प्रधानमंत्री ने गुजरात के एकता नगर में पर्यावरण मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

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@ गांधीनगर गुजरात 

पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रियों का राष्ट्रीय सम्मेलन गुजरात के एकता नगर में आयोजित किया गया।दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन कल प्रधानमंत्री ने वर्चुअली किया।

सम्मेलन में देश भर के पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रियों ने भाग लिया।सम्‍मेलन की शुरुआत गुजरात के मुख्‍यमंत्री भूपेन्‍द्रभाई पटेल के स्‍वागत भाषण और पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्‍द्र यादव के भाषण से हुई। सम्‍मेलन में अन्य गणमान्य व्यक्तियों के अलावा पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे भी उपस्थित थे।ईएफएंडसीसी मंत्रियों के दो दिवसीय सम्‍मेलन में संबद्ध राज्‍यों के वन और पर्यावरण मंत्रीराज्‍यों के सचिवों के अलावा पीसीसीएफ के साथ राज्‍य पीसीबी/पीसीसी के अध्‍यक्ष भी शामिल हुए।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत न केवल अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति कर रहा है बल्कि दुनिया के अन्य देशों का भी मार्गदर्शन कर रहा है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और यह अपनेपर्यावरण में भी लगातार वृद्धि कर रहा है।

वर्ष 2070 के शुद्ध शून्य लक्ष्य की ओर सभी का ध्यान आकर्षित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का ध्यान हरित विकास और हरित रोजगार पर है। उन्होंने इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्यों के पर्यावरण मंत्रालयों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने कहा मैं सभी पर्यावरण मंत्रियों से आग्रह करता हूं कि वे राज्यों में जितना संभव हो एक सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दें। मोदी ने यह कहते हुए अपनी बात को पूरा किया कि यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अभियान को काफी मजबूत करेगा और हमें एकल उपयोग प्लास्टिक के खतरे से भी मुक्त करेगा।

पर्यावरण मंत्रालयों की भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस भूमिका को नियामक भूमिका में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस तथ्य पर खेद व्यक्त किया कि लंबे समय तक पर्यावरण मंत्रालयों ने एक नियामक के रूप में अपनी भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने कहा  मैं समझता हूं कि पर्यावरण मंत्रालय की भूमिका एक नियामक के बजाय पर्यावरण के संरक्षक के रूप में अधिक है।”उन्होंनेराज्योंसेवाहनस्क्रैपिंगनीति और जैव ईंधन उपायों जैसे इथेनॉल सम्मिश्रण जैसी पहलों को अपनाने और उन्हें जमीनी स्‍तर पर मजबूत करने में मदद करने के लिए कहा। उन्होंने इन उपायों को बढ़ावा देने के लिए राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सहयोग स्‍थापित करने को कहा।

केवड़िया एकता नगर में सीखने के अवसरों की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के एक साथ विकास पर्यावरण को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने इको-टूरिज्‍म को बढ़ाने के लिए एक माध्‍यम जैव-विविधता पर्यटनऔर यह समाधान निकालने कि हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों की संपत्ति से जंगल की संपत्ति कैसे बढ़ती है जैसे मुद्दों के समाधान पर टिप्पणी की।

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