माँ अम्बा देवी मन्दिर, आठनेर गाँव, इन्दौर, मध्यप्रदेश भाग: २५३,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल : माँ अम्बा देवी मन्दिर आठनेर गाँव, इन्दौर, मध्यप्रदेश भाग: २५३

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा श्री साईँ बाबा मन्दिर, चिल्ला, मयूर विहार फेस-१, दिल्ली! यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम आपके लिए लाएं हैं।

भारत के धार्मिक स्थल : माँ अम्बा देवी मन्दिर, आठनेर गाँव इन्दौर, मध्यप्रदेश भाग: २५३

भारतवर्ष में बहुत से देवी माँ के मन्दिर स्थापित हैं, जिनसे जुड़ी अलग-अलग मान्यताएँ और कथाएँ प्रचलित हैं! आज हम आपको एक ऐसे ही मन्दिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित माँ अम्बा जी के नाम से अति प्रसिद्ध मन्दिर है! हिंदू शास्त्रों की मानें तो देवी की ही मेहर से ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण, विष्णु जी ने पालन और भगवान शँकर जी सँहार करने की शक्ति रखते हैं! तो चलिए जानते हैं इस दिव्य मन्दिर के बारे में माँ अम्बा देवी मन्दिर!

इससे जुड़ा वो कौन सा रहस्य है जो आपको दाँतों तले अँगुली दबाने को मजबूर कर सकता है! बता दें जिस मन्दिर की बात हम कर रहे हैं वो सतपुड़ा के घने जँगलों में बसा हुआ है, जिससे भारतवर्ष देश ही नहीँ दुनियाँ भर के सनातन धर्मियों की, तमाम लोगों की आस्था जुड़ी हुई है! इसका प्रमुख कारण है, इससे जुड़ी पौराणिक कथा!

पौराणिक कथानुसार जब माता सती के अग्नि में कूद जाने के बाद भगवान शँकर कोध्रित होकर उन्हें लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे थे तब इस स्थान पर उनकी चुनरी गिरी थी! इसलिए इसे चुनरी वाला दरबार के नाम से भी जाना जाता है! बताया जाता है कि मन्दिर के प्रमुख पुजारी को यहाँ खुदाई के दौरान कितनी बार लाल चुनरी प्राप्त हुई! मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में धारूड़ ग्राम पँचायत में अम्बा माई का पवन पुनीत परम प्राचीन पवित्र मन्दिर सतपुड़ा पर अपनी वैभवशाली सत्ता लिए सुशोभित है! कहा जाता है कि इस मन्दिर की खोज एक मनिहार बेचने वाली मङ्गला नामक महिला ने की थी! जिसे आज भी लोग इसे मङ्गला माँ कहते हैं! कुछ किवदंतियों के अनुसार मङ्गला ने अम्बा देवी की कृपा करके विभिन्न तरह की सिद्धियां प्राप्त कर ली थीं! जिसके चलते अम्बा माँ के दरबार में आने वाला कोई भी भक्त कभी खाली हाथ नहीं गया!

यद्यपि अम्बा देवी की ये गुफा घने जँगल में स्थापित हैं, इसलिए यहाँ शेरों का आना-जाना आम बात माना जाता है परंतु इन शेरों से आज तक मन्दिर में आने वाले किसी भक्त को कोई नुक्सान नहीं हुआ! अम्बा देवी मन्दिर में एक गहरी गुप्त गुफा भी है जहां ऋषि मुनि आश्रम प्राचीन समय में निवास किया करते थे! ऋषि मुनि आश्रम की इस गुफ़ा में एक बगीचा है जहां आज भी कई ऋषि-मुनि तपस्या में लीन हैं! इसके अलावा यहां कई प्रकार के वनस्पति पेड़ भी मौज़ूद है और गुफा में निर्मित तलाब के पास माँ अम्बे, गणेश जी, शिव शँकर और काली माँ विराजमान हैं! लेकिन आपको बता दें कि इस गुफा में जाना मौत के समान माना जाता है! ऐसा इसलिए क्योंकि यहां जाने के मार्ग में कई जंगली जानवरों का सामना करना पड़ता है!

कुछ किवंदतियों के अनुसार यहाँ आने वाले कई ऐसे भक्त है जिनको तपस्वी मङ्गला देवी ने इस आश्रम के दर्शन करवाएं, उनमें से कई आज भी जीवित हैं!

