मेहँदीपुर बालाजी मन्दिर तहसील सिकराय, राजस्थान भाग: २५७,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल: मेहँदीपुर बालाजी मन्दिर तहसील सिकराय, राजस्थान भाग: २५७

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा श्री दक्षिणमुख नन्दीश्वर मन्दिर, बंगलूरू, कर्नाटक! यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम आपके लिए लाएँ हैं।

भारत के धार्मिक स्थल: मेहँदीपुर बालाजी मन्दिर, तहसील: सिकराय, राजस्थान! भाग: २५७

मेंहदीपुर बालाजी मन्दिर राजस्थान के तहसील (सिकराय) में स्थित हनुमान जी का एक विश्व प्रसिद्ध मन्दिर है! भारत के कई भागों में हनुमान जी को बालाजी भी कहते हैं! इस मन्दिर का स्थान दो पहाड़ियों के बीच बसा हुआ बहुत ही आकर्षक दिखाई देता है! यहाँ की शुद्ध जलवायु और पवित्र वातावरण मन को बहुत आनंद प्रदान करती है! यहाँ नगर-जीवन की रचनाएँ भी देखने को मिलेंगी!

बालाजी की प्रकट होने की धारणा :

यहाँ तीन देवों की प्रधानता है : १. श्री बालाजी महाराज, २. श्री प्रेतराज सरकार और ३. श्री भैरव कोतवाल! यह तीन देव यहाँ आज से लगभग १००० वर्ष पूर्व प्रकट हुए थे! इनके प्रकट होने से लेकर अब तक बारह महँत इस स्थान पर सेवा-पूजा कर चुके हैं और अब तक इस स्थान के तीन महँत इस समय भी विद्यमान हैं! सर्व श्री गणेशपुरी जी महाराज सर्वप्रथम सेवक श्री किशोरपुरी जी महाराज पूर्व सेवक और श्री नरेशपुरी जी महाराज वर्तमान सेवक हैं! यहाँ के उत्थान का युग श्री गणेशपुरी जी महाराज के समय से प्रारम्भ हुआ और अब दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है! प्रधान मन्दिर का निर्माण इन्हीं के समय में हुआ! सभी धर्मशालाएँ इन्हीं के समय में बनीं! इस प्रकार इनका सेवाकाल श्री बालाजी मेंहदीपुर के इतिहास का स्वर्ण युग कहलाएगा!

प्रारम्भ में यहाँ घोर बीहड़ जँगल था@ घनी झाड़ियों में द्रोर-चीते, बघेरा आदि जँगली जानवर पड़े रहते हैं! वास्तव में इस मूर्त्ति को अलग से किसी कलाकार ने गढ़ कर नहीं बनाया है, अपितु यह तो पर्वत का ही अँग है और यह समूचा पर्वत ही मानों उसका ‘कनक भूधराकार है! इसी मूर्त्ति के चरणों में एक छोटी-सी कुण्डी थी, जिसका जल कभी बीतता ही नहीं था! रहस्य यह है कि महाराज की बायीं ओर छाती के नीचे से एक बारीक जलधारा निरन्तर बहती रहती है जो पर्याप्त चोला चढ़ जाने पर भी बंद नहीं होती!

इस प्रकार तीनों देवों की स्थापना हुई। विक्रमी-सम्वत् १९७९ में श्री महाराज ने अपना चोला बदला! उतारे हुए चोले को गाड़ियों में भरकर श्री गंगा में प्रवाहित करने हेतु बहुत से श्रद्धालु चल दिये! चोले को लेकर जब मंडावर रेलवे स्टेशन पर पहुँचे तो रेलवे अधिकारियों ने चोले को सामान समझकर सामान-शुल्क लेने के लिए उस चोले को तौलना चाहा, किन्तु वे तौलने में असमर्थ रहे! चोला तौलने के क्रम में वज़न कभी एक मन बढ़ जाता तो कभी एक मन घट जाता; अन्तत: रेलवे अधिकारी ने हार मान लिया और चोले को सम्मान सहित गंगा जी को समर्पित कर दिया गया! उस समय हवन, ब्राह्मण भोजन एवं धर्म ग्रन्थों का पारायण हुआ और नये चोले में एक नयी ज्योति उत्पन्न हुई, जिसने भारत के कोने-कोने में प्रकाश फैला दिया!

