श्री सूर्यदेव भगवान मन्दिर, झालावाड़, राजस्थान भाग:३२५,पँ० ज्ञानेश्वर हँस “देव” की क़लम से

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श्री सूर्यदेव भगवान मन्दिर, झालावाड़, राजस्थान भाग:३२५

आपने पिछले भाग में पढ़ा होगा भारत के धार्मिकस्थल :श्री शनैश्चराय भगवान मन्दिर, तिरुनल्लार, उथामापालयम, थेनी मार्ग, कुचनूर, तमिलनाडू। यदि आपसे उक्त लेख छूट गया या रह गया हो तो आप कृपया करके प्रजा टूडे की वेब साईट पर जाकर www.prajatoday.com धर्मसाहित्य पृष्ठ पढ़ सकते हैं! आज हम प्रजाटूडे समाचारपत्र के अति-विशिष्ट पाठकों के लिए लाए हैं:

श्री सूर्यदेव भगवान मन्दिर, झालावाड़, राजस्थान भाग:३२५

सूर्य मन्दिर, झालावाड़

राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित एक एतिहासिक मन्दिर। झालरापाटन को घंटियों का शहर, अंग्रेज़ी में सिटी ऑफ बेल्स कहा जाता है। शहर के मध्य स्थित सूर्य मन्दिर झालरापाटन का प्रमुख दर्शनीय स्थल है।

वास्तुकला की दृष्टि से भी यह मन्दिर अहम है। इसका निर्माण दसवीं शताब्दी में मालवा के परमार वँशीय राजाओं ने करवाया था। मन्दिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा विराजमान है। इसे पद्मनाभ मन्दिर तथा सात सहेलियोँ का मन्दिर भी कहा जाता है। यह १७ फुट ऊँचा तथा कोणार्क सूर्य मन्दिर के समान शिखर पर है। शिल्प सौन्दर्य की दृष्टि से मन्दिर की बाहरी व भीतरी मूर्तियाँ वास्तुकला की चरम ऊँचाईयों को छूती है।

मन्दिर का ऊर्घ्वमुखी कलात्मक अष्टदल कमल अत्यन्त सुन्दर जीवंत और आकर्षक है। शिखरों के कलश और गुम्बज अत्यन्त मनमोहक है। गुम्बदों की आकृति को देखकर मुग़लकालीन स्थापत्य एवँ वास्तुकला का स्मरण हो जाता है। झालारापाटन का सूर्य मन्दिर राजस्थान के प्राचीन मन्दिरों में से एक है। कहा जाता है कि इस मन्दिर का निर्माण नाग भट्ट द्वितीय ने विक्रम सँवत ८७२ में करवाया था, तदनुसार इसे ८१५ ईस्वी में बनाया गया।

सूर्य मंदिर की विशेषता :

जैसा कि विदित है कोणार्क मन्दिर को भगवान सूर्य देव के रथ के आकार में बनाया गया है और इस रथ के कुल २४ पहिये है, साथ ही सात घोडे है। कोणार्क मन्दिर लाल बलुआ और ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ है। सूर्य मन्दिर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है। सूर्य मन्दिर समय की गति को दर्शाता है, जिसे सूर्य देवता नियंत्रित करते हैं। लेकिन झालावाड़ राजस्थान के इस सूर्यदेव भगवान मन्दिर की अन्य विशेषताएँ हैं। यहाँ आकर सच्चे हृदय से जो भी श्री सूर्यदेव के इस मन्दिर में आता है उसकी प्रसिद्धि बढ़ जाती है।

सूर्य नमस्कार के अभूतपूर्व लाभ:

सूर्य नमस्कार का सम्बन्ध योग एवँ प्राकृतिक चिकित्सा से भी जुड़ा हुआ है। सूर्य की ऊष्मा एवँ प्रकाश से स्वास्थ्य में अभूतपूर्व लाभ होता है और बुद्धि की वृद्धि होती है। सूर्य नमस्कार की विधियाँ मुख्य रूप से हस्तपादासन, प्रसरणासन, द्विपाद प्रसरणासन, भू-धरासन, अष्टांग, प्रविधातासन तथा सर्पासन इन आसनों की प्रक्रियाएँ अनुलोम- विलोम क्रम से की जाती हैं।

