उत्तराखंड एक झलक में, उत्तराखंड की प्रमुख खबरें…

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@ देहरादून उत्तराखंड 

उत्तराखंड एक झलक में, उत्तराखंड की प्रमुख खबरें

लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन के 96वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीते वर्षों में मैंने कई बैच के सिविल सर्विस के अधिकारियों से बात और मुलाकात की लेकिन आपका जो बैच है मेरी दृष्टि में बहुत स्पेशल है। आप भारत की आजादी के 75वें वर्ष में इस अमृत महोत्सव के समय अपना काम शुरू कर रहे हैं। हममें से बहुत से लोग उस समय नहीं होंगे जब भारत अपनी आजादी के 100वें वर्ष में प्रवेश करेगा।

लेकिन आपका बैच उस समय भी रहेगा। पीएम मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी हमेशा कहा करते थे कि अगर आपके निर्णय से समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को लाभ होगा तो फिर आप उस निर्णय को लेने में संकोच मत करिएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, आप जो भी निर्णय करें जो भी व्यवस्था परिवर्तन करें तो पूरे भारत के संदर्भ में अवश्य सोचें, क्योंकि हम ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज को रिप्रेजेंट करते हैं।

हमारे दिमाग में निर्णय भले लोकल होगा लेकिन सपना समग्र देश का होगा। आप अकेले नहीं हैं, 400 जिलों में आपकी ये सोच, आपका ये प्रयास, आपका ये कदम, आपकी पहल आधे हिंदुस्तान को प्रभावित कर सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे बताया गया है कि आपकी एकेडमी में भी ट्रेनिंग का स्वरूप अब मिशन कर्मयोगी पर आधारित कर दिया गया।मुझे विश्वास है, इसका भी बहुत लाभ आप सभी को मिलेगा। पीएम ने कहा कि आप प्रार्थना कीजिए कि आपको कोई आसान काम न मिले, आपको लगेगा यह कैसा प्रधानमंत्री है जो हमें ऐसी सलाह दे रहा है।

दरअसल आप हमेशा चौलेंजिंग जॉब का इंतजार कीजिए। क्योंकि उसका आनंद ही कुछ और होता है। आप सैकड़ों लोगों की शक्ति देश के अलग-अलग जिलों में एक साथ लगेगी। मालूम हो कि 96वें फाउंडेशन कोर्स में एलबीएस का पहला कॉमन फाउंडेशन कोर्स है, जो कर्मयोगी के सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें नई शिक्षा, और पाठयक्रम पर आधारित है, इस बैच में 16 सेवाओं के 488 ओटी और तीन राँयल भूटान सर्विसेज, प्रशासनिक, पुलिस और वन के अधिकारी शामिल हैं।

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शनिवार को देश के माननीय उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू एक दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुँचे। माननीय उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु ने हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में पहुँचकर दक्षिण एशियाई शांति एवं सुलह संस्थान का शुभारंभ किया।यह संस्थान दक्षिण एशियाई देशों के बीच तमाम राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी सकारात्मक व्यवहार की स्थापना को प्रेरित करता है। उन्होंने देश के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों की याद में बनी शौर्य दीवार पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही उन्होंने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में स्थापित एशिया के प्रथम बाल्टिक सेंटर का अवलोकन किया।

उन्होंने बाल्टिक देशों में सेंटर द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों को सराहा।कार्यक्रम में उपस्थित माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में  कहा कि देव संस्कृति विश्विद्यालय मुझे एक मंदिर जैसा लगता है।यहाँ भारतीय संस्कृति पर जिस वैज्ञानिक तरीके से शोध हो रहा है, उसका नेतृत्व देवसंस्कृति विवि करेगा, ऐसा मुझे विश्वास है। दक्षिण एशियाई शांति एवं सुलह संस्थान शांति प्रेम और खुशहाली के लिए कार्य करेगा।

उन्होंने कहा जिस तरह पं राम शर्मा आचार्य जी ने शांति एवं सौहाद्र्र के लिए कार्य किया है, उसे यह सेंटर आगे बढायेगा। देव संस्कृति विश्वविद्यालय सच्चे अर्थों में देश और विश्व के कोने-कोने से आए विद्यार्थियों के अध्ययन, अध्यापन एवं शोध के क्षेत्र में नित्य नई ऊंचाइयां छू रहा है। दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति के गहरे पद चिन्ह दिखाई देते हैं। इस क्षेत्र में आज दक्षिण एशियाई शांति एवं सुलह संस्थान के खुलने से नई शुरुआत हुई है।

अपने संबोधन में मा0 राज्यपाल ने  कहा कि भारतीय सभ्यता संस्कृति एवं इतिहास को गहराई से जानने व समझने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान होना बहुत जरूरी है।कार्यक्रम में  एडीजी संजय गुंज्याल, आयुक्त गढ़वाल मण्डल सुशील कुमार, आईजी गढ़वाल के0एस0 नगन्याल, जिलाधिकारी डॉ0 आर राजेश कुमार, डीआईजी/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जन्मेजय खंडूरी, अपर जिलाधिकारी शिव कुमार बरनवाल, उप जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे के अलावा  अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

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