राहु मन्दिर(सम्पूर्ण विश्व में यह इकलौता मन्दिर) गाँव पैठानी, पौड़ी गढ़वाल भाग : २४७,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल :राहु मन्दिर, गाँव पैठानी, पौड़ी गढ़वाल भाग : २४७

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा देवी मन्दिर, पानीपत, हरियाणा! यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम आपके लिए लाएं हैं।

भारत के धार्मिक स्थल :राहु मन्दिर, गाँव पैठानी, पौड़ी गढ़वाल भाग: २४७

राहू मन्दिर में देव ही नहीं दानव की भी होती है पूजा:

हिमालय की गोद में बसा देव भूमि उत्तराखंड, धार्मिक मान्यताओं में बाकी दुनियाँ से ज़रा हट के हैं! यहाँ पर उन्हें भी आदर मिलता है जिन्हें स्वयँ देवता भी ठुकरा देते हैं! तभी तो यहाँ देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने जिस दानव की गर्दन सुदर्शन चक्र से काट दी थी उनका मन्दिर बनाकर यहाँ पूजा की जाती है! पौड़ी ज़िले में कोटद्वार से लगभग १५० किलोमीटर दूर थली सैण ब्लॉक में स्थित यह मन्दिर ऐसा ही है!

यह सुनने में बेशक़ से प्रजाटूडे के पाठकों को अजीब लगे पर, जहाँ आस्था और विश्वास है, वहाँ कुछ भी असँभव नहीं है! यही कारण है कि जहाँ राहु की दृष्टि पड़ने से भी लोग बचते हैं वहीँ पैठाणी के इस राहु मन्दिर में राहु देव की पूजा की जाती है, वो भी भगवान शिव शँकर के साथ!

पूरे भारतवर्ष देश में, सम्पूर्ण विश्व में यह इकलौता मन्दिर है जहाँ राहु देवता की पूजा की जाती है! कहा जाता है कि जब राहु छल से समुद्र मन्थन से निकला अमृत पी लिया तो उसे अमर होने से रोकने के लिए भगवान विष्णु ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया!

कहते हैं राहु का कटा हुआ सिर उत्तराखंड के इसी स्थान पर आ गिरा! जहाँ सिर गिरा उसी स्थान पर एक मन्दिर का निर्माण किया गया जहाँ भगवान शिवशँकर के साथ राहु देव का मन्दिर स्थापित किया गया है और यहाँ देवाधिदेव भोलेनाथ शिवशँकर के साथ राहु देव की भी पूजा श्रद्धा भक्ति से होती है!

आदि शँकराचार्य जनश्रुतियों के अनुसार आदि शँकराचार्य ने इस मन्दिर का निर्माण कराया था! जब शँकराचार्य हिमालय पर आए तो उन्हें इस क्षेत्र में राहु के प्रभाव का आभास हुआ, इसके बाद उन्होंने राहु के मन्दिर का निर्माण प्रारम्भ केरने का आह्वाहन किया!

इस मन्दिर में भगवान शिवशँकर के साथ राहु की धड़-विहीन मूर्ति आदि शँकराचार्य द्वारा प्राण- प्रतिष्ठा करके स्थापित की गई है! कहा जाता है कि यहाँ पर विधि से पूजा करने पर राहु और केतु के साथ शनि मङ्गल के दोष से भी मुक्ति मिलती है!

पौड़ी में शिवशँकर सँग राहुदेव मन्दिर:

पौड़ी के पैठानी गाँव में राहु देव का मन्दिर राहुदेव का एकमात्र मन्दिर है जहाँ लोग भगवान शिव शँकर के साथ राहु की पूजा करने के लिए साल भर आते हैं! राहु के इस मन्दिर में तीर्थयात्री राहु को प्रसाद के रूप में मूंग की खिचड़ी चढ़ाते हैं!