सूर्य के अभीष्ट मोक्ष प्रार्थना:

सूर्य के प्रकाश एवँ सूर्य की उपासना से कुष्ठ, नेत्र आदि रोग दूर होते हैं। सब प्रकार का लाभ प्राप्त होता है। अर्थात मनुष्य भगवान जनार्दन विष्णु से मोक्ष की अभिलाषा करनी चाहिए। सूर्य अशुभ होने पर उक्त राशि वाले को अग्निरोग, ज्वय बुद्धि, जलन, क्षय, अतिसार आदि रोगों से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य समस्त ग्रह एवं नक्षत्र मंडल के अधिष्ठाता है तथा काल के नियंता हैं। आप किसी और को ऐसा नमस्कार करें या न करें, परंतु प्रत्येक दिन प्रात:काल कम से कम सूर्य नमस्कार अवश्य करें, क्योंकि सूर्य नमस्कार ही साष्टांग नमस्कार है। इस करने से मानव निरोग, वैभवशाली, सामर्थ्यवान, कार्यक्षमतावान होता है और सूर्य प्रार्थना से व्यक्तित्व प्रतिभाशाली हो जाता है। जिह्वा पर सत्य और लोगों की भलाई करने में सक्षम हो जाते हैं।

श्री सूर्यदेव भगवान का अर्घ्य मन्त्र :-

सूर्य को निम्नलिखित मन्त्र बोल करके अर्घ्य प्रदान करें-

ॐ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।। ॐ सूर्याय नम:, ॐ आदित्याय नम:, ॐ नमो भास्कराय नम:। अर्घ्य समर्पयामि।।

ध्यान मंत्र :-

ध्येय सदा सविष्तृ मंडल मध्यवर्ती।
नारायण: सर सिंजासन सन्नि: विष्ठ:।।
केयूरवान्मकर कुण्डलवान किरीटी।
हारी हिरण्यमय वपुधृत शंख चक्र।।
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाधुतिम।
तमोहरि सर्वपापध्‍नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम।।
सूर्यस्य पश्य श्रेमाणं योन तन्द्रयते।
चरश्चरैवेति चरेवेति…!

सूर्य का श्रम देखो कि वह कभी विश्राम नहीं करता इसीलिए आगे बढ़ो, आगे बढ़ो, बढ़ते रहो।भगवान सूर्यदेव की कृपा पाना चाहते हैं तो छठ पर्व के दिनों में अवश्य पढ़ें सूर्य चालीसा का संपूर्ण पाठ। शुभ फलदायी होती है सूर्यदेव की आराधना, प्रतिदिन करें आरती, जीवन में आएंगी खुशियां।

सूर्य अर्घ्य व चालीसा का महत्व :

सूर्य चालीसा का पाठ : सूर्य उपासना का सबसे शुभ और सरल उपाय है। भारतीय परंपरा में प्रतिदिन सूर्य देव की पूजा और सूर्य को अर्घ्य देने का खास महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सूर्य देव हिन्दू धर्म के देवता हैं। सूर्य देव को एक प्रत्यक्ष देव माना जाता है। सूर्य देव इस जगत की आत्मा है। खास तौर पर छठ पर्व के दौरान सूर्य की उपासना करने का विशेष महत्व माना गया है।

अत: सूर्य की आराधना करते समय श्री सूर्य चालीसा का पाठ बहुत ही लाभदायी माना गया है। अगर आप भी हर तरह की सुख-संपत्ति और पुत्र की प्राप्ति चाहते हैं तो आपको इस चालीसा का पाठ अवश्‍य करना चाहिए। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं सूर्य चालीसा का संपूर्ण पाठ, अवश्‍य पढ़ें…

श्री सूर्य चालीसा :

दोहा

 कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।

चौपाई:

जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।

विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।

सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।

मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।

मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,

आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।

चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।

सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।

उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।

अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।

भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।

कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।

युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।

जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।

सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।

दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।

ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।

धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।

परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।

भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।

दोहा:

भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।

।। अथ सूर्य चालीसा समाप्त ।।

बहुत शक्तिशाली हैं सूर्य देव के ये १२ मन्त्र :

जपते ही पूरी होती है हर इच्छा बहुत शक्तिशाली हैं सूर्य देव के ये १२ मन्त्र, जपते ही पूरी होती है हर इच्छा रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित किया गया है। इस दिन सूर्य देव के मन्त्रों का जाप करने से कई फायदे होते हैं। सूर्य देव के मन्त्रों में इतनी ताकत है कि आप इनका जाप कर अपनी हर मनोकामना पूरी कर सकते हैं।

रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित किया गया है। इस दिन सूर्य देव के मन्त्रों का जाप करने से कई फायदे होते हैं। सूर्यदेव के मन्त्रों में इतनी ताकत है कि आप इनका जाप कर अपनी हर मनोकामना पूरी कर सकते हैं।

रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित किया गया है। इस दिन सूर्य देव के मन्त्रों का जाप करने से कई फायदे होते हैं। सूर्यदेव के मन्त्रों में इतनी ताकत है कि आप इनका जाप कर अपनी हर मनोकामना पूरी कर सकते हैं।

सूर्य देव का ज्योतिष शास्त्र में भी अत्यंत महत्व बताया गया है। सूर्य देव ऐसे देवता हैं, जो नियमित रूप से अपने भक्तों को दर्शन देते हैं. रविवार के दिन इनकी पूजा-आराधना का विशेष महत्व है. सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए मात्र एक लोटा जल ही काफी है. नियमित रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देकर कई समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है. साथ ही इस उपाय से मान-सम्मान में वृद्धि, नौकरी में तरक्की और अनेक सफलता के द्वार खुल जाते हैं। भोपाल के रहने वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बता रहे हैं किस काम के लिए सूर्य देव के १२ मन्त्रों में से किसका जाप करना लाभकारी होता है।

१. ॐ हृां मित्राय नम:

अगर आप अच्छी सेहत पाना चाहते हैं और चाहते हैं कि आपकी कार्य करने की क्षमता बढ़ जाए, तो आप सूर्य देव के पहले मन्त्र का जाप उन्हें अर्घ देते समय नियमित रूप से करें।

२. ॐ हृीं रवये नम:

अगर आप क्षय व्याधि से परेशान हैं और अपने शरीर का रक्त संचार ठीक करना चाहते हैं, तो सूर्य देव के सामने खड़े होकर इस मंत्र का जाप करें. इससे कफ आदि से जुड़े रोग भी दूर होते हैं।

३. ॐ हूं सूर्याय नम:

मानसिक शांति के लिए सूर्य देव के इस मंत्र का जाप करना चाहिए. इससे बुद्धि में भी वृद्धि होती है।

४. ॐ ह्रां भानवे नम:

मूत्राशय से जुड़ी समस्याओं के लिए आप इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।

५. ॐ हृों खगाय नम:

मलाशय से संबंधित समस्या के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए. इसके जाप से बुद्धि का विकास होता हैं और शरीर का बल भी बढ़ता है।

६. ॐ हृ: पूषणे नम:

आप अपना बल और धैर्य बढ़ाना चाहते हैं, तो इस मंत्र का जाप करें. इससे मनुष्य का मन धार्मिक कर्मों में भी लगता है।

७. ॐ ह्रां हिरण्यगर्भाय नमः

इस मंत्र का लाभ छात्रों को विशेष रूप से मिलता है. इसके जाप से शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक शक्तियां विकसित होती हैं।

८. ॐ मरीचये नमः

इस मंत्र के जाप से मनुष्य स्वस्थ काया प्राप्त करता है. इससे मनुष्य को कोई रोग नहीं होते।

