उत्तराखंड पौड़ी जिले के डबरालस्यु क्षेत्र मे हल्दी का बंपर उत्पादन

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प्रजा दत्त डबराल @ नई दिल्ली

सुना है ” पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है । इस संसार में कोई भी जन्म से न ही प्रतिभावान,गुणवान और न ही बुद्धिमान होता है,मनुष्य अपनी कड़ी मेहनत और अपनी सच्ची लगन से किए गये अपने कार्यो को इतना अधिक ऊंचा कर लेता है कि समाज में उसे और उसके काम को मान-सम्मान और ख्याति तो मिलती ही है, साथ ही वो दूसरे लोगों के लिए प्रेरक भी बन जाते हैं।

ऐसी ही शख्यितों में दिल्ली एवं उत्तराखंड से एक नाम सामने उभरकर आता है सुभाष डबराल का जिन्होंने अपनी मेहनत से लोगों को यह विश्वास दिलाया है कि सच्ची लगन और कठोर परिश्रम ही सफलता की कूंजी है।अगर इंसान मेहनत करने की सोच ले तो कहां से कहां पहुंच सकता है।

सुभाष डबराल ने प्रजा टुडे के पत्रकार को बताया की डबरालस्यु के डिंडा कठूर गाँव में चार महिला कास्तकारो द्वारा गत वर्ष 500 किलो हल्दी का रोपण किया गया था। लगभग 600 किलो हल्दी खेतों से निकाली जा चुकी है। जिसमे 350 किलो हल्दी Rs 42/- प्रति किलो के हिसाब से  बिक गई है। लगभग 1200-1500 किलो हल्दी अभी खेतों में है।आर्डर के अनुसार सूखी और हल्दी को पिसवाकर उचित दाम पर सेल  करने की तैयारी है। पहली बार डबरालस्यु क्षेत्र मे किसी गाँव मे हल्दी का बंपर उत्पादन हुआ है। गाँव के सभी लोग अत्यधिक उत्साहित है। आसपास के गाँव के लोग भी आश्चर्य चकित है और प्रेरित हो रहे है।

डिंडा गाँव मे भी लगभग 150 फलदार पेड़ो का भी रोपण किया गया है। जिसमे नींबू, मौसमी, संतरा, सेब, हेजल नट ,कीवी इत्यादि प्रमुख हैं। डिंडा गाँव में पानी की बहुत कमी है। लोग लगभग 2 किलो मीटर से पीने का पानी लेकर आते हैं । पानी की इस समस्या को दूर करने के लिए गाँववासियों ने एक पुराने स्रोत को जिन्दा करने का निश्चय किया है।

वर्षो से सूखे इस स्रोत  के ऊपर के हिस्से पर 3-4 खाल चाल बनाई गई है तथा लगभग 250 बांज, देवदार, बाँस,सुरई इत्यादि के पौधों का रोपण किया गया है। पानी का यह स्रोत दोबारा चालू होने लगा है। यह गाँव रोड हेड  से 1.5 किलोमीटर नीचे है। ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा भी बहुत अधिक आ रहा है।

गाँव वासियों लिंक रोड बनाने के लिए प्रशासन एवं अपने क्षेत्र नवनिर्वाचित विधायिका रेनू बिष्ट से भी गुहार लगा रहे हैं। इन सभी कार्यों में डिंडा गाँव के रमेश डबराल और डाबर गाँव के मनोज डबराल (कंटु) का विशेष योगदान रहा है। यह इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट UANA और Save Indian Farmer के सहयोग से सुभाष डबराल  के नेतृत्व में चलाया जा रहा है।

ईमानदार कर्मठ, ईमानदार इसलिए भी बोला जा रहा है की सुभाष डबराल जिस किसी संस्था के साथ जुड़े हैं , वे ईमानदारी और कड़ी मेहनत से उत्तराखंड के कई गांवों में बहुत अच्छे-अच्छे कार्य कर रहे हैं। लोगों को रोजगार भी मिल रहा है और एक नए जीवन जीने का आधार भी,प्रजा टुडे उन संस्थाओं का भी धन्यवाद करती हैं, जो उत्तराखंड के लिए तन-मन और धन से पूरा सहयोग कर रहे हैं और उन्होंने उत्तराखंड के लिए सुभाष डबराल को चुना जिनकी ईमानदारी ही उनका जीवन है और संस्थाएं इसी तरीके से अगर उनका सहयोग करती रहे, जैसा कि हमने क्षेत्र का भ्रमण किया और देखा की उत्तराखंड में कई लोगों को स्वरोजगार मिल रहा है और पलायन की स्थिति में थोड़ा रुकावट देखी गई। 

मिलनसार हंसमुख एवं शांत स्वभाव के सुभाष डबराल बताते हैं की अपनी मेहनत और अपने पितरो ,माता पिता और अपनी पत्नी का विशेष योगदान मानते है। वह मानते है की किसी भी क्षेत्र में दोस्तो, रिश्तेदारों और फैमिली के सपोर्ट के बिना सफल होना संभव नहीं होता और मेरे दोस्त ,रिश्तेदारों और फैमिली नें मुझे हमेशा पूरा सपोर्ट किया है।

6 thoughts on “उत्तराखंड पौड़ी जिले के डबरालस्यु क्षेत्र मे हल्दी का बंपर उत्पादन

  1. हार्दिक शुभकामनाएं डबराल साहब🙏🙏💐💐 आप उत्तराखंड के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं !
    जय देव भूमि…!
    जय उत्तराखंड….!🙏🙏🙏🙋‍♂️🙋‍♂️🙋‍♂️🏡🏡⭐⭐💫💫🎊🎊🎊🌟🌟🌟👍👍⛳⛳⛳🌈🌈🌈🌈🌈✌✌✌👏👏👏👏👏💐💐💐💐💐

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