CTIL की पत्रिका की पांचवीं वर्षगांठ के अंक का विमोचन

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@ नई दिल्ली

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान , नई दिल्ली के व्यापार और निवेश कानून केंद्र (CTIL) ने 2 अगस्त, 2022 को कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, रफी मार्ग, नई दिल्ली में अपनी 5वीं वर्षगांठ मनाई और CTIL पत्रिका की पांचवीं वर्षगांठ के अंक का विमोचन किया।

CTIL की स्थापना के पांच साल पूरे होने पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवधि के दौरान केंद्र ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश कानून से संबंधित कानूनी मुद्दों का ठोस और कठिन विश्लेषण प्रस्तुत किया है। भारत सरकार के वाणिज्य विभाग द्वारा भारत में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश कानून क्षमता विकसित करने के साथ-साथ व्यापार और निवेश कानून पर आधारित जानकारी के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने के उद्देश्य से CTIL की स्थापना की गई थी। CTIL पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक आर्थिक कानून के मुद्दों पर विकसित हो रहे विमर्श में शामिल होने और प्रभावित करने में एक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा है। CTIL ने कई सम्मेलन, हितधारक परामर्श, सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भारत सरकार के वाणिज्य सचिव . बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम थे। बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम ने WTO और एमसी 12 पर भारत का परिदृश्य  विषय पर मुख्य भाषण दिया। उन्होंने अपने संबोधन में जिनेवा में WTO के हाल के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के दौरान सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग और आईयूयू फिशिंग की रोकथाम में अपने हितों को संरक्षित करते हुए ‘डील-मेकर’ के रूप में कार्य करने पर भारत के प्रमुख योगदान और सफलताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला-पुरुष, श्रम और पर्यावरण जैसे मुद्दों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका अपेक्षित है और इसे बहुपक्षीय चर्चाओं में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

WTO में भारत के पूर्व-राजदूत और WTO अपीलीय निकाय के पूर्व-अध्यक्ष राजदूत उजल सिंह भाटिया ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून में अपीलीय वकालत: बेंच से विचार विषय पर वर्षगांठ विशिष्ट व्याख्यान दिया। व्याख्यान में राजदूत भाटिया ने WTO अपीलीय निकाय के सदस्य और अध्यक्ष के रूप में अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने WTO डीएसबी रिपोर्टों के अनुपालन की संख्या में वृद्धि के बारे में चर्चा करते हुए, WTO के विवाद निपटान निकाय  की अपीलीय प्रक्रिया की विशिष्टता पर जोर दिया। उन्होंने सार्वजनिक अंतर्राष्ट्रीय कानून और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून के बीच संबंधों पर भी जोर दिया, जो विशेष रूप से वैश्वीकरण के उद्भव और WTO डीएसबी तंत्र को अपनाने के साथ मजबूत हुआ था।

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के अपर सचिव अमित यादव ने व्यापार नीति निर्माण में अकादमिक थिंक टैंक की भूमिका पर एक विशेष भाषण दिया। उन्होंने अपने संबोधन में विशेष रूप से CTIL और वाणिज्य विभाग द्वारा स्थापित अन्य सीआरआईटी केंद्रों द्वारा व्यापार नीति निर्माण में अकादमिक जुड़ाव को लेकर प्रदान की जाने वाली सहायता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने केंद्र के माध्यम से एक संस्थागत स्मृति बनाने के महत्व पर जोर दिया, ताकि सरकार को सुव्यवस्थित निर्णय लेने में सक्षम बनाया जा सके।

सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ के प्रमुख और प्रोफेसर प्रो. जेम्स जे. नेदुम्परा ने स्वागत भाषण दिया और पिछले पांच वर्षों में CTIL द्वारा निभाई गई भूमिका पर चर्चा की, जिसमें हालिया एफटीए वार्ताओं में योगदान भी शामिल है। उन्होंने पिछले पांच वर्षों में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में केंद्र की सहायता के लिए वाणिज्य विभाग और आईआईएफटी के नेतृत्व तथा प्रोत्साहन को लेकर उसे धन्यवाद दिया। इसके बाद आईआईएफटी के कुलपति प्रो. मनोज पंत ने भाषण दिया। उन्होंने देश में शिक्षा और व्यापार नीति को जोड़ने के लिए एक ‘अद्वितीय प्रयोग’ के रूप में CTIL के काम की सराहना की। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, इसके बाद रात्रि भोज हुआ।

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