नियम:

बालाजी महाराज के दर्शन हेतु मेंहदीपुर जाने से कम से कम एक सप्ताह पहले आपको माँस, मछली, अण्डा, शराब आदि तामसिक चीजों का त्याग करना चाहिए और सर्वप्रथम बालाजी महाराज के दर्शन से पूर्व प्रेतराज सरकार के दर्शन और प्रेतराज चालीसा का पाठ करना चाहिए! इसके बाद बालाजी महाराज के दर्शन और हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए और सबसे अन्त में कोतवाल भैरवनाथ के दर्शन करने के बाद भैरव चालीसा का पाठ करना चाहिए। मंदिर में किसी से कोई भी चीज़ यहां तक कि प्रसाद भी न लें और न ही किसी को कोई भी चीज़ जैसे प्रसाद न दें। आते तथा जाते समय भूल से भी पीछे मुड़कर न देखें! आने और जाने की दरखास्त लगाकर जाएं क्योंकि बाबा की आज्ञा से ही कोई मेंहदीपुर में आ तथा जा सकता है!

आवागमन के साधन:

राजस्थान राज्य के दो जिलों (करौली व दौसा) में विभक्त घाटा मेंहदीपुर स्थान दिल्ली-जयपुर-अजमेर-अहमदाबाद लाइन पर स्थित बाँदीकुई रेलवे स्टेशन से २४ मील की दूरी पर स्थित है! इसी प्रकार बड़ी लाइन के हिंडोन स्टेशन से भी यहाँ के लिए बसें मिलती हैं! अब तो आगरा, मथुरा, वृन्दावन, अलीगढ़ आदि से सीधी बसें जो जयपुर जाती हैं वे बालाजी के मोड़ पर रूकती हैं! फ्रंटीयर मेल से महावीर जी स्टेशन पर उतर कर भी हिंडोन होकर बस द्वारा बालाजी पहुँचा जा सकता है! हिंडोन सिटी स्टेशन पश्चिम रेलवे की बड़ी लाइन पर बयाना और महावीर जी स्टेशन के बीच दिल्ली, मथुरा, कोटा, रतलाम, बड़ोदरा, मुंबई लाइन पर स्थित है। हिंडोन से सवा घण्टे का समय बालाजी तक बस द्वारा लगता है!

२१वीं सदी में भारत में आज भी कई ऐसे मंदिर हैं, जो रहस्यों से भरे हुए हैं! हर मंदिर की अपनी एक गाथा और महत्व है! इन्हीं मन्दिरों में से एक है मेहंदीपुर बालाजी! राजस्थान के दौसा जिले के पास दो पहाडियों के बीच मेहंदीपुर बालाजी का मन्दिर बसा हुआ है! यहां आपको कई विचित्र नजारे देखने को मिल जाएंगे, जिनहें पहली बार देखकर लोग हैरत में पड़ जाते हैं और डर भी जाते हैं! विज्ञान भूत-प्रेतों को नहीं मानता है लेकिन यहां हर दिन दूर-दराज से ऊपरी चक्कर और प्रेत बाधा से परेशान लोग मुक्ति के लिए आते हैं!२ बजे लगता है दरबार

२ बजे लगता है दरबार :

भूत प्रेतादि ऊपरी बाधाओं के निवारण के लिए यहाँ आने वालों का भारी भीड़ लगी रहती है! इस मन्दिर में प्रेतराज सरकार और भैरवबाबा यानी की कोतवाल कप्तान की मूर्ति है! हर दिन २ बजे प्रेतराज सरकार के दरबार में पेशी यानी की कीर्तन होता है, जिसमें लोगों पर आए ऊपरी सायों को दूर किया जाता है!

नहीं ले जा सकते घर :

मेहंदीपुर बालाजी मन्दिर के किसी भी तरह के प्रसाद को आप खा नहीं सकते और ना ही किसी को दे सकते हैं! यहां के प्रसाद को आप घर पर भी नहीं लेकर जा सकते! यहां तक की कोई भी खाने-पीने की चीज और सुंगधित चीज़ आप यहां से घर नहीं लेकर जा सकते! बताया जाता है ऐसा करने पर ऊपरी साया आपके ऊपर भI आना बेशक़ से सम्भव है!

