काली माता मन्दिर पँचकूला, पँजाब भाग: २४१,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल : काली माता मन्दिर पँचकूला, पँजाब भाग: २४१

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा श्री शनि देव मन्दिर, गाँव डबुआ, फरीदाबाद, हरियाणा व यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं!

आज हम आपके लिए लाएं हैं ,भारत के धार्मिक स्थल : काली माता मन्दिर, पँचकूला, पँजाब भाग: २४१

कहा जाता है कि दुनियाँ बनने से पहले आदि शक्ति काली माता ही ज्योति रूप में थीं, उस ज्योति ने विचारा “एकोहं बहुस्यामि” ऐसा विचार आते ही असँख्य दशमलव – ज्योतियाँ बिन्दु सी जगमगाने लगी! आपस में टकराई तो माँ आदि शक्ति का रूप धार लिया, यह लेखक ने स्वतः “गायत्री रहस्योपनिषद” में पढ़ा! ब्रह्मा जी को प्रकट किया, उनसे बोलीं मेरे साथ संसर्ग कर रचना करो! ब्रह्मा जी ने पूछा मेरी उतपत्ति कैसे हुई? माँ ने उत्तर दिया “मेरी मन: स्थिति से पैदा हुए ब्रह्म देव! उन्होंने मना कर दिया! पुनः विष्णु जी को पैदा किया!

उनसे भी यही प्रश्न और वो भी ब्रह्मा जी की तरह राख के ढेर में परिवर्तित हुए! अन्ततः शिव को पैदा किया उस आदि परम् शक्ति ने! शिव जी ने भी वही प्रश्न किए! उत्तर में शिव जी बोले “तथास्तु”! लेकिन एक बात माननी होगी आप अपना रूप बदल लीजिए और इन राख की ढेरियों को पुनः जीवित अवस्था में कीजिए! माँ बहुत प्रसन्न हुईं, माँ बनी ह्उआ और देवाधिदेव बने आदम! वो परम् आदि शक्ति काली माता, पँचकूला के काली माता मन्दिर में भी दैदिप्यमान हैं, विराजमान हैं!

पँचकूला की काली माता मन्दिर को कालका मन्दिर के रूप में भी जाना जाता है जो हिमाचल प्रदेश के पूर्वी हिस्से के लिए एक प्रवेश द्वार में स्थित है! वास्तव में कालका एक शहर है जो कि काली माता मन्दिर के नाम से ही प्रसिद्ध है! यह मन्दिर पँचकूला के अति प्राचीन परम् पुराने पुनीत मन्दिरों में से एक है!

माँ काली स्तुति के लाभ :

माँ काली जी की स्तुति करने मात्र से ही शत्रुओ का नाश हो जाता है और किसी भी भय से मुक्ति मिलती है!
माँ काली जी की स्तुति करने से जादू टोनो का असर और ऊपरी हवा खत्म हो जाती है!
माँ श्री काली की स्तुति रात के समय करनी चाहिए, रात्रि को की गई श्री काली माँ की स्तुति प्रगाढ़ शक्ति प्रदाता हैं! माँ काली की पूजा और स्तुति का आरँभ शुक्रवार रात से ही शुरू कर देना चाहिए! माँ काली की पूजा आरम्भ करने से पहले पार्वती पुत्र श्री गणेश जी का आवाह्न अवश्य करना चाहिए!

माँ काली की स्तुति करने की विधि:

स्नान करके गुलाबी या लाल रँग के कपड़े पहनेें! घर के मन्दिर को साफ़ करें! अब काली माता की प्रतिमा के सामने बैठ जाएँ! फिर एक चौकी ले कर उस पर लाल कपडा बिछाएँ! सबसे पहले श्री गणेश जी का आवाह्न कर गणश जी की भी प्रतिमा रख कर *ॐ गं गणपतये नमः जप कीजिए! यदि गणेश जी की प्रतिमा नहीं है तो जायफल पर लाल डोरी बांध कर गणेश जी का ध्यान करें और उनकी पूजा करें!
फिर माँ काली को लाल चुनरी चढ़ाये लाल सिंदूर का तिलक लगाएँ! काली माता के आगे सरसो के तेल का दीपक जला कर माँ का आह्वाहन करें! फिर माँ काली की पूजा आरम्भ करे!

श्री काली माता स्तुति :

शव पर सवार शमशान वासिनी भयंकरा
विकराल दन्तावली, त्रिनेत्रा हाथ में लिये
खडग और कटा सिर लिए, माँ दिगम्बरा
अट्टहास करती माँ काली, जय माँ काली
मुक्त-केशी लपलपाती जिहवा वाली माँ
दे रही अभय वरदान हमेशा – हमेशा ही
चार बाहों वाली जय हो माँ महाँ -काली
आओ करें ध्यान उनका सृजन करने वाली
सबकुछ देने वाली माँकाली जय माँ काली

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें:

बाय एयर चण्डीगढ़ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और हवाई अड्डे से कालीमाता मंदिर तक की दूरी सड़क पर ४२ किलोमीटर है!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें:

ट्रेन द्वारा कालका रेलवे स्टेशन और स्टेशन से काली माता मन्दिर तक दूरी सड़क से मात्र एक किलोमीटर है!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें:

सड़क के द्वारा कालका बस स्टैंड और बस स्टैंड से कालीमाता मन्दिर तक सड़क मार्ग से मात्र २ दो किलोमीटर है!

काली माता की जय हो! जयघोष हो!!

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