९. ॐ आदित्याय नमः

इस मंत्र का जाप करने से बुद्धि तीव्र होती है और आर्थिक समस्या दूर होती है।

१०. ॐ सवित्रे नमः

इस मंत्र के जाप से मनुष्य का मान-सम्मान बढ़ता है. साथ ही सूर्य देव की विशेष कृपा बनी रहती है. इसके अलावा मनुष्य की कल्पनाशक्ति भी बढ़ती है।

११. ॐ अर्काय नमः

यदि आप वेदों के रहस्य को जानना चाहते हैं तो इस मंत्र का जाप लाभदायक हो सकता है. इसके अलावा इस मंत्र के जाप से मन दृढ़ होता है. जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं।

१२. ॐ भास्कराय नमः

इस मंत्र के जाप से आंतरिक और बाहरी शरीर स्वच्छ रहता है. साथ ही मन भी प्रसन्न रहता है। सूर्य देव की कृपा पाने के लिए प्रतिदिन उन्हें नियमित रूप से अर्घ्य दें. प्रतिदिन सम्भव ना हो तो हर रविवार अर्घ्य दें और इनमें से कोई एक मंत्र का जाप करें। इससे सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत का वरदान मिलेगा।

पता :

श्री सूर्यदेव भगवान मन्दिर, मुखर्जी मोहल्ला, त्रिवेणी नगर, झालावाड़, राजस्थान!
पिनकोड :

हवाई मार्ग से कैसे पहुँचें :

हवाई मार्ग से झालावाड़ पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा कोटा हवाई अड्डा है। झालावाड़ पहुंचने के लिए देशी और विदेशी पर्यटक टैक्सी किराए पर ले सकते हैं। राजस्थान और शेष भारत के प्रमुख गंतव्यों के लिए कई नियमित उड़ानें हैं। भारतीय एयरलाइंस और निजी एयरलाइंस ऑपरेटर भारत के प्रमुख शहरों से कोटा हवाई अड्डे के लिए दैनिक उड़ानें संचालित कर रहे हैं।

लोहपथगामिनी मार्ग से कैसे पहुँचें :

रेल द्वारा निकटतम रेलवे स्टेशन: ट्रेन से यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि झालावाड़ में कोई बड़ा रेलवे स्टेशन नहीं है। एकमात्र सब रेलवे स्टेशन भवानी मण्डी में स्थित है जो झालावाड़ से थोड़ी दूर है। झालावाड़ पहुंचने के लिए ट्रेन यात्रा न करने की अत्यधिक सलाह दी जाती है क्योंकि इस उप-रेलवे स्टेशन से मुख्य शहर तक की कनेक्टिविटी बहुत खराब है। झालावाड़ पहुंचने के लिए पर्यटकों को स्थानीय रिक्शा पर निर्भर रहना पड़ता है। उधर, इस खास रेलवे स्टेशन पर सिर्फ पैसेंजर ट्रेनें रुकती हैं।

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचें :

दिल्ली के ISBT से आप अपनी कार बाइक या बस से आते हैं तो NH : ४८ तथा ५२ द्वारा आप ६११.६ किलोमीटर की यात्रा करके ११ घण्टे ४५ मिन्ट्स में पहुँच सकते हैं श्री सूर्यदेव भगवान मन्दिर। झालावाड़ राजस्थान के श्री सूर्यदेव भगवान मन्दिर!

सड़क मार्ग द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या १२, झालावाड़ शहर से होकर गुजरता है। इस कस्बे में सड़कों का नेटवर्क बेहतर है। इस शहर से राजस्थान और शेष भारत के सभी बड़े और छोटे शहरों और कस्बों के लिए बसों की अच्छी कनेक्टिविटी है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस शहर में सड़क नेटवर्क अच्छी तरह से बनाए रखा गया है। परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ इस शहर की निजी यात्रा के लिए एक लक्जरी वैन या टैक्सी किराए पर लेने की सलाह दी जाती है।

श्री सूर्यदेव भगवान की जय हो। जयघोष हो।।

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