बायीं छाती में है छेद :

मेहंदीपुर बालाजी की बायीं छाती में एक छोटा सा छेद है जिससे लगातार जल बहता रहता है! कहते हैं यह बालाजी का पसीना है! यहाँ बालाजी को लड्डू प्रेतराज को चावल और भैरों को उड़द का प्रसाद चढ़ता है! बताया जाता है कि जिनके अँदर भूत-प्रेत आदि शक्तियां होती हैं, वह यह प्रसाद खाते ही अजब-गजब हरकतें करने लगते हैं! भक्त करते हैं यह नियम पालन! मेहंदीपुर बालाजी की मूर्ती के ठीक सामने भगवान राम-सीता की मूर्ती है, जिसके वह हमेशा दर्शन करते रहते हैं! यहां हनुमानजी बाल रूप में मौजूद है! यहाँ आने वाले सभी यात्रियों के लिए नियम है कि उन्हें कम से कम एक सप्ताह तक लहसुन, प्याज, अण्डा, मांस, शराब का सेवन बंद कर देना करना होता है!

२ कैटेगरी का होता है प्रसाद :

मेहंदीपुर बालाजी में बाकी मन्दिरों से अलग प्रसाद चढ़ता है! यहां प्रसाद की २ कैटेगरी है, एक दर्खावस्त और दूसरी अर्जी! दर्खावस्त को बालाजी में हाजरी भी बोलते हैं! हाजरी के प्रसाद को दो बार खरीदना पड़ता है और अर्जी में ३ थालियों में प्रसाद मिलता है! मन्दिर में दर्खावस्त एक बार लगाने के बाद, वहां से तुरंत निकल जाना होता है! अर्जी का प्रसाद लौटते समय लेते हैं जिन्हें अपने पीछे फेंकना होता है! नियम है कि प्रसाद फेंकते समय पीछे नहीं देखना चाहिए!

प्रेतराज चालीसा सभी दुःखों व कष्टों को हरने वाली है। इसका गायन हृदय की इच्छाओं की पूर्ति करता है। जो भी भक्त प्रेम से प्रेतराज चालीसा गाता है, उसके लिए कुछ भी अप्राप्य नहीं रहता। प्रेतराज सरकार अर्थात ऋषि नीलासुर बालाजी हनुमान के महामंत्री हैं। आकाशगामी सूक्ष्म शक्तियों पर उनका अधिकार है। प्रेतराज चालीसा का पाठ कर अपना जीवन धन्य बनाएँ :-

प्रेतराज सरकार चालीसा :

॥ दोहा ॥

गणपति की कर वंदना, गुरु चरनन चितलाय।
प्रेतराज जी का लिखूं, चालीसा हरषाय॥

जय जय भूताधिप प्रबल, हरण सकल दुःख भार!
वीर शिरोमणि जयति, जय प्रेतराज सरकार!!

!! चौपाई !!

जय जय प्रेतराज जग पावन, महा प्रबल त्रय ताप नसावन विकट वीर करुणा के सागर, भक्त कष्ट हर सब गुण आगर

रत्न जटित सिंहासन सोहे, देखत सुन नर मुनि मन मोहे जगमग सिर पर मुकुट सुहावन, कानन कुण्डल अति मन भावन

धनुष कृपाण बाण अरु भाला, वीर वेश अति भृकुटि कराला गजा-रुढ़ संग- सेना भारी, बाजत ढोल मृदंग जुझारी

छत्र चंवर पंखा सिर डोले, भक्तबृन्द मिलि जयजय बोले ,भक्त शिरोमणि वीर प्रचण्डा, दुष्ट दलन शोभित भुजदण्डा