पौराणिक किवंदतियों के अनुसार:

एक बार की बात है मध्यप्रदेश में आठनेर नामक गाँव के किसी सुनील नामक ९ साल के बालक को सपने में माता रानी किसी जगह के दर्शन करवाती थी उसके बाद उसे पलंग से नीचे फेंक देती थी! देखते ही देखते ऐसा हर रोज़ होने लगा! भूत-प्रेत का साया समझकर उसके माता-पिता ने कई बाबाओं के पास जाकर उसके कई इलाज करवाए! लेकिन कोई फायदा न हुआ और उसको हर रात वही सपना आता रहा! अँत में सुनील के माता-पिता अम्बे माँ के किसी भक्त से मिले! उसने उन्हें बताया कि इस बालक पर किसी भूत-प्रेत का साया नहीं है बल्कि अंबे मां का आर्शीवाद है! सपने में दिखाई दे रही जगह को ढूंढते-ढूंढते ३ साल बीत गए! फिर कहीं जाकर उसको माँ अम्बे के पावन दरबार के दर्शन हुए! माँ अम्बे की गुफा को देखकर बहुत खुश हो गया और उसने वहीं रहकर मां की पूजा-अर्चना करने का मन बनाया! सुनील के साथ अम्बा देवी के मन्दिर में कई चमत्कार भी घटित हुए! जैसे नवरात्रों में कई बार जब वो माँ का श्रृंगार कर रहा होता या श्रृंगार कर चुका होता, तो गुफा में कुछ शेर आ जाते थे! ऐसा प्रतीत होता था कि जैसे माँ की सवारी माँ को लेने आई हो! हैरान करने वाली बात यह है कि मां की इस सवारी ने सुनील को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया!

माँ की सेवा करते-करते १२ साल बीत गए लेकिन एक दिन उसको जन्म देने वाली माँ की दी हुई कसम के कारण उसे गुफा छोड़ वापिस अपने घर जाना पड़ा! तब सुनील अम्बे देवी के चरणों में फूट-फूट कर रोने लगा और माँ के चरणों में रहने की अरदास करने लगा! माँ ने उसे सपने में दर्शन दिए और कहा बेटा तू चिंता न कर मैं हमेशा तेरे साथ हूं और मेरा आर्शीवाद सदा तेरे साथ रहेगा! जा बेटा तू अपनी जन्म देने वाली मां के पास जाकर उनकी आज्ञा का पालन कर और मेरी ही मूर्तियों का निर्माण कर अपनी आजीविका चला! माँ के कहने पर वो वापिस अपने घर चला गया और जैसे मां ने बोला था उसने वैसे ही मूर्तियों को बनाने का अभ्यास शुरू कर दिया और उसको इसमें सफलता भी मिली! जहां तक कि वो माता रानी की ऐसी-ऐसी मूर्तियां बनाने लगा! जिनका निर्माण बड़े-बड़े मूर्तिकार भी नहीं कर सकते थे मां के परम भक्त सुनील पर मां अंबे देवी की ऐसी कृपा हुई कि आज सुनील द्वारा तैयार की गई मुर्तिया मध्यप्रदेश के कई शहरों में जा रही है!

ऐसा भी कहा जाता है कि किस्मत वालों को ही माँ का बुलावा आता है कितनी भी दर्शन की इच्छा हो लेकिन जब तक माँ का बुलावा नहीं आ जाता आप अम्बा देवी नहीं आ सकते है!

माँ अम्बा देवी की दर्शन यात्रा बैतुल जिले से आरँभ होती है! रास्ते में घना जँगल और अनेक घाट के साथ-साथ कई खतरनाक मोड़ भी आते हैं, भक्तों का ऐसा विश्वास है कि जंगल के बीच रास्ते में आने वाले नहालदेव बाबा के दर्शन मात्र से ही सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं!

इसके थोड़ा आगे चलकर एक बड़ी पहाड़ी आती है! जहां से माता के दरबार पहुंचने के लिए सीधी चढ़ाई चढ़नी पड़ता है! इसलिए इस स्थान को खड़ी पहाड़ी कहा जाता है! इन पहाड़ियों पर निरंतर मां के जय जय कारे गूंजते रहते हैं! नवरात्रों में ये नज़ारा देखने वाला होता है! दूर-दूर से भक्तजन मां के दर्शन करने आते हैं! इस शक्तिपीठ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अम्बा माई का हर रोज़ जलाभिषेक कर चोला और वस्त्र पहनाकर श्रृंगार किया जाता है! तो दोस्तों अगर आप भी अम्बे माँ !की कृपा का पात्र बनना चाहते हैं तो इस नवरात्रों में माँ के दर्शन करने देवी अम्बा के दरबार मे जरूर जाएं! आपकी हर बाधा को दूर करेंगी माँ अम्बे! अम्बे मात की जय!

