एसीएस पीएचईडी की अध्यक्षता में हुई एसएलसी की बैठक

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@ जयपुर राजस्थान

राजस्थान में पिछले दो साल में भूमिगत जल का दोहन एक प्रतिशत बढ़ा है। वर्ष 2020 में तैयार ग्राउड वॉटर रिसोर्स एसेसमेंट रिपोर्ट में भूजल दोहन 150 प्रतिशत था, जो वर्ष 2022 में बढ़कर 151 प्रतिशत हो गया है। राहत की बात यह है कि पिछले 20 साल के आंकड़े देखें तो वर्ष 2017 से 2022 के बीच भूजल रिचार्ज बढ़ने, भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं तथा फव्वारा पद्धति से सिंचाई जैसे कदमों से भूजल स्तर में स्टेबिलिटी बढ़ी है। 
 
अतिरिक्त मुख्य सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी डॉ. सुबोध अग्रवाल की अध्यक्षता में गुरूवार को सचिवालय स्थित समिति कक्ष में आयोजित स्टेट लेवल कमेटी की बैठक में ग्राउण्ड वॉटर रिसोर्सेस एसेसमेंट रिपोर्ट को मंजूरी दी गई। बैठक में डॉ. अग्रवाल ने अगले 15 साल के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की जरूरतों के मुताबिक भूजल की उपलब्धता के बारे में सोर्स सस्टेनिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने को कहा ताकि आगामी योजनाओं का खाका तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि कई बार ट्यूबवेल खोदने के थोड़े समय में ही सूख जाते हैं, ऐसे में भूजल उपलब्धता की यह रिपोर्ट काफी कारगर सिद्ध होगी।
 
डॉ. अग्रवाल ने जैसलमेर-बाड़मेर में बहुत गहराई पर मौजूद खारे पानी को निकालकर उसे ट्रीट कर पीने लायक बनाने की संभावनाओं के बारे में भी रिपोर्ट तैयार करने करने के निर्देश दिए।  बैठक में यह तय किया गया कि सॉफ्टवेयर सिस्टम डवलप होने के बाद अब प्रतिवर्ष भूजल की वस्तुस्थिति पर रिपोर्ट तैयार हो सकेगी। पिछली बार 2020 में भूजल की वस्तुस्थिति पर आंकड़े जारी किए गए थे। इस रिपोर्ट में भूजल की आज की स्थिति क्या है और इसका अत्यधिक दोहन रोकने के साथ ही भूजल स्तर बढ़ाने के लिए किए जाने वाले उपायों के बारे में डेटा एकत्र किया गया है। 
 
बैठक में सेंट्रल ग्राउण्ड वॉटर बोर्ड के रीजनल डायरेक्टर श्री पीके त्रिपाठी, चीफ इंजीनियर भूजल विभाग श्री सूरजभान सिंह, मुख्य अभियंता (जल जीवन मिशन) श्री आर. के. मीना के साथ ही जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग, उद्योग विभाग, ऊर्जा विभाग, नाबार्ड सहित कई अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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