चलत सैन काँपत भूतलहू,दर्शन करत मिटत कलि मलहू

घाटा मेंहदीपुर में आकर,प्रगटे प्रेतराज गुण सागर

लाल ध्वजा उड़ रही गगन में,नाचत भक्त मगन ही मन में

भक्त कामना पूरन स्वामी,बजरंगी के सेवक नामी

इच्छा पूरन करने वाले,दुःख संकट सब हरने वाले

जो जिस इच्छा से आते हैं,वे सब मन वांछित फल पाते हैं

रोगी सेवा में जो आते,शीघ्र स्वस्थ होकर घर जाते

भूत पिशाच जिन्न वैताला,भागे देखत रूप कराला

भौतिक शारीरिक सब पीड़ा, मिटा शीघ्र करते है क्रीड़ा

कठिन काज जग में हैं जेते,रटत नाम पूरन सब होते

तन मन धन से सेवा करते,उनके सकल कष्ट प्रभु हरते

हे करुणामय स्वामी मेरे, पड़ा हुआ हूँ चरणों में तेरे

कोई तेरे सिवा न मेरा, मुझे एक आश्रय प्रभु तेरा

लज्जा मेरी हाथ तिहारे,पड़ा हूँ चरणशरण सहारे

या विधि अर्ज़ करे तनमन से,छुटत रोग – शोक सब तन से

मेंहदीपुर अवतार लिया है,भक्तों का दुःख दूर किया है

रोगी, पागल सन्तति हीना,भूत व्याधि सुत अरु धन हीना

जो – जो जन तुम्हरे द्वारे आते, मन वांछित फल पा घर जाते

महिमा भूतल पर है छाई,भक्तों ने यह है लीला गाई

महन्त गणेश पुरी तपधारी,पूजा करते तन – मन वारी

हाथों में लिए मुगदर – घोटे,दूत खड़े रहते हैं लघु -मोटे

लाल देह सिन्दूर बदन में,काँपत थरथर भूत भवन में

जो कोई प्रेतराज चालीसा, पाठकरत नित एक अरु बीसा

प्रातः काल स्नान करावै, तेल और सिन्दूर लगावै

चन्दन इत्र फुलेल चढ़ावै, पुष्पन की माला पहनावै

ले कपूर आरती उतारै,करै प्रार्थना जयति उचारै

उनके सभी कष्ट कट जाते,हर्षित हो अपने घर जाते

इच्छा पूरण करते जनकी,होती सफल कामना मन की

भक्त कष्ट हर अरिकुल घातक,ध्यान धरत छूटत सब पातक

जय जय जय प्रेताधिप जय,जयति भूपति संकट हर जय

जो नर पढ़त प्रेत चालीसा,रहत कबहूँ दुख लवलेशा

कह भक्त ध्यान धर मन में,प्रेतराज पावन चरणन में

॥ दोहा ॥

दुष्ट दलन जग अघ हरन,
समन सकल भव शूल
जयति भक्त रक्षक प्रवल,
प्रेतराज सुख – मूल

विमल वेश अंजिन सुवन,
प्रेतराज बल धाम
बसहु निरंतर मम हृदय,
कहत भक्त सुखराम

काल भैरव स्तुति :

यं यं यं यक्षरूपं दशदिशिविदितं भूमिकम्पायमानं
सं सं संहारमूर्तिं शिरमुकुटजटाशेखरं चन्द्रबिम्बम्।।

दं दं दं दीर्घकायं विकृतनखमुखं चोर्ध्वरोमं करालं
बालाजी स्तुति :

।। दोहा।।

श्री गुरु चरण चितलाय के धरें ध्यान हनुमान ।
बालाजी चालीसा लिखे “ओम” स्नेही कल्याण ।।
विश्व विदित वर दानी संकट हरण हनुमान ।
मेंहदीपुर में प्रगट भये बालाजी भगवान ।।

।।चौपाई।।

जय हनुमान बालाजी देवा । प्रगट भये यहां तीनों देवा ।।
प्रेतराज भैरव बलवाना । कोलवाल कप्तानी हनुमाना ।।
मेंहदीपुर अवतार लिया है । भक्तों का उद्धार किया है ।।
बालरूप प्रगटे हैं यहां पर । संकट वाले आते जहां पर ।।
डाकिनी शाकिनी अरु जिंदनीं । मशान चुड़ैल भूत भूतनीं ।।
जाके भय ते सब भग जाते । स्याने भोपे यहां घबराते ।।
चौकी बंधन सब कट जाते । दूत मिले आनंद मनाते ।।
सच्चा है दरबार तिहारा । शरण पड़े सुख पावे भारा ।।
रूप तेज बल अतुलित धामा । सन्मुख जिनके सिय रामा ।।
कनक मुकुट मणि तेज प्रकाशा । सबकी होवत पूर्ण आशा ।।
महंत गणेशपुरी गुणीले । भये सुसेवक राम रंगीले ।।
अद्भुत कला दिखाई कैसी । कलयुग ज्योति जलाई जैसी ।।
ऊंची ध्वजा पताका नभ में । स्वर्ण कलश है उन्नत जग में ।।
धर्म सत्य का डंका बाजे । सियाराम जय शंकर राजे ।।
आन फिराया मुगदर घोटा । भूत जिंद पर पड़ते सोटा ।।
राम लक्ष्मन सिय हृदय कल्याणा । बाल रूप प्रगटे हनुमाना ।।
जय हनुमंत हठीले देवा । पुरी परिवार करत है सेवा ।।
लड्डू चूरमा मिसरी मेवा । अर्जी दरखास्त लगाऊ देवा ।।
दया करे सब विधि बालाजी । संकट हरण प्रगटे बालाजी ।।