स्थानीय लोगों के अनुसार कहा जाता है कि आदि शँकराचार्य ने इस मन्दिर का निर्माण करवाया था! जब उन्होंने इस स्थान का दौरा किया तो उन्हें पौड़ी के ग्राम पैठाणी के इस क्षेत्र में राहु के प्रभाव का एहसास हुआ था, इसके बाद शँकराचार्य ने यहाँ राहु मन्दिर का निर्माण कराया!

राहु मन्दिर के बारे में इतिहास और पौराणिक कथा :

‘स्कंद पुराण’ के केदारखंड में उल्लेख है कि रथ वाहिनी और नवलिका नदी के संगम पर, राष्ट्रकूट पर्वत की तलहटी में, राहु ने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी, जिसके कारण राहु मंदिर की स्थापना हुई थी! इसे रथक्षेत्र कहा जाता है, जिसका नाम राष्ट्रकूट पर्वत के नाम पर रखा गया है! साथ ही राहु के गोत्र “पैठिनसी” के कारण इस गांव का नाम बाद में पैठणी पड़ा! राहु मंदिर उत्तराखंड में हिमालय की गोद में स्थित है! पैठानी गांव का राहु मंदिर सनातनी संस्कृति की सुंदरता है जिसे भगवान ने पूजा की, साथ ही राक्षसों या असुरों को भी इसी अर्थ में। पैठानी गांव में राहु मंदिर पूरे देश में एकमात्र ऐसा मंदिर हो सकता है जहां राहु की पूजा की जाती है!

राहु मंदिर पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण प्रखंड के पैठानी गांव में सियोलीगढ़ और नवलिका नदियों के संगम पर स्थित है! यह कोटद्वार से १५० किलोमीटर और पौड़ी जिला मुख्यालय से ४६ किमी की दूरी पर स्थित है!

राहू मन्दिर स्थान :

पैठानी गांव, पौड़ी कोटद्वार से १५० किलोमीटर और पौड़ी जिला मुख्यालय से ४६ किलोमीटर्स है!

प्रवेश प्रकार :

नि: शुल्क प्रवेश 

राहू देव स्तोत्रम् :

अस्य श्रीराहुस्तोत्रस्य वामदेव ऋषिः । गायत्री छन्दः । राहुर्देवता ।
राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥
राहुर्दानव मन्त्री च सिंहिकाचित्तनन्दनः ।
अर्धकायः सदाक्रोधी चन्द्रादित्यविमर्दनः ॥ १ ॥
रौद्रो रुद्रप्रियो दैत्यः स्वर्भानुर्भानुमीतिदः ।
ग्रहराजः सुधापायी राकातिथ्यभिलाषुकः ॥ २ ॥
कालदृष्टिः कालरुपः श्रीकष्ठह्रदयाश्रयः ।
विधुंतुदः सैंहिकेयो घोररुपो महाबलः ॥ ३ ॥
ग्रहपीडाकरो द्रंष्टी रक्तनेत्रो महोदरः ।
पञ्चविंशति नामानि स्मृत्वा राहुं सदा नरः ॥ ४ ॥
यः पठेन्महती पीडा तस्य नश्यति केवलम् ।
विरोग्यं पुत्रमतुलां श्रियं धान्यं पशूंस्तथा ॥ ५ ॥
ददाति राहुस्तस्मै यः पठते स्तोत्रमुत्तमम् ।
सततं पठते यस्तु जीवेद्वर्षशतं नरः ॥ ६ ॥ ॥
इति श्रीस्कन्दपुराणे राहुस्तोत्रम् संपूर्णम् ॥

क्या होता है राहु स्तोत्रम् :