माँ अम्बा देवी स्तुति :

अम्बा स्तुति हिंदी अनुवाद सहित दुर्गा सप्तश्लोकी! कलयुग में समस्त कामनाओ को सिद्ध करने वाला जो साधन है, वह है अम्बा स्तुति! अम्बा स्तुति करने से जगदम्बा प्रसन्न होकर साधक को धर्म अर्थ, काम, मोक्ष प्रदान करती है। इसे दुर्गा सप्तश्लोकी कहते हैं!

विनियोग :

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकी स्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहाकाली महालक्ष्मी महासरस्वत्यो देवताः,
श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः
अम्बा स्तुति हिन्दी अनुवाद सहित दुर्गासप्तश्लोकी

श्लोक:

ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥१॥

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।
दारिद्र्य दुःख भय हारिणी का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ॥२॥

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥३॥

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥४॥

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥५॥

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥६॥

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम् ॥७।।

दुर्गा क्षमा प्रार्थना मन्त्र :

हिंदी अनुवाद सहित विनयोग का हिंदी अनुवाद ॐ इस दुर्गासप्तश्लोकी स्तोत्रमन्त्रके नारायण ऋषि हैं, अनुष्टुप् छन्दहैं, श्रीमहाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती देवता हैं, श्रीदुर्गा की प्रसन्नता के लिये सप्तश्लोकी दुर्गापाठ में इसका विनियोग किया जाता है।

श्लोक का हिंदी अनुवाद –

भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के भी चित्तको बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती हैं॥१॥

माँ दुर्गे आप का स्मरण (ध्यान ) करने पर आप सब प्राणियों को भय व कष्ट मुक्त कर देती हैं और स्वस्थ पुरुषों व साधको द्वारा चिन्तन करने पर उन्हें परम कल्याणमयी बुद्धि प्रदान करती हैं। दुःख, दरिद्रता और भय हरनेवाली देवि! आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका चित्त सबका उपकार करने के लिये सदा ही दयाई रहता हो ॥२॥

नारायणी! तुम सब प्रकार के मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी माँ हो। कल्याणदायिनी शिवा हो। सब पुरुषार्थोंको सिद्ध करनेवाली, शरणागत वत्सला, तीन नेत्रोंवाली एवं गौरी हो। तुम्हें नमस्कार है ॥ ३॥

शरण में आये हुए दीन-दुखियो एवं पीड़ितों की रक्षा में संलग्न रहने वाली तथा सबकी पीड़ा हरने वाली नारायणी देवि! तुम्हें कोटि-कोटि नमस्कार है॥४॥

सर्वस्वरूपा (सभी स्वरूपों वाली), सर्वेश्वरी तथा सब प्रकारकी शक्तियों से सम्पन्न वा युक्त दिव्यरूपा दुर्गे देवि! सब भयों से हमारी रक्षा करो; तुम्हें नमस्कार है॥५॥

देवि! तुम प्रसन्न होने पर सब रोगोंको नष्ट कर देती हो और कुपित होने पर मनोवांछित सभी कामनाओं का नाश कर देती हो। जो लोग तुम्हारी शरणमें जा चुके हैं, उनपर विपत्ति तो कभी आती ही नहीं। तुम्हारी शरण में गये हुए मनुष्य तुम्हारी कृपा से दूसरों को शरण देने योग्य बन जाते हैं॥६॥

सर्वेश्वरि! तुम इसी प्रकार तीनों लोकों एवं ब्रम्हाण्ड की समस्त बाधाओं को शान्त व दूर करो और हमारे समस्त शत्रुओं काआ सदा नाश करती रहो॥७॥

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

नई दिल्ली के पालम से अम्बे माँ के मन्दिर पहुँचने का सबसे तेज़ तरीका इन्दिरगाँधी अँतरराष्ट्रीय हवाईजहाज से निकटतम हवाई अड्डा सरदार वल्लभभाई पटेल अहमदाबाद है! फिर मन्दिर जाने के लिए कैब से हवाई अड्डे के साथ मोटर वाहन योग्य सड़कों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है! हवाई अड्डे से मन्दिर के लिए बस व टैक्सी भी उपलब्ध हैं!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

आबू रोड़ रेलवेस्टेशन निकटतम स्टेशन है! माँ अम्बे देवी मन्दिर यहाँ से २० किलोमीटर दूर है! यहाँ से रिक्शा टेम्पो ऑटो शेयर कैब या स्थानीय बस से पहुँच सकते हो अम्बा देवी मन्दिर!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

अंतर्देशीय बस स्थानक यानी ISBT दिल्ली से आप तक़रीबन १५ घण्टे ४३ मिनट्स में आप राष्ट्रीय राजमार्ग NH: ४६ से ८७५.२ किलोमीटर की यात्रा तय करके बस अथवा स्वयँ की कार द्वारा अम्बा देवी मन्दिर पहुँच जाओगे!

माँ अम्बा देवी की जय हो! जयघोष हो!!

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