जय बाबा की जन जन उचारे । कोटिक जन तेरे आए द्वारे ।।
बाल समय रवि भक्षहि लीन्हा । तिमिर मय जग कीन्हो तीन्हा ।।
देवन विनती की अति भारी । छांड़ दियो रवि कष्ट निहारी ।।
लांघि उदधि सिया सुधि लाए । लक्ष्मण हित संजीवन लाए ।।
रामानुज प्राण दिवाकर । शंकर सुवन मां अंजनी चाकर ।।
केसरी नंदन दुख भव भंजन । रामानंद सदा सुख संदन ।।
सिया राम के प्राण पियारे । जय बाबा की भक्त ऊचारे ।।
संकट दुख भंजन भगवाना । दया करहु हे कृपा निधाना ।।
सुमर बाल रूप कल्याणा करे मनोरथ पूर्ण कामा ।।
अष्ट सिद्धि नव निधि दातारी । भक्त जन आवे बहु भारी ।।
मेवा अरु मिष्टान प्रवीना । भेंट चढ़ावें धनि अरु दीना ।।
नृत्य करे नित न्यारे न्यारे । रिद्धि सिद्धियाँ जाके द्वारे ।।
अर्जी का आदर मिलते ही । भैरव भूत पकड़ते तबही ।।
कोतवाल कप्तान कृपाणी । प्रेतराज संकट कल्याणी ।।
चौकी बंधन कटते भाई । जो जन करते हैं सेवकाई ।।
रामदास बाल भगवंता । मेंहदीपुर प्रगटे हनुमंता ।।
जो जन बालाजी में आते । जन्म जन्म के पाप नशाते ।।
जल पावन लेकर घर जाते । निर्मल हो आनंद मनाते ।।
क्रूर कठिन संकट भग जावे । सत्य धर्म पथ राह दिखावें ।।
जो सत पाठ करे चालीसा । तापर प्रसन्न होय बागीसा ।।
कल्याण स्नेही । स्नेह से गावे । सुख समृद्धि रिद्धि सिद्धि पावे ।।

।।दोहा।।

मंद बुद्धि मम जानके, क्षमा करो गुणखान ।
संकट मोचन क्षमहु मम, “ओम” स्नेही कल्याणा ।।

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

बाय एयर निकटतम हवाई अड्डा जयपुर हवाई अड्डा है! यहाँ से श्री मेहंदीपुर बालाजी मन्दिर के लिए राजस्थान राज्य परिवहन की बस अथवा कैब द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है!हवाई मार्ग से: आप जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दौसा पहुँच सकते हैं जो लगभग ६२ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है! फिर, आपको मेहंदीपुर बालाजी मन्दिर के लिए एक टैक्सी मिल सकती है! शहर तक पहुंचने के लिए एक और सुविधाजनक हवाई अड्डा आगरा में खेरिया हवाई अड्डा है जो शहर से १३३ किलोमीटर दूर स्थित है!

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

दिल्ली से मेहंदीपुर बालाजी मन्दिर जाने के लिए आप ट्रैन लेकर मण्डावर रेल्वे स्टेशन उतरें, वहाँ से आप आसानी से टैम्पो कैब से आप पहुँच जाओगे मेहंदीपुर बालाजी मन्दिर! रेल द्वारा: दौसा भारत के अधिकांश कस्बों और शहरों से रेल मार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है! दौसा रेलवे स्टेशन मेहंदीपुर बालाजी मन्दिर का निकटतम रेलवे स्टेशन है! बांदीकुई जंक्शन एक अन्य रेलवे स्टेशन है जो दौसा जिले से ३८ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

दिल्ली से अपनी कार अथवा राजस्थान राज्य परिवहन निगम की बस द्वारा बालाजी मन्दिर राष्ट्रीय राजमार्ग NH: यमुनाएक्सप्रेस-वे से ३०३५.५ किलोमीटर यात्रा करके ५ घण्टे ३५ मिनट्स में पहुँचोगे मन्दिर!

सड़क मार्ग से:

दौसा जयपुर से लगभग ५५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है! यदि आप राजस्थान रोडवेज के माध्यम से पहुंचना चाहते हैं, तो राजस्थान राज्य परिवहन या दिल्ली, आगरा और आसपास के अन्य शहरों और ज़िलों से दौसा के लिए नियमित रूप से चलने वाली निजी बसों के लिए बढ़िया विकल्प है!

बाला जी महाराज की जय हो! जयघोष हो!!

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