राहु स्त्रोतम राहु गृह के दोष को शांत करने का एक अनूठा जाप मंत्र है! धार्मिक ग्रंथों के अनुसार राहु स्त्रोतम के जाप से राहु देवता प्रशन्न होते है और मनवांछित कामना के पूर्ण होने का आशीर्वाद देते हैं! हिन्दू ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नौ ग्रहों में से राहु आखिरी एक गृह है! यह गृह लम्बे समय अंतराल के बाद अपनी स्थिति में परिवर्तन करता है! कुंडली में राहु की स्थिति के अनुसार राहु शुभ और अशुभ परिणाम डाल सकता है! नौ ग्रहों में सबसे अधिक नकारात्मक फल देने वाला असुर गृह माना जाता है राहु को! राहु एक ऐसा गृह है जो दूसरों को कष्ट देकर उनके बनते कार्य बिगाड़कर प्रशन्न होता है! यदि राहु नीच स्थान पर बैठा हो तो किसी को समूल नष्ट करने की ताकत रखता है! बात राहु के सकारात्मक प्रभाव की करे तो व्यक्ति राजनैतिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है, उसका व्यक्तित्वा प्रभावशाली होता है और अन्य लोग उसकी बातों का अनुसरण करते हैं! समाज में प्रशिधि प्राप्त होती है और सामाजिक कद बढ़ता है! राहु के दोष को दूर हटाने के लिए लिए राहु स्त्रोतम का पाठ अवश्य करे साथ जी “हनुमान चालीसा” का पाठ करे! अष्ट धातु का कड़ा और नीले रंग के वस्त्र पहनने चहिये साथ ही सफ़ेद चंदन टीका लगाना लाभदायक होता है!

राहु स्तोत्रम् के लाभ : –

राहु स्त्रोतम के जाप से राहु दोष दूर होता है! राहु स्त्रोत के जाप से राहु अन्तर्दशा शांत होती है और मनवांछित परिणाम प्राप्त होने लगते हैं! वस्तुतः राहु जिस गृह के साथ बैठा होता है उसकी शक्ति अपने में ले लेता है! साथ में जो भी गृह होता है उसके सुभ फल लेकर राहु, ग्रहण की दशा का निर्माण करता है! राहु स्त्रोतम का पाठ सांय के समय स्नान करके राहु देव की मूर्ति के सामने बैठकर जाना लाभदायी होता है!

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

हवाई मार्ग से: १३३ किलोमीटर की दूरी पर स्थित जॉली ग्रांट हवाई अड्डा पौड़ी गढ़वाल का निकटतम हवाई अड्डा है! जॉली ग्रांट हवाई अड्डा दैनिक उड़ानों के साथ दिल्ली और दुनियाँ से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है! पौड़ी जॉली ग्रांट हवाई अड्डे के साथ मोटर योग्य सड़कों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है! जॉली ग्रांट हवाई अड्डे से ऋषिकेश, देवप्रयाग और पौड़ी के लिए टैक्सी उपलब्ध हैं!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

रेल द्वारा आप नई दिल्ली से पौड़ी गढ़वाल के लिए लोकप्रिय ट्रेनें
१९०३१ – योग एक्सप्रेस। एमटीडब्ल्यूटीएफएसएस पर चलता है | अन्यकक्षाएं २एस, २ए, १ए, ३ए, एसएल। …
१२०५५ – डीडीएन जनशताब्दी। एमटीडब्ल्यूटीएफएसएस पर चलता है | जन शताब्दी कक्षा २एस, सीसी। …
१४०४१ – मसूरी क्स्प. १०:४१ अपराह्न। …
१२०१७ – ददन शताब्दी क्स्प. एमटीडब्ल्यूटीएफएसएस पर चलता है | शताब्दी क्लासेस सीसी, ईसी। …
१९०१९ – ब्ड़ट्स हव क्स्प. स्टेशन से कैब द्वारा जा सकते हैं राहू मन्दिर पौड़ी, उत्तराखण्ड पहुँच जाओगे!

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें मन्दिर :

अंतर्देशीय बस स्थानक यानी ISBT से आप तक़रीबन ८ घण्टे ३७ मिनट्स में आप राष्ट्रीय राजमार्ग NH:३३४ द्वारा ८६.५ किलोमीटर की यात्रा तय करके बस अथवा स्वयँ की कार द्वारा राहु मन्दिर पौड़ी, उत्तराखंड पहुँच जाओगे!

राहु देव की जय हो! जयघोष हो!!

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