तिरुपति बालाजी मन्दिर काँचीपुरम, आँध्रप्रदेश भाग:३१९,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल : तिरुपति बालाजी मन्दिर काँचीपुरम, आँध्रप्रदेश भाग:३१९

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिक स्थल : श्री सूर्य देव मन्दिर, मोढ़ेरा, अहमदाबाद, गुजरात! यदि आपसे उक्त लेख छूट गया या रह गया हो तो आप कृपया करके प्रजा टूडे की वेब साईट पर जाकर www.prajatoday.com धर्मसाहित्य पृष्ठ पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजाटूडे समाचारपत्र के अति-विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं।

भारत के धार्मिक स्थल : तिरुपति बालाजी मन्दिर काँचीपुरम, आँध्रप्रदेश भाग:३१९

पाठकों को शारदीय नवरात्रि पर माँ कालरात्री देवी के पावन दिवस की हार्दिक बधाइयाँ, देवी माता रानी आपके सकल मनोरथ पूर्ण करे!

पाठकों को यह ज्ञात होगा कि पण्डित ज्ञानेश्वर हँस “देव” जो आपके लिए प्रतिदिन मन्दिरों पर लेख ले कर आते हैं; मुझे अनेक मेरे चाहने वालोँ ने पूछा आप इतने मन्दिर घूम चुके? आप कैसे लिख पाते हो? तो आपको बता दें यह शोधकार्य है, जिसमें मेरी मदद कुछ तो मन्दिर जानेवालों से, कुछ गुग्गल से, मेरा लेख पूर्ण होता है! जैसा कि आज के लेख में हमारे दूरदर्शन के तत्कालीन डायरेक्टर श्री के०एस०शर्मा जो बाद में प्रसार भारती के सी० ई० ओ० भी बने! जब वो प्रसार भारती के निर्देशक बने तो हम उनसे मिलने गए; वो गोल्फ़ कैप पहने हुए थे, गुलदस्ता थमाते हुए बधाई के साथ-साथ मैंने निर्भीकता से पूछ ही लिया, भाई साहब, ख़ैरियत तो है? यह बाल क्यों कटवाए? वो मुस्कुराए और बोले मैंने मन्नत माँगी थी कि मैं दूरदर्शन निर्देशक बनने से पहले तिरुपति बाला जी के दर्शन कर आऊँ, वहाँ परम्परनुसार मैंने मुण्डन करवाया है! आँध्रप्रदेश के चित्तूर ज़िले में स्थित ये मन्दिर सिर्फ दक्षिण भारत में ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। तिरुपति पहाड़ की सातवीं चोटी पर स्थित यह स्वामी वेंकेटेश्वर मन्दिर, श्री स्वामी पुष्करिणी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है।

दरअसल वेंकट पहाड़ी का स्वामी होने के कारण ही इन्हें वेंकटेश्वर कहा जाने लगा। मुख्य मन्दिर के प्रांगण में स्थित गर्भगृह में भगवान वैंकटेश्चर की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर परिसर में खूबसूरती से बनाए गए अनेक द्वार, मंडपम और छोटे मन्दिर हैं जो अपने आप में काफी महत्व रखते हैं।

इसके अलावा मन्दिर परिसर में मुख्य दर्शनीय स्थल के रूप में पडी कवली महाद्वार संपंग प्रदक्षिणम, कृष्ण देवर्या मंडपम, रंग मंडपमध्वजस्तंभ मंडपम, नदिमी पडी कविली, विमान प्रदक्षिणम, तिरुमला राय मंडपम, आईना महल आदि हैं, जो न सिर्फ श्रद्धा की दृष्टिकोण से बल्कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। तिरुपति का भक्तिमय वातावरण मन को श्रद्धा और आस्था से भर देता है। पुराण व अल्वर के लेख जैसे प्राचीन साहित्य स्रोतों के अनुसार कलयुग में भगवान वेंकटेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात ही मुक्ति संभव है।

इसीलिए पचास हज़ार से भी अधिक श्रद्धालु इस मन्दिर में प्रतिदिन दर्शन के लिए आते हैं। तिरुपति बालाजी मन्दिर का इतिहास ९वीं शताब्दी से प्रारंभ होता है, जब काँचीपुरम के शासक वँश पल्लवों ने इस स्थान पर अपना आधिपत्य स्थापित किया था। आपको बता दें कि भारत के सबसे अमीर मन्दिरों में इस मंदिर का नाम शीर्ष पर आता है। भारतवर्ष के सबसे अमीर मन्दिरों में से एक और एक बहुत ही पावन पुनीत पवित्र हिंदू तीर्थ स्थल तिरुमाला पहाड़ियों में भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी का मन्दिर, आँध्रप्रदेश राज्य में स्थित है। यह साल के हर महीने हजारों भक्तों को विशेष उत्सव के अवसरों पर देखता है। इस मन्दिर की ख्याति व्यापक है, और बहुत से लोग जीवन में कम से कम एक बार भगवान बालाजी के मन्दिर की तीर्थयात्रा करते हैं। उन लोगों के लिए, जो अभी तक मन्दिर नहीं गए हैं, यह जानने में मदद करता है कि तिरुपति बालाजी मन्दिर तक कैसे पहुंचा जाए। लोकप्रिय मन्दिर तक भारत के सभी प्रमुख शहरों से सड़क, हवाई और रेल द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। और अँतिम यात्रा पैदल ही करनी पड़ती है।

पैदल यात्रा :तिरुपति बालाजी मन्दिर:

चूंकि भगवान तिरुपति बालाजी का पवित्र मंदिर एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है, पारंपरिक रूप से, तीर्थयात्री भक्ति के कारण या किसी इच्छा / मन्नत को पूरा करने के लिए पैदल ही तिरुमाला पहाड़ियों पर चढ़ना पसंद करते हैं। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, ये दो पत्थर के फुटपाथ हैं जिन्हें सोपानमार्ग के नाम से जाना जाता हैपहाड़ी के आधार से पहाड़ी की चोटी तक निर्मित मंदिर। पूरा रास्ता 11 किमी लंबा है और अधिकांश आगंतुक इसका उपयोग करते हैं। श्रीवारी मेट्टू नामक एक अन्य सोपानमार्ग चंद्रगिरि से शुरू होता है, और केवल 6 किमी के मार्ग को कवर करता है। तीर्थयात्रियों के आराम के लिए तीर्थस्थल के अधिकारी टॉयलेट, सुरक्षा, शौचालय, कैंटीन और चिकित्सा सुविधाओं आदि का रखरखाव करते हैं। पहाड़ी पर पैदल जाने के इच्छुक तीर्थयात्रियों के लिए सामान के नि:शुल्क स्थानान्तरण की सुविधा भी उपलब्ध है।

तिरुपति बालाजी स्तुति :

संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे‚

हम सबके प्राण आधार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

आराम सुखों के दाता हो तुम‚ सबके भाग्य विधाता हो‚

संसार का सार तुम्हीं तो हो‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

जग अपनी मस्ती में जीता है‚ तुम बिन जीवन यह रीता है‚

हम सबके बस आधार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

तुम सब के सृजन हारे हो‚ भरते सबके भण्डारे हो‚

सुख का केवल आधार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

हो गगन तुम्हीं पाताल तुम्हीं‚ सूरज चन्दा प्रकाश तुम्हीं‚

इच्छाचारी महादेव हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

प्रदान करो अपनी भक्ति‚ भर दो जीवन में तुम शक्ति‚

बल बुद्धि के भण्डार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

संसार के पालन हार हो तुम‚ बाला जी तुम्हारी जय होवे।

पता: तिरुपति बालाजी मन्दिर

ज़िला: तिरुपति बालाजी मन्दिर, ज़िला: चित्तूर, काँचीपुरम, आँध्रप्रदेश!

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें :

तिरुमाला का निकटतम हवाई अड्डा रेनिगुंटा के पास है, जो तिरुपति से १६ किलोमीटर और भगवान वेंकटेश्वर मन्दिर, तिरुमाला से ३९ किलोमीटर दूर है। नई दिल्ली, हैदराबाद, विशाखापत्तनम और बेंगलुरु जैसे प्रमुख भारतीय शहरों के लिए सीधी उड़ानें उनके हवाई अड्डे से संचालित होती हैं। केंद्र सरकार द्वारा रेनिगुंटा के हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपग्रेड किया गया है।

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

रेल द्वारा तिरुमाला का अपना कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। बल्कि, पर्यटकों को तिरुमाला से २६ किलोमीटर या उससे अधिक दूर स्थित तिरुपति में उतरना पड़ता है। तिरुपति का रेलवे स्टेशन बहुत विशाल है। यह पाँच प्लेटफार्मों और यहां तक ​​​​कि एक एस्केलेटर के साथ संपन्न है। भारत के सभी महानगरों की ट्रेनें यहां रुकती हैं।

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें :

दिल्ली के ISBT से आप अपनी कार बाइक या बस से आते हैं तो NH : ४४ द्वारा आप २,१८०.५ किलोमीटर की यात्रा करके ३८ घण्टे १० मिनट्स में पहुँच सकते हैं तिरुपति बालाजी मन्दिर।

तिरुमाला और तिरुपति के लिए कई बसें चलती हैं। बस सेवा हर २ मिनट में एक बस की आवृत्ति के साथ उपलब्ध है। चेन्नई, वेल्लोर और बेंगलुरु से भी सीधी बसें तिरुपति से चलती हैं। तिरुपति से, चेन्नई, विशाखापत्तनम, हैदराबाद और बैंगलोर से निजी बसों और सशुल्क टैक्सी सेवाओं का विकल्प भी चुन सकते हैं।

तिरुपति बालाजी की जय हो। जयघोष हो।।

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