श्री शनि देव मन्दिर गाँव डबुआ, फरीदाबाद, हरियाणा भाग: २४०,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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भारत के धार्मिक स्थल : श्री शनि देव मन्दिर गाँव डबुआ, फरीदाबाद, हरियाणा भाग: २४०

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा माँ दुर्गा भवानी मन्दिर, करनाल, हरियाणा! यदि आपसे उक्त लेख छूट अथवा रह गया हो तो आप प्रजा टुडे की वेबसाईट http://www.prajatoday.com पर जाकर धर्म साहित्य पृष्ठ पर जाकर पढ़ सकते हैं! आज हम आपके लिए लाएं हैं।

भारत के धार्मिक स्थल : श्री शनि देव मन्दिर गाँव डबुआ, फरीदाबाद, हरियाणा भाग: २४०

शनिदेव मंदिर से निकाली गई कलश यात्रा : गाँव डबुआ स्थित भूमिया खेड़ा देवत आश्रम व शनिदेव मन्दिर की ओर से श्रीमद्भागवत कथा के उपलक्ष्य में कलश यात्रा निकाली गई! ढ़ोल बाजों के साथ १५१ महिलाओं ने गाँव डबुआ स्थित भूमिया खेड़ा देवत आश्रम व शनिदेव मन्दिर की ओर से श्रीमद्भागवत कथा के उपलक्ष्य में कलश यात्रा निकाली गई! ढ़ोल बाजों के साथ १५१ महिलाओं ने कलश यात्रा में हिस्सा लिया! कलश यात्रा परिक्रमा लगाते हुए वापस कथा स्थल पर पहुंची! जहां पूरे विधि-विधान से कलशों की स्थापना की गई! शिव मन्दिर के सेवक बाबा राधा कृष्ण दास ने लोगों के साथ कथा स्थल पर पूजा अर्चना की! वृन्दावन से आए कथा व्यास श्रद्वेय राधा शरण शास्त्री जी ने कथा का वाचन किया! राधा शरण शास्त्री ने कहा कि कोई भी शुभ कार्य करने से पूर्व कलश की स्थापना की जाती है ताकि लोगों के घर में धन और धान्य की कोई कमी न रहे!

यह शनि मन्दिर भी स्थानीय रहवासियों में प्रसिद्धि पा रहा है!मेरे आदरणीय बड़े भाई साहब भजनानंदी प्रसिद्ध गायक पँ० ब्रह्मर्षि शर्मा शास्त्री जी यहाँ सँस्कृत और सङ्गीत के प्राध्यापक रहे! अब भी वो डबुआ की रामलीला कमेटी में प्रति वर्ष राम लीला में सङ्गीत निर्देशन करते हैं! शनि देव और हनुमानजी में उनकी प्रगाढ़ आस्था है! आज भी वो शनि मङ्गल को डबल पाठ करते हैं! राम जी उन्हेँ स्वस्थ प्रसन्न और दीर्घायु प्रदान करें!

गाँव डबुआ स्थित भूमिया खेड़ा देवत आश्रम व शनिदेव मन्दिर की अपार मान्यता है व दिन प्रति दिन यह मान्यता बढ़ती जा रही है! जैसे जैसे श्रद्धालु-लोगों के काम सँवरते हैं, शनि देव मन्दिर की आस्था बढ़ती जाती है! यहाँ प्रत्येक शनिवार को विशेष प्रबन्ध होता है! कोविड-१९ के चल्ते यहाँ प्रायः लोग शनि देव की पूजा अर्चना आते तो नियमानुसार मास्क लगा कर विधिवत पूजा अर्चना करते! यहीँ मन्दिर में चढ़ाने को सामग्री पास से ही मिल जाती है!

शनिवार को जो इस शनि स्तुति का पाठ करता है! हर पल रक्षाकरते हैं श्री शनि देव! जीवन की समस्त समस्याओं से हमेशा के लिए मुक्ति पाना चाहते हो तो आज से ही शनि देव की इस स्तुति का पाठ सवा महीने तक अवश्य करें! इस स्तुति का पाठ करते समय सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं! ऐसा करने से पाठकर्ता की सभी कामनाएं शनिदेव पूरी कर सकते हैं!शनिवार को जो इस शनि स्तुति का पाठ करता है हर पल रक्षा ,शनिवार को इस शनि स्तुति का पाठ करने से सकल दुःखों का नाश हो जाता है!

।। श्री शनि देव स्तुति ।।

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥
शनिवार को इस शनि स्तुति का पाठ करता है हर पल रक्षा
॥ चौपाई ॥
जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥
परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवन चमाचम चमके। हिये माल मुक्तन मणि दमकै॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
पिंगल, कृष्णो, छाया, नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन॥
सौरी, मन्द शनी दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
जापर प्रभु प्रसन्न हवैं जाहीं। रंकहुं राव करैं क्षण माहीं॥
पर्वतहू तृण होइ निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥
राज मिलत वन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुं की मति हरि लीन्हयो॥


वनहुं में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥
लषणहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥
रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग वीर की डंका॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥
भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलहिं घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥
श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥
तनिक विकलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गतो गौरिसुत सीसा॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रोपदी होति उधारी॥
कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥
रवि कहं मुख महं धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥
शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
जम्बुक सिह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिह सिद्धकर राज समाजा॥
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
जब आवहिं स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥
तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चांदी अरु तामा॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्वसुख मंगल भारी॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥
अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥
॥ दोहा ॥
पाठ शनिश्चर देव को,
की हों ‘भक्त’ तैयार।
करत पाठ चालीस दिन,
हो भवसागर पार॥
॥ इति श्री शनि देव चालीसा समाप्त ॥

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें:

फ्लाइट से आपको दिल्ली के हवाईअड्डे उतरकर दिल्ली पालम के इन्दिरगाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से कैब द्वारा किलोमीटर्स की यात्रा कर पहुँच जाओगे फ़रीदाबाद के डबुआ गाँव के श्री शनि देव मन्दिर!

रेल मार्ग से कैसे पहुँचें:

रेलवे के लोहपथगामिनी मार्ग से दिल्ली से बल्लभगढ़ पहुँच जाओगे! वहाँ से मन्दिर पहुँचने के लिए कैब, रिक्शा ऑटो रिक्शा द्वारा आसानी से फ़रीदाबाद के डबुआ गाँव के श्री शनि देव मन्दिर पहुँच जाओगे !

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें:

आप कार अथवा बस से दिल्ली से रवाना होते हो तो मन्दिर पहुँचने के लिए आप एक घण्टे ५८ मिनट्स का रास्ता तय करते हुए ६१ किलोमीटर की यात्रा करके राष्ट्रीय राजमार्ग NH: G.T. मार्ग द्वारा आप श्री शनि देव मन्दिर पहुँच जाओगे!

श्री शनि देव की जय हो! जयघोष हो!!

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