्दिर के ब्रिटिश सरकार के साथ बहुत अच्छे सम्बन्ध थे, मन्दिर में लकड़ी की नक्काशी का हिस्सा १८५७ के विद्रोह को दर्शाता है , जिसे अक्सर भारत की पहली स्वतन्त्रता सँग्राम के रूप में जाना जाता है!

बर्मा सागौन की लकड़ी पर आधारित इसकी वास्तुकला के साथ, हर रंग का मेहराब और ब्रैकेट एक चमकदार अलग छाया है, कुछ ऐसा जो अधिकांश स्वामीनारायण मन्दिरों में दिखता है!

इण्डिया-गाइड-गुजरात की लेखिका अँजलि देसाई के अनुसार, मन्दिर अपने सभी रँगों और भव्य नक्काशी के साथ एक परी कथा जैसा दिखता है जो हर लकड़ी के ब्रैकेट, स्तम्भ और मेहराब को सुशोभित करता है! दीवाली के अगले दिन मन्दिर में लाखों लोग आते हैं! मन्दिर में एक भूमन्ज़िला गेस्टहाउस है जो वातानुकूलित है और इसके परिसर में एक पूरी तरह सुसज्जित चिकित्सा क्लिनिक भी है!

कैसे पहुंचें स्वामीनारायण मन्दिर :

मन्दिर पुराने शहर के पूर्वी भाग में कालूपुर के पास स्थित है! अहमदाबाद, वायुमार्ग, रेलमार्ग और सड़कमार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है! रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और हवाई अड्डे से मन्दिर के लिए बहुत सारी टैक्सी, कैब और ऑटो रिक्शा भी उपलब्ध हैं।

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचे

सरदार वल्लभभाई पटेल हवाई अड्डे से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों उड़ान के कनेक्शन्स हैं!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचे

निकटतम रेलवे स्टेशन कालूपुर रेलवे स्टेशन है!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचे

दिल्ली से आप बस अथवा अपनी कार से स्वामीनारायण मन्दिर आते हैं तो आप राष्ट्रीय राजमार्ग NH-४८ से ९४३.१ किलोमीटर की दूरी तय करके आप १६ घण्टे ४० मिन्ट्स में पहुँच जाओगे! राज्य सरकार और निजी बसें विभिन्न शहरों और कस्बों से चलती हैं! शहर के प्रमुख बस स्टॉप गीता मन्दिर और पालड़ी हैं!

श्री स्वामीनारायण की जय हो! जय घोष हो!!

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