भारत और डेनमार्क ने भारत में शहरी अपशिष्ट जल परिदृश्य पर जारी किया श्वेत पत्र

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@ नई दिल्ली

जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, डेनमार्क की पर्यावरण मंत्री ली वर्मेलिन और सहकारिता विकास मंत्री फ्लेमिंग मोलर मोर्टेंसन ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ कोपनहेगन में इंटरनेशनल वाटर एसोसिएशन वर्ल्ड वाटर कांग्रेस और प्रदर्शनी 2022 में ‘भारत में शहरी अपशिष्ट जल परिदृश्य’ पर एक श्वेतपत्र जारी किया।

अटल इनोवेशन मिशन नीति आयोग, जल शक्ति मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, इंटरनेशनल एजेंसी इनोवेशन सेंटर डेनमार्क और अकादमिक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे के भागीदारों के साथ शहरी अपशिष्ट जल प्रबंधन पर एक श्वेत पत्र तैयार करने के लिए भारत सरकार के एक बहुविषयक दल का गठन किया गया था। अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए सभी हितधारकों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, यह श्वेतपत्र समग्र रूप से भारत में अपशिष्ट जल उपचार की वर्तमान स्थिति और भविष्य की उपचार संरचनाओं, सह-निर्माण और सहयोग के लिए सामूहिक रूप से तैयार किए गए संभावित रास्तों को दर्शाता है।

एआईएम-नीति आयोग, आईसीडीके, एनसीएमजी और आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञों द्वारा क्यूरेट किया गया, श्वेतपत्र सफलता की कुछ कहानियों, अपशिष्ट जल उपचार की आवश्यकता, मौजूदा बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकियों में सुधार तथा वृद्धि की गुंजाइश, सार्वजनिक भागीदारी दृष्टिकोण के तरीकों, वित्तपोषण और सह-वित्तपोषण के विकल्प, तेजी से डेटा संग्रह के लिए स्मार्ट टेक्नोलॉजी और भारत में शहरी अपशिष्ट जल उपचार की दक्षता बढ़ाने के लिए शीर्ष निकायों के प्रशिक्षण और साझेदारों के माध्यम से प्रसार और क्षमता निर्माण की जानकारी उजागर करता है।

यह श्वेतपत्र भारत और डेनमार्क के बीच ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और अपशिष्ट जल प्रबंधन और उनके द्विपक्षीय संबंधों पर ध्यान देने के साथ हरित रणनीतिक साझेदारी का परिणाम है। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा, समग्र जल प्रबंधन के महत्व को मान्यता देते हुए, हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पानी से जुड़े विभिन्न कार्यों को एक जगह पर लागर 2019 में जल शक्ति नाम से एकीकृत मंत्रालय का गठन किया। इसने भारत में जल प्रबंधन के लिए अधिक तालमेल और सुसंगतता प्रदान की है और हमने जल क्षेत्र में 2024 तक 140 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। सरकार से बड़े पैमाने पर निवेश के साथ, हमने समुदाय केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें समुदाय के स्वामित्व और भागीदारी को सुनिश्चित करने वाले प्रत्येक कार्यक्रम में समुदाय द्वारा कम से कम 10 प्रतिशत राशि का योगदान दिया जाता है।

शैक्षणिक संस्थान- आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास में इंटरनेशनल सेंटर फॉर क्लियर वाटर और इनक्यूबेटर पार्टनर्स- एआईसी- संगम और एआईसी एफआईएसई टीमों का मार्गदर्शन करेंगे। भारत की समस्याओं पर काम करने वाली टीमों को जल विशेषज्ञों के एक सावधानीपूर्वक क्यूरेटेड और शानदार पैनल द्वारा मेंटरशिप सहायता प्रदान की गई। इसके बाद, डेनमार्क के दूतावास ने अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग की साझेदारी से एआईएम- आईसीडीके- 2.0 जल नवाचार चुनौती फिर से आयोजित की।

नेक्स्ट जेनरेशन वाटर एक्शन आईडब्ल्यूए वर्ल्ड वाटर कांग्रेस और प्रदर्शनी 2022 के दौरान और उसके बाद अग्रणी विश्वविद्यालयों और नवाचार केंद्रों से युवा प्रतिभाओं को शामिल करने की महत्वाकांक्षा के साथ एक अंतरराष्ट्रीय पहल है। भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

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