कपालेश्वर महादेव शिवालय डेरापुर कानपुर, उत्तरप्रदेश भाग: २४२,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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शिव मन्दिर कपालेश्वर महादेव शिवालय, डेरापुर, कानपुर, उत्तरप्रदेश भाग: २४२

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा काली माता मन्दिर, पंचकूला, पँजाब यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम आपके लिए लाएं हैं।

भारत के धार्मिक स्थल प्राचीन शिव मन्दिर कपालेश्वर महादेव शिवालय, डेरापुर, कानपुर, उत्तरप्रदेश भाग: २४२

कपालेश्वर शिवालय यह शिव मन्दिर बीहड़ एवम प्रकृति के सुरम्य वातावरण में एक टीले पर सेंगुर नदी के उत्तर -पूर्व में डेरापुर तहसील मुख्यालय से लगभग २ किलोमीटर दूर स्थित है! इस कपालेश्वर महादेव मन्दिर की विशेषता यह है कि मन्दिर के फर्श के मध्य में उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर लगभग १.३० मीटर लंबाई की एक समाधि है और इस समाधि के ऊपर उत्तरी सिरे पर शिव लिंग स्थापित है! शिव लिंग के उत्तर में ४० मीटर दूरी पर नंदी विराजमान हैं! इस टीले की खुदाई में समाधि के ऊपर शिव लिंग प्राप्त होने पर वर्ष १८९३ में इस मन्दिर का निर्माण हुआ था! यह मंदिर शैव भक्तों की आस्था का केंद्र है! श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार को यहां जनसैलाब उमड़ पड़ता है! डेरापुर उत्तर प्रदेश राज्य के कानपुर देहात ज़िले का एक नगर एवं सब- डिवीज़न तहसील मुख्यालय है जो वर्ष २००५ में ग्राम पंचायत से नगर पंचायत के अस्तित्व में परिवर्तित हुआ! डेरापुर के नाम के सम्बन्ध में जनश्रुति है कि जब श्रीकृष्ण और बाणासुर के बीच संग्राम हुआ था तब श्रीकृष्ण ने इसी स्थान पर डेरा डाला था!

भारतवर्ष के कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश में प्राचीन भगवान शिव मन्दिर सुन्दर रूप से डेरापुर, के पास स्थित है! मन्दिर देवाधिदेव महादेव भगवान भोलेनाथ शिवशँकर को समर्पित है! इसकी स्थापना दैत्यराज वनसूर ने की थी! यह लगभग १००० वर्ष पुराना मन्दिर है और स्थानीय रहवासियों के बीच बहुत ही लोकप्रिय है! अपने प्राचीन महत्व के अलावा, मन्दिर भक्त की इच्छा को पूरा करने के लिए भी प्रसिद्ध है! यह भगवान शिव को समर्पित उत्तर प्रदेश में सबसे लोकप्रिय मन्दिरों में से एक है!

महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष मेला :

यह शानदार तीर्थस्थल हर साल महाशिवरात्रि पर्व के समय पंद्रह दिनों के मेले की व्यवस्था करता है! कानपुर देहात, जालौन, हमीरपुर और बांदा ज़िलों के श्रद्धालु लोधेश्वर (बाराबंकी) से लौटने के दौरान गङ्गा के पानी से वनेश्वर के भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं! स्थानीय लोग विशेष रूप से सोमवार को अपनी शाँति के लिए इस तीर्थ यात्रा पर जाते हैं! महाशिवरात्रि पर,शिव भक्त अपने मन में ॐ नमः शिवाय प्रार्थना और अपने शिव पर चढ़ाने के लिए गङ्गाजल साथ लिए मन्दिर की परिक्रमा करते हैं!

शिव के आशीर्वाद पाने के लिए लोग विभिन्न स्थानों से आते हैं और वे इस शुभ अवसर पर आसपास के एक पवित्र स्थल का निरीक्षण करते हैं! मेलों का आयोजन किया गया है और लोग अक्सर शिवरात्रि की रात को उपवास करते हैं और भगवान शिव के नाम पर भजन गाते हैं और स्तुति करते हैं! महादेवा की मन्नत की एक झलक पाने के लिए सड़कों पर लोगों की भीड़ के साथ शहर के भीतर बड़ी कारसेवाएं की जाती हैं! आसपास के शिवभक्त कांवण द्वारा इसी मन्दिर में गङ्गाजलाभिषेक कर स्वयँ को धन्य मानते हैं!

शिव अराधना :

शिव जी को देवों का देव महादेव कहा जाता है क्योंकि जब सारे देवता हार मान जानते हैं तो भोले बाबा ही हैं जो हर भंवर से नैय्या को पार लगाने में सहायता करते हैं. शिवजी की आराधना का मूल मंत्र तो ऊं नम: शिवाय ही है लेकिन इस मंत्र के अतिरिक्त भी कुछ मंत्र हैं जो महादेव को प्रिय हैं!

मनोवांछित फल पाने के लिए शिवजी के इस मंत्र का जाप करें:

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय| नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥
मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय| मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:॥
शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय| श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:॥
अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्। अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।

स्वास्थ प्राप्ति के लिए शिवजी के मंत्र इस मंत्र का जाप करना चाहिए:
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ।।
कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय। सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे।।

शिवजी की पूजा के दौरान इन मंत्रो का जाप करना चाहिए:

पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा उन्हें स्नान समर्पण करना चाहिए:
ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य सकम्भ सर्ज्जनीस्थो| वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमासीद्||

भगवान शिव की पूजा करते समय इस मंत्र के द्वारा उन्हें यज्ञोपवीत समर्पण करना चाहिए:
ॐ ब्रह्म ज्ज्ञानप्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरुचो वेन आवः| स बुध्न्या उपमा अस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसतश्च विवः||

इस मंत्र के द्वारा भगवान भोलेनाथ को गंध समर्पण करना चाहिए:
ॐ नमः श्वभ्यः श्वपतिभ्यश्च वो नमो नमो भवाय च रुद्राय च नमः| शर्वाय च पशुपतये च नमो नीलग्रीवाय च शितिकण्ठाय च||

इस मंत्र के द्वारा अर्धनारीश्वर को धूप समर्पण करना चाहिए
ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्त केशाय च नमः सहस्त्राक्षाय च शतधन्वने च| नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमाय चेषुमते च||

पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा भगवान शिव को पुष्प समर्पण करना चाहिए:-
ॐ नमः पार्याय चावार्याय च नमः प्रतरणाय चोत्तरणाय च| नमस्तीर्थ्याय च कूल्याय च नमः शष्प्याय च फेन्याय च||

इस मंत्र के द्वारा भगवान चन्द्र शेखर को नैवेद्य अर्पण करना चाहिए;
ॐ नमो ज्येष्ठाय च कनिष्ठाय च नमः पूर्वजाय चापरजाय च| नमो मध्यमाय चापगल्भाय च नमो जघन्याय च बुधन्याय च||

पूजन के दौरान इस मंत्र से भगवान शिव को ताम्बूल पूगीफल समर्पण करना चाहिए :
ॐ इमा रुद्राय तवसे कपर्दिने क्षयद्वीराय प्रभरामहे मतीः| यशा शमशद् द्विपदे चतुष्पदे विश्वं पुष्टं ग्रामे अस्तिमन्ननातुराम्||

भोलेनाथ को इस मंत्र से सुगन्धित तेल समर्पण करना चाहिए :
ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्त केशाय च नमः सहस्त्राक्षाय च शतधन्वने च| नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमाय चेषुमते च||

भगवान भोलेनाथ को इस मंत्र के द्वारा दीप दर्शन कराना चाहिए:
ॐ नमः आराधे चात्रिराय च नमः शीघ्रयाय च शीभ्याय च| नमः ऊर्म्याय चावस्वन्याय च नमो नादेयाय च द्वीप्याय च||

इस मंत्र से भगवान शिवजी को बिल्वपत्र समर्पण करना चाहिए:
दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनं पापनाशनम्| अघोरपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्||

रूरा रेलवे स्टेशन :

यह नगर रूरा रेलवे स्टेशन ( उत्तरी मध्य रेलवे ) से दक्षिण दिशा में १४ किलोमीटर की दूरी पर सेंगुर नदी के दाहिने तट पर बसा है। यह नगर वर्तमान में सिकंदरा विधान सभा के अंतर्गत आता है!

इस नगर का मुख्य रेलवे स्टेशन रूरा (उत्तर मध्य रेलवे ) है जहां पर फ़ास्ट और सुपर फ़ास्ट रेलगाडियां उपलब्ध हैं! रूरा से पूर्व की ओर कानपुर, इलाहबाद, लखनऊ, हावड़ा आदि नगरो को जा सकते हैं तथा पश्चिम में इटावा, आगरा, दिल्ली आदि नगरों से जुड़ा हुआ है! दक्षिण दिशा में ६ किलोमीटर की रोड द्वारा स्वर्णिम चतुर्भुज राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है!

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें:

हवाईजहाज से। निकटतम हवाई अड्डा कानपुर हवाई अड्डा है। यह दिल्ली और लखनऊ के साथ लगातार उड़ानों से जुड़ा हुआ है!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें:

ट्रेन से निकटतम रेलवे स्टेशन कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन है! कानपुर पड़ोसी शहरों से अच्छी तरह से बनाए गए सड़कों और राजमार्गों से जुड़ा हुआ है!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें:

आप दिल्ली से कानपुर के प्राचीन शिव मन्दिर यदि बस अथवा कार से जाना चाहतेहो तो आपको ७ घण्टे २५ मिनट्स लगेंगे! आप राष्ट्रीय राजमार्ग NH : १९ या यमुना एक्सप्रेस वे द्वारा पहुँच सकते हो मन्दिर!

शिव शँकर की जय हो! जयघोष हो!!

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