केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान के चौथे दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की

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@ नई दिल्ली

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने डॉ. आम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र नई दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान और प्रतिष्ठित चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल संस्थान डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चौथे स्थापना दिवस सह-दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद कुमार पाल ने विशेष अतिथि के रूप में शोभा बढ़ाई और डॉ. अतुल गोयल दीक्षांत समारोह में सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुए। कई अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य लोगों ने भी इसमें भाग लिया।

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2018-2021 बैच के एमडी/एमएस और डीएम/एमसीएच के कुल 172 छात्रों ने अपनी डिग्री और प्रमाण पत्र प्राप्त किए। 24 छात्रों ने योग्यता प्रमाण पत्र के साथ स्वर्ण पदक और छह छात्रों ने योग्यता प्रमाण पत्र प्राप्त किए। 2 अस्पताल नियोक्ताओं ने दीक्षांत समारोह के दौरान अपने बच्चों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र प्राप्त किए। 21वें दीक्षांत समारोह के दौरान अध्यक्षीय भाषण देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत को आगे ले जाने में युवाओं की एक अहम भूमिका है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image0031TFH.jpg डॉ. मनसुख मांडविया ने सभी स्नातक छात्रों और पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। खुशी व्यक्त करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने बच्चों को उनकी शिक्षा और प्रशिक्षण में निवेश करने के लिए प्रेरित करने और मार्गदर्शन करने पर माता-पिता और संकायों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से ऐसे योग्य शोधकर्ता डॉक्टर तैयार करने में सहायता मिलेगी जो आने वाले वर्षों में हमारे नागरिकों की सेवा करेंगे।

राष्ट्र निर्माता के रूप में अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता दोहराते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि सभी हितधाकरकों चिकित्सा पेशेवर सरकारी अधिकारी उद्योग कंपनियां आदि चाहे कोई भी हों सभी को भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं के साथ काम करना चाहिए।

विभिन्न विदेशी शासनों के बावजूद भारत के सामाजिक सांस्कृतिक और पारंपरिक तानेबाने में छिपे भारत के विचार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि हमें इनसे सीख लेनी चाहिए और इन्हें एक बड़ी छलांग के लिए एक मंच के रूप में उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में हमने अगले 25 साल के लिए भारत का हेल्थ विजन तैयार किया है। यह विजन न सिर्फ हमारे मेडिकल पेशेवरों को प्रचुर अवसर उपलब्ध कराएगा बल्कि इससे हमारे राष्ट्र निर्माताओं को हमारे नागरिकों की बेहतर तरीके से सेवा करना संभव होगा।

उन्होंने इसके दो महत्वपूर्ण घटकों पर प्रकाश डाला : हील इन इंडिया जहां स्वास्थ्य सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए देश भर के हितधारकों के साथ कई परामर्श किए गए। हील ऑफ इंडिया के दूसरे पहलू जहां न सिर्फ अपने नागरिकों बल्कि दुनिया के हित में उपयोग के उद्देश्य से स्वास्थ्य में अपनी विशेषज्ञता के दोहन के लिए अवसरों की पहचान की जा रही है। इस तरह से वसुधैव कुटुम्बकम के दर्शन को दोहराया गया।

सभी पहलुओं में कोविड महामारी का देश के लिए एक अहम पड़ाव के रूप में उल्लेख करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि जब दुनिया ने महामारी से निपटने में भारत की क्षमता पर सवाल उठाया तो हमारे पेशेवर इस अवसर पर खड़े हो गए। हितधारक भारत की “स्वयं से पहले सेवा” की परंपरा का प्रदर्शन के लिए एक साथ आए। उस समय यही सबसे ज्यादा मायने रखता था। उन्होंने कहा हमने लॉकडाउन के नियमों और स्वास्थ्य सलाहों का अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं के साथ पालन किया। इससे हमारे लिए विकास की राह पर लौटने वाला सबसे पहला देश बनने का मौका मिला।

डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि देश सुलभ किफायती और मरीज अनुकूल स्वास्थ्य प्रणाली बनने की दिशा में आगे बढ़ा। हमारा उद्देश्य अपनी प्राथमिक द्वितीयक और तृतीयक सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाकर देश के दूरदराज के इलाकों में भी ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ सुनिश्चित करना बना रहा। उन्होंने कहा कि एक समृद्ध भारत तभी सुनिश्चित हो सकता है जब हमारे पास एक स्वस्थ भारत हो। इस प्रकार उन्होंने सभी स्नातक छात्रों और संकायों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण को हमारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में बदलाव लाने में उपयोग किया जाए। उन्होंने मूल्य व्यवस्था के महत्व का भी उल्लेख किया और कहा कि छात्रों को शिष्टाचार नैतिकता और सहानुभूति वाला इंसान बनना चाहिए जो इस महान पेशे में आचरण के रूप में आवश्यक है और गहराई से शामिल होना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान जीजीएसआईपी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. महेश वर्मा डीजीएचएस के डॉ. (प्रो.) अतुल गोयल एबीवीआईएमएस के निदेशक डॉ. (प्रो.) बी एल शेरवाल एबीवीआईएमएस के डीन डॉ. (प्रो.) अशोक कुमार के साथ ही मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी संकाय सदस्य और अभिभावक भी उपस्थित